विश्व आदिवासी दिवस पर हजारों की संख्या में आदिवासी एकत्रित हुए-पृथक धर्म कोड की मांग उठी
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
दिनांक 11.08.2025 को आदिवासी ध्रुव गॉड समाज धौराभांठा के तत्वावधान में स्थान-बाजार चौक धौराभांठा में विश्व आदिवासी दिवस वर्ष 2025 का गरिमामयी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मान श्री संतोष नेताम (वन क्षेत्राधिकारी खैरागढ़), अध्यक्षता मान.श्री राम सुमेर कतलम (अध्यक्ष आदिवासी ध्रुव गोड़ समाज धौराभाठा), विशेष अतिथि मान.श्री संतलाल कोड़प्पा (तहसील अध्यक्ष आदिवासी ध्रुव समाज पाटन राज), मान. श्री चन्द्रभान नेताम (प्रांताध्यक्ष गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति रायपुर), श्री प्रीतम छेदैहा (महासचिव गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति रायपुर), श्री गजानंद नुरूटी (प्रांतीय सचिव गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति रायपुर), सर्वश्री रूपेन्द्र नेताम् बाबुलाल नेताम, ललित नेताम, गुहाराम नेताम सहित युवा शक्ति, युवती शक्ति हजारों की संख्या में आदिवासी समाज एकत्रित हुए।
इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रस्तावना/ उद्देशिका का वाचन किया गया। वक्ताओं द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस की महत्व को बताया गया। युवा युवती शक्तियों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रदर्शन/रेला पाटा के माध्यम से समाज को जागृति करने का प्रयास किये। वहीं सर्वमतेन आगामी जनगणना प्रपत्र में आदिवासियों के लिए पृथक धर्म कोड कॉलम न. 07 आबंटित करने की मांग भी की गई।
मुख्य अतिथि श्री संतोष नेताम ने आदिवासी समाज को पर्यावरण के प्रति जागृति करते हुए पेड़ लगाने, धरती को सजाने की अपील की। उन्होंने पेड़ पौधे को देवतुल्य बताते हुए इसकी रक्षा के लिए संकल्पित होने का आव्हान किया।
श्री चन्द्रभान नेताम ने समाज को पूरखों की बनायी व्यवस्था की जानकारी देते हुए उनके बताये मार्ग पर चलने, उच्च शिक्षित व संस्कारित होने, अपने अधिकारों को जानने व सहयोग की भावना से कार्य करते हुए समाज की सर्वांगीण विकास में सहभागी बनने की अपील की।
श्री प्रीतम छेदैहा ने आदिवासी संस्कृति को विश्व संस्कृति की जननी बताते हुए संस्कृति के अनुरूप जीवन जीने, विश्व आदिवासी दिवस की महत्व को बताते हुए आदिवासियत को कायम रखने, शिक्षा को बढ़ावा देने, नशामुक्त समाज संरचना करने, संगठित एवं सहयोग की भावना से कार्य करने की अपील की। कार्यक्रम हर्षोल्लास के सायं 6.00 बजे समापन किया गया।

