ग्रामीण विशेषछत्तीसगढ़

गोंडवाना रत्न दादा हीरासिंह मरकाम को…पंचम पुन्य तिथि पर सादर श्रद्धांजलि स्मरण .

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
गोंडवाना समग्र क्रांति आन्दोलन के प्रणेता दादा हीरासिंह मरकाम की आज पंचम पुन्य तिथि में उन्हें स्मरण करते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि जब उनके सपनो की ब्लू प्रिंट तैयार हो रही थी तब उनका सानिध्य प्राप्त हुआ था. यह सन १९८०-८१ का समय था. जब NTPC जमनीपाली में गोंडवाना समाज की नीव रखी जा रही थी. तब अधिकाँश साथी बैचलर थे. कुछ साथी ट्रेनी होस्टल में रहते थे. कुछ लोग को ही फॅमिली क्वार्टर मिला था. तब यमुना विहार में कोमल सिंह ठाकुर के क्वार्टर में युवा टोली बैठती थी. दादा जी वही रात्रि विश्राम करते थे.
जमनीपाली से रोड के उस पार MPEB की कालोनी थी. वहां भी सगा कर्मचारी रहते थे. उन तक उन्हें मोटर साइकिल और स्कूटर में बैठा कर ले जाने की जिम्मेदारी युवा साथियों की होती थी. Balco, MPEB, WCL और NTPC जैसे नामी औद्योगिक संस्थान में समाज के कर्मचारीगण काम करते थे. और इतने संपन्न तो होते ही थे कि उनसे आर्थिक सहयोग की अपेक्षा की जा सकती थी. इन सभी संस्थानों में आधुनिकतम होने के कारण NTPC की कालोनी और अधिकारी कर्मचारियों की जीवन स्तर अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक और वैभवपूर्ण होती थी. इसलिए दादा जी NTPC के युवा साथियों को ज्यादा तरजीह देते थे. तब वे हमें गोंडवाना की विशिष्ट संस्कृति की बातें समझाते थे, और आधुनिकता की चकाचौंध में अपनी संस्कृति को बचाए रखने की सीख देते थे.
वे हमेशा आर्थिक स्वावलंबन की बाते करते थे, जिसके लिए गुणवत्ता युक्त शिक्षा आवश्यक है. शिक्षा उन्नत्ति के शिखर की ओर अग्रसर होने की प्रथम सोपान है. परिजनों को पढ़ लिख कर नौकरी नहीं मिलने पर स्वरोजगार विशेषकर सब्जी की खेती और दूध के व्यवसाय को विकल्प के रूप में अपनाने की बात समझाते थे. तब वे राजनीति बात नहीं करते थे. सिर्फ आर्थिक स्वावलंबन के लिए शिक्षा, व्यवसाय और संस्कृति की बातें करते थे.
उन्होंने गोंडवाना बैंक के रूप में अपने सोच को साकार भी किया था. लेकिन क्रियान्वयन में शुचिता और पारदर्शिता के अभाव में उनका सपना विखंडित हो गया. जमीनी योजनाकारों के नीति (Policy), नीयत (attitude) और निशाना (objective) में सामंजस्य और एकरूपता के अभाव विफलता का कारण हो सकता है.
पुनश्च … गोंडवाना समाज को आत्महीनता के गर्त से उबारकर आत्म सम्मान के गौरव पथ पर अग्रसर करनेवाले महामना को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि हम आर्थिक स्वावलंबन के लिए उनके द्वारा बताये गए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अपनाएँ. यह भी सावधानी रखें की अपनी संस्कृति पर आत्म मुग्धता और अंधभक्ति से भी बचे और विवेकपूर्ण सामाजिक व्यौहार को अपनाएं.
रमेश चन्द्र श्याम