छत्तीसगढ़

पदोन्नति में आरक्षण सुप्रीम कोर्ट व मध्यप्रदेश में लागू ,तो छत्तीसगढ़ में कब यक्ष प्रश्न

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
लगातार पदोन्नति देने ,सरकार के टालमटोल नीति बाधक से पिंगुआ कमेटी का आखिर क्या औचित्य ? 46 प्रतिशत आबादी प्रतिनिधत्व से सीधे वंचित।
गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफ़ेयर एसोसिएशन छ ग के प्रदेशाध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग उप प्रांताध्यक्ष भोलाराम मरकाम ने छत्तीसगढ़ सरकार के टालमटोल रवैया एवं अनु जाति जनजाति के हितों के प्रति अनदेखी के कारण राज्य में 46 प्रतिशत से अधिक आबादी के लोगों को स्थानीय भर्ती व पदोन्नति में आरक्षण नहीं मिलने के कारण प्रतिनिधित्व से वंचित हो गए हैं। सरकार विगत दो वर्षों से बिना आरक्षण के पदोन्नति दे रहीं है वहीं मातृ प्रदेश मध्यप्रदेश तथा भारत के सर्वोच्च न्यायिक संवैधानिक संस्था में भर्ती तथा पदोन्नति में आरक्षण लागू हो गई है तो छत्तीसगढ़ में जहाँ आरक्षित वर्ग के लोगों की संख्या 46 तथा 90प्रतिशत से अधिक है में आरक्षण को रोक कर रखना इन लोगों के हितों से वंचित करना है ,संगठन के प्रदेश सचिव राधेश्याम टंडन ,महिला प्रकोष्ठ के संगीता पाटले ,रायपुर अध्यक्ष एवन बंजारे महामंत्री बसंत व सनत बंजारे जिला अध्यक्ष बस्तर एम के राणा व बसंतजांगड़े ने सरकार पर एस सी एस टी के हितों के प्रति अनदेखी का आरोप लगाया और कहाँ की जब पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए छ ग सरकार ने अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ के अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर तीन महीने में रिपोर्ट मांगी थी तो आज साल भर से अधिक बीत जाने के बावजूद अपने प्रतिवेदन प्रस्तुत करने में क्यों नाकाम हो रहीं है ,सरकार दूसरे तरफ बिना आरक्षण के धड़ाधड़ पदोन्नति दी है और लगतार जारी है तो किस पद में आरक्षण देगी। गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफ़ेयर एसोसिएशन छ ग ने छ ग सरकार से पिगुआ कमेटी की रिपोट तत्काल प्रस्तुत करने निर्देशित करने ,पदोन्नति में आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग की है ,
कृष्णकुमार नवरंग
प्रांताध्यक्ष
7898154376