छत्तीसगढ़राष्ट्रीय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सेसंबंध – एक अलौककक अनुभव

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेववजय दशमी के पावन पववपर अपनी एक शताब्दी की यात्रा पूरी कर ली है। हम सब नेबहुत
कु छ जाने अनजाने में इस संस्था के कायव और उनकी संरचना के बारे में सुना है या विर स्वयं भी वकसी न वकसी रूप में
अनुभव वकया है। मेरा भी इस संगठन से जुडाव कु छ इसी प्रकार हुआ।
मैं 31मई 2011 को भारतीय सेना से सेवावनवृत्त हुआ। तब तक, मैने इस संगठन के बारे में के वल अखबारों में, पवत्रकाओं
में या विर कभी वकसी राजनीवतक चचावओं में सुना था। मैं अब यह कह सकता हं वक एक ऐसा संगठन वजसने अपने आप
को केवल मानवता और राष्ट्रको समवपवत कर वदया, मैं स्वयं सेना की नौकरी में कायावन्वित होने के कारण इस संगठन के
उत्कृ ष्ट् कायो से अनवभज्ञ रहा। ऐसा भी नहीं, वक मैंने अपने सेना के सेवाकाल में, इस संगठन के कायों का अनुभव नहीं
वकया, लेवकन कभी ध्यान ही नहीं वदया वक, यह वनस्वाथव भाव से सेवा करने वाले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कायवकतावहै।
सेवावनवृत्त के बाद, मुझे इस संगठन के कु छ कायवक्रमों में भाग लेने का अवसर वमला, इसमें मुझे एक अप्रत्यावशत सुख
का अनुभव हुआ। कभी कभी, कु छ ववववध संगठन मुझे अपने कायवक्रमों में आमंवत्रत करने लगे, मैं जाने लगा, मुझे भी
जाकर बहुत अच्छा लगता था। आत्मीयता, सहजता, नम्रता का व्यवहार मुझे बहुत ही प्रभाववत करता था। सभी को आदर,
सदैव भाषा की मयावदा का पालन, अनुशासन और समय का पालन, मुझे अपने सेना के सेवाकाल की यादों में ले जाता
था।
धीरे-धीरे, मैवबल्कुल राष्ट्रीय स्वयंसेवक की कायवशैली मेंपूरी तरह सेरम गया। मैंराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ महत्वपूणव
पदावधकाररयों के सम्पकव में भी आने लगा, उनकी ववचारधारा, नैवतक मूल्य और राष्ट्रके प्रवत सम्पूणवसमपवण की भावना
मुझे बहुत ही प्रभाववत करने लगी, क्ोंवक ये वही मूल्य थे वजनको मैं सेना में रहते हुए पूणवरूपेण स्वीकार कर चुका था।
इसवलए मुझेराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मेंविर सेअपनापन लगनेलगा और मैंप्राकृवतक रूप सेइस पररवार का एक छोटा
सा वहस्सा बन गया।
‘व्यक्ति कनर्ााण सेराष्ट्रकनर्ााण’ का यह वाक् के वल वाक् नहीं है, मैने इन 12/13 वषों में इस पर कै से अमल वकया
जाता है स्वयं देखा है। ‘संकल्प से वसन्वि’ वकस प्रकार प्राप्त होती है, यह मैंने अनुभव की है। जब भी कोई समस्या, वकसी
भी क्षेत्र से हो, आती है, तो उस पर गहन ववचार वकया जाता है, सामूवहक चचाव होती है, सभी को पूणव स्वतंत्रता होती है
अपने ववचार रखने की, और विर, इस समस्या के समाधान के ववकल्पों पर ववचार कर के वनणवय लेने की पिवत, एक
समावेशी कायवशैली वजसमेंसभी भागीदार होंको इंवगत करती है। यही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ववशेषता है।
मैंपूणवरूप सेआश्वस्त हं और पूरेववश्वास के साथ कहना चाहता हं वक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना एक दैवीय
संयोग है । भारत की पहचान, भारत की संस्कृ वत की वनरंतरता, भाषाओं, ववरासत,धरोहर और परंपराओं की रक्षा के वलए
ईश्वर ने इस संगठन की स्थापना की है। अगर ववजय दशमी के वदन, वषव 1925 मेंराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना परम
पूजनीय डा. के शव बवलराम हेडगेवार द्वारा नहीं की जाती, तो हमारे वप्रय भारत का भववष्य क्ा होता शायद कोई नहीं
बता सकता। के वल कल्पना की जा सकती है। कवठन पररन्वस्थवतयों में, कोई भी साधन न उपलब्ध होने के बाबजूद भी ये
मुठ्ठी भर कमवठ, वनष्ठावान कायवकताव, अपने लक्ष्य की प्रान्वप्त के वलए अपना सवोच्च समवपवत कर के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’
के मागव पर प्रशन्वस्त हो गये और हमारे प्राणों से भी प्यारे भारत की भारतीयता की रक्षा की।
असंख्य कवठनाइयों, सामावजक, प्रशासवनक, राजनीवतक ववरोध और बहुत ही न्यूनतम साधनों के साथ के बावजूद लगन,
येभारत के वीर अपनी प्रवतबिता और वनष्ठा के साथ समपवण भाव सेकेवल राष्ट्रऔर समाज वनमावण के वलए दृढ़ संकल्प
के साथ लगे रहे। भारत को और भारतीयता को बचानेमेंराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का योगदान अकल्पनीय है, अनुकरणीय
है।
आज जब यह बटवृक्ष बहुत ववशाल रुप धारण कर चुका है तो मुझे लगता है वक यह उन महान ववभूवतयों के संघषव, त्याग
तपस्या और बवलदान के कारण ही संभव हुआ है। मैं स्वयं भी एक सैवनक हं,और वनस्वाथव सेवा, सेवा परमोधमव, त्याग,
बवलदान के अथव भली-भांवत समझता हं, लेवकन जो राष्ट्रप्रेम, समाज सेवा और राष्ट्रप्रथम की भावना राष्ट्रीय स्वयंसेवक
संघ के प्रचारक प्रदवशवत करते हैं उसके वलए शायद कोई भी शब्द पयावप्त नहीं है यह एक उत्कृ ष्ट्, अवद्वतीय और
अनुकरणीय मूल्य हैं वजनको हम शब्दों में नहीं बांध पायेंगे, के वल इसका अनुभव ही कर पायेंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ववस्तार आज राष्ट्रके हर आवश्यक क्षेत्र, जैसे वक आवदवासी और जन जातीय उत्थान,मवहला
सशन्विकरण, जनसंख्या असुंतलन, राष्ट्रीय सुरक्षा, पररवार प्रबोधन, सामावजक समरसता, ववज्ञान और तकनीकी ववकास,
स्वास्थ्य सेवाओं का ववस्तार और आधुवनकीकरण, कृ वष क्षेत्र में सुधार, प्रचार के ववश्वसनीय माध्यम, ववमशव वनमावण, वशक्षा
पिवत का भारतीयकरण, क्रीडा ववकास, नागररक कतवव्य, नक्सली गवतवववधयां पर वनयंत्रण पूवोत्तर राज्ों का ववकास,
व्यन्वि/चररत्र वनमावण , भारतीय ववरासत/परंपराओं की रक्षा, पारंपररक भाषाओं का उत्थान, भारतीय खान-पान में गवव,
राष्ट्रीय तीज त्यौहारौं को उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाना , आधार भूत संरचना का ववकास, न्याय व्यवस्था का
भारतीयकरण, प्रशासवनक सुधार, रोजगार के अवसर, स्वाबलंबन, पयाववरण ,आत्मवनभवरता, इत्यावद सभी क्षेत्रों में बहुत ही
गुणात्मक रूप से हो चुका है।बहुत ही उत्कृ ष्ट् और अकल्पनीय कायव हो रहा है । भववष्य के वलए भी वबल्कु ल स्पष्ट् प्रवतमान
स्थावपत वकये जा चुके हैं और उनको प्राप्त करनेके वलए पूरी गवत से कायव चल रहा है।
एक बहुत ही महत्वपूणव दृवष्ट्कोण की तरि में आप सब का ध्यान आकवषवत करना चाहता हं। इस संगठन में जब आप
पूरी तरह सेरम जातेहैंतो आप को स्वयं यह अनुभव होता हैवक आप राष्ट्र के सबसेवशवक्षत, अनुभवी और त्यागी
महापुरुषों के बीच में है। सभी पढ़े-वलखे हैं, अनुभवी है और यह सब अनुभव के वल पुस्तकों से न होकर, जमीन पर जाने
से, लोगों से वमलकर, स्वयं अनुभव करके और कु छ प्रवतवष्ठत और ज्ञानी लोगों से चचाव करके प्राप्त हुआ है। जब भी आप
कायवकतावओं से ववचार ववमशव करते हैं तो आपको एक बहुत ही रोचक अनुभूवत होती है। सादा जीवन उच्च ववचार को
चररताथव करते हुए, यह संगठन और स्वयंसेवक कभी भी, वकसी भी उपलन्वब्ध का श्रेय लेने को मुखर नहीं रहते,श्रेय लेना
उनका व्यन्वित्व नहींहै। सदैव इनका भाव रहता हैराष्ट्रकी, मानवता की, पयाववरण की पररवार की समाज की वकस
प्रकार सेवा की जा सकती है। सेवा, सहायता, ववकास, प्रगवत गरीब कल्याण, सामावजक समरसता और राष्ट्रकी एकता
एवं अखंडता ही इस संगठन का मूल मंत्र है और ये भारत के वीर उस पथ पर वनश्चल, वनडर होकर सदैव आगे बढ़ते जा
रहे हैं।
मेरा यह सौभाग्य रहा वक जाने अनजाने में ही सही मैं इस अवद्वतीय संगठन से जुड गया हं। मैं स्वयं अपने आपको
गौरवान्वित अनुभव करता हं वक एक ऐसा संगठन जो भारत, भारतीयता, और भारतीयोंके वलए कायवकरती हैऔर राष्ट्र
वनमावण और राष्ट्रप्रथम के अवतररि इसके केंद्रवबंदुमेंऔर कोई भी ववचार नहींहै, मैं उस संगठन से संबंवधत हं। इस
दौरान मैं कु छ अभूतपूवव महानुभावों से भी वमला वजन्ोंने मेरे जीवन को एक सकारात्मक नई वदशा दी है। मेरे अपने
व्यन्वित्व में भी मैं बहुत कु छ सकारात्मक पररवतवन देख सकता हं। मैं वजतना भी इस संगठन से जुडता जा रहा हं मुझे
उससेभी ज्ादा सुख की अनुभूवत होती है। यह मैं समझता हं वक एक दैवीय प्रवृवत्त है वक आप जब त्यागी, वनस्वाथववादी
महानुभावों से वमलते हैं तो सकारात्मक ऊजाव का वनमावण होता है और आप अपने-आप सबल होकर इन राष्ट्रप्रेवमयोंके
साथ कदम से कदम वमलाकर कर भारत को यश और कीवतव के वशखर पर ले जाने के मागव पर प्रशस्त हो जाते हैं।
मैंअपनेअदभुत अनुभूवत को इसवलए वलख रहा हं वक वजनके भी हृदय मेंराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारेमेंकुछ भ्ांवतयां
हैं वो अवश्य ही इस संगठन से जुडें , सभी भ्ांवतयां दू र हो जायेंगी, और एक नवीन ऊजाव का वनमावण होगा ज