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छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति आयोग में भी उन्ही आदिवासी मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा जिन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष को दमदारी के साथ रखा था रमेश चन्द्र श्याम ने .

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य के समक्ष जो सामाजिक मुद्दे कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष ने उठाये थे उसी को रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति आयोग में भी रखा गया. पांच सामाजिक समस्यों पर चर्चा हुई और उनके समाधान भी सुझाए.
प्रथम : आदिवासी जमीन बेनामी तरीके से गैर आदिवासी लोग अपने नियंत्रण में रखे गए आदिवासियों के नाम पर खरीदते हैं और कुछ समय पश्चात कलेक्टर से अनुमति प्राप्त कर अपने नाम पर रजिस्ट्री करवाते हैं. राजस्व अमला भू राजस्व संहिता के उन धाराओं को अनदेखा करते हैं जिसमे बेनामी निषेध अधिनियम 1986 को ध्यान में रखते हुए पड़ताल करना है. और प्रभाव और दबाव में अनुमति पारित कर देते हैं.
समाधान के सुझाव : उन्होंने सुझाव दिया कि गैर आदिवासी को आदिवासी जमीन विक्रय अनुमति पारित करने से पूर्व कलेक्टर यह प्रमाणित करे कि (I) सम्बंधित जमीन को क्रय करते समय बेनामी संव्यवहार नहीं हुआ है. (II) भू राजस्व संहिता के धारा 165 – 6 – ग और स्पष्टीकरण (ख) का पुर्णतः अनुपालन किया गया है.
दूसरा: गैर आदिवासी लोग आदिवासी महिला से व्याह कर उनके नाम पर आदिवासी जमीन खरीदते हैं. आदिवासी महिला के मृत्यु के बाद उनके पति या पुत्र के नाम जो कि गैर आदिवासी नहीं होते हैं के नाम पर फौती नामंतरण कर दिया जाता है… इस पर न कोई सवाल खड़े करता है न कोई आपत्ति करता है.
समाधान के सुझाव : राजस्व विभाग को यह स्पष्ट प्रशासकीय आदेश प्रेषित किया जाए कि ऐसे मामले में नियमानुसार मृत आदिवासी महिला के मायके पक्ष के निकटतम सम्बन्धी के नाम पर फौती नामंतरण किया जाए.
तीसरा : गैर आदिवासी लोग आदिवासी महिला से विवाह कर पंचायत, विधान सभा, लोक सभा के उन सीटों पर चुनाव लड़ते हैं जो आदिवासी के लिए सुरक्षित है. उन्होंने यह मिशाल पेश किया कि बस्तर में बंगलादेशी शरणार्थी लोग इसी तरह सरपंच बने बैठे हैं. बिलासपुर नगर निगम के चार एस टी पार्षद में से एक पार्षद ऐसे ही बना है.
समाधान के सुझाव : विधायी कदम ( Legislativ स्टेप) पर विचार किया जाए.
चतुर्थ : आदिवासियों की आस्था, आराधना और आराध्य हिन्दू, मुस्लिम, सिख इसाई, जैन और बौद्ध से अलग है. जनगणना फ़ार्म में इन छह धर्मों के बाद एक ही विकल्प बचता है : “अन्य” इसलिए आदिवासियों के द्वारा जनगणना में बताये गए गोंडी, पुनेमी, संथाली, भीली इत्यादि धर्म “अन्य” धर्म में चले जाते हैं.
सुझाव : आदिवासियों के के लिए अलग धर्म कालम का विकल्प : आदिधर्म अथवा ट्राइबल रिलिजन रखा जाए.
पांचवां : ग्राम उमरिया तहसील बिल्हा जिला बिलासपुर में गोंड आदिवासियों के लिए चिन्हित श्मशान भूमि पर गैर आदिवासी लोग अतिक्रमण कर घर खेत कोठार बना लिये हैं. उक्त भूमि के मुक्ति के लिए आवेदन तहसीलदार के पास काफी दिनों से लंबित है.
समाधान : सम्बंधित राजस्व अधिकारी को त्वरित निराकरण के लिये निर्देशित किया जाये.
इन पांच बिन्दुओं पर केन्द्रीय जन जाति आयोग को दिए गए अभ्यावेदन की प्रतिलिपि राज्य जनजाति योग के सचिव को दिया गया.