1857 की क्रांति के प्रणेता राजा शंकर शाह मरावी और कुॅंवर रघुनाथ शाह मरावी का शौर्य दिवस, महापुरुषों को किया याद
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज दिनांक 18/09/2025 दिन – गुरुवार को बालोद जिला के गोंडवाना भवन बालोद में 1857 की क्रांति के अमर शहीद राजा शंकर शाह मरावी और उनके पुत्र कुॅंवर रघुनाथ शाह मरावी जी के 168 वॉं शौर्य दिवस मनाया गया। गोंड़वाना स्टुडेंट्स युनियन जिला – बालोद (छ.ग.) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 1857 की क्रांति के अमर शहीद राजा शंकर शाह मरावी और उनके पुत्र कुॅंवर रघुनाथ शाह मरावी जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें पेनांजलि दी गई। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि- तिरु. *”हेमलाल मरकाम”* जी पूर्व सदस्य जिला पंचायत कांकेर (अध्यक्ष- राष्ट्रीय कार्यवाहक युवा मोर्चा गोगपा) एवं कार्यक्रम के अध्यक्षता – तिरु.- *तुलेश्वर हिचामी* जी जनपद पंचायत सदस्य डौण्डी (अध्यक्ष- गोड़वाना स्टुडेंट्स युनियन जिला-बालोद) ने शिरकत किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि “*हेमलाल मरकाम”* जी ने लोगों को संबोधित करते हुए शहीद पिता-पुत्र के देश प्रेम और शौर्य दिवस को याद करते हुए उन्हें नमन् किया व 1857 की क्रांति में राजा शंकर शाह व कुॅंवर रघुनाथ शाह को अंग्रेजों ने तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा दिया था ऐसे हमारे महापुरुषों पर हमें गर्व है कि हमारे समाज के लोगों ने अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते अपने मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी। आज की युवा पीढ़ी को इन महापुरुषों के शौर्य दिवस को याद रखना चाहिए, अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुॅंवर रघुनाथ शाह जी की शहादत हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं कहते हुए हमें उनके शौर्य दिवस से यह संदेश मिलता है कि राष्ट्र और समाज के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना हमारा कर्तव्य होना चाहिए। देश की आजादी के संघर्ष में हमारे समुदाय के बहुत से महापुरुषों ने देश के मान सम्मान, स्वाभिमान के लिए मुगलों, अंग्रेजों से युद्ध लड़ा और शहीद हुए लेकिन इतिहास में उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल पाया। *”हेमलाल मरकाम”* जी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता की गाथा हमारे महापुरुषों के खून-पसीने से भी लिखी गई है। हमें अपने महापुरुषों के शौर्य दिवस को कभी नहीं भूलनी चाहिए। आज जरूरत है कि हम अपने इतिहास के वीर महापुरुषों को याद कर नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ें व 1857 की क्रांति केवल स्वतंत्रता का आंदोलन नहीं था, बल्कि यह सामाजिक समानता और न्याय की लड़ाई भी थी। हमें आज भी उनके आदर्शों से सीख लेकर समाज में भाईचारा और समरसता कायम करनी चाहिए और राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के शौर्य दिवस व उनकी गौरवगाथा को स्मरण करते हुए आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम का आभार व्यक्त किया।और इस कार्यक्रम में सम्माननीय तिरु.- तुकाराम कोर्राम जी (अध्यक्ष-सर्व आदिवासी समाज बालोद), तिरुमाय- निलिमाश्याम जी (जिला-पंचयात सदस्य बालोद), तिरु.- मिथलेश नुरूटी (जिला-पंचयात सदस्य बालोद), तिरु.- भोलाराम नेताम (उपाध्यक्ष-जनपदपंचयात डौण्डी), तिरु.- आत्मा कौड़ो (अध्यक्ष गोंड समाज डौण्डी), तिरु.- टंडन कावरे (सामाजिक मार्ग दर्शन), तिरु.- ललित कावरे (अध्यक्ष-सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग बालोद), तिरु.- फिरंता उइके (त. अध्यक्ष-गोडवाना समाज बालोद), तिरु.- सुनील कोरेटी (पूर्व जिला अध्यक्ष GSU बालोद), तिरुमाय- गरिमा साहू (वीरांगना रानी दुर्गावती बालिका छात्रगृह आवास बालोद) चमन कुमेटी, मोनिका गावड़े, शारदा सेवता, डिम्पल उइके, रोशनी सलाम, चंद्रेश उसेंडी, आरती उसेंडी, मोना मरकाम, प्रीति मरकाम, राजीव टेकाम, प्रेमलता करगा और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

