आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार संस्कृति संरक्षण के लिए राष्ट्रपति को सर्व आदिवासी समाज का ज्ञापन
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 15 निम्बर 2025 आदिवासी अस्मिता , अधिकार और पहचान के लिए जनजागृत अभियान में प्रमुख मांगे ।
छत्तीसगढ़ सहित इस देश के मूलनिवासी आदिवासी आजादी के 79 साल बाद भी अपने अस्मिता संवैधानिक अधिकार और संस्कृति पहचान से वंचित है इसलिए अमर शहीद बिरसा मुंडा के जयंती को जनजागृति अभियान मनाते हुए पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करते हुए निम्नांकित गंभीर विषयों पर अपनी बात इस देश और प्रदेश के शासन प्रमुख के सामने रखते है
. आदिवासियों को वनवासी, जनजाति संबोधन करना बंद करें। आदिवासी समाज के शहीदों, महापुरुषों एवं पुरखों को वनवासी और जनजाति बोल कर अपमानित करते है जबकि वे देश के आजादी के लिए लड़े है वे सब भी राजा, दिवान, जमींदार थे । अमर शहीद बिरसा मुंडा जी को राष्ट्रीय गौरव घोषित भारत रत्न दिया जा आगामी जनगणना में देश के लगभग 16 करोड़ों आदिवासियों के लिए अलग धर्म “आदिवासी” कॉलम दिया जाए । राष्ट्रीय स्तर में आदिवासियों की संस्कृत पहचान मिल सकें।
बस्तर में नक्सल शांति वार्ता में ईनामी नक्सली से शासन हाथ मिलाकर समर्पण पुनर्वास कर रही है। लेकिन नक्सली के नाम से मुखबिरी और पुलिस के अत्याचार और दुर्भावन से हजारों आदिवासी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तेलंगाना,झारखंड के जेलो में कई सालों से बंद है उन्हें रिहा कर पुनर्वास नीति का फायदा दिया जाए।बस्तर में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से शासन के द्वारा चलाए गए “सलवा जुडूम” जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गलत माना के चलते 600 गांव वीरान हो गए। वहां के आदिवासी और निवासी प्रताड़ित हो कर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पलायन कर गए है वहां वे लोग गरीबी, निर्वासित, प्रताड़ित और बिना पहचान के जीने के लिए मजबूर है । इसके लिए कई बार प्रधान मंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को निवेदन किए आज तक सकारात्मक पहल नहीं हुआ। प्रदेश के आदिवासी और निवासी को यथाशीघ्र वापस लाकर ससम्मान उनके गांव में बसाया जाए एवं उनके जमीन संपत्ति वापस दिया जाए।
सर्केगुडा,ताड़मेटला, एडेस्मेटा, सिलेगर, मुतवेंडी में निर्दोष आदिवासियों को मारा गया जिसका आज तक न्याय और मुअवाजा नहीं मिला एवं दोषियों पर कार्यवाही हो। न्यायिक जांच सार्वजनिक किया जाए। आगामी परिसीमन में आदिवासियको के लिए विधान सभा और लोकसभा के सीटों में वृद्धि किया जाए और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में सभी सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित करे।
. 32 प्रतिशत आरक्षण, पदोन्नति में आरक्षण, पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में वर्ग 3 और चार की स्थानीय भर्ती अधिनियम, बैक लॉग भर्ती, आदिवासियों के ऊपर लागू 2.50 लाख आया सीमा बंधन समाप्त करे , फर्जी जाति प्रकरण पर दोषियों शीघ्र कार्यवाही हो।पूरे प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती शीघ्र किया जाए।
आदिवासियों की जमीनी का अधिग्रहण, आदिवासी की जमीन को गैर आदिवासी को 29 साल का लीज देने का नियम बंद किया जाए। आदिवासी की जमीनी गैर आदिवासियों के बेचने की अनुमति बंद किया जाए।जमीनों का अवैध पंजीयन बंद हो
. पेसा का मूल नियम का पालन और ग्राम सभा को पूर्ण अधिकार दिया जाए।
. आदिवासियों का जीवन जंगल पर निर्भर है वन संरक्षण अधिनियम का संशोधन उनके हित अनुरूप हो।जंगल की अवैध कटाई बंद हो एवं लीज में देना बंद करे।हसदेव उत्खनन में अवैध जंगल कटाई रोक जाए ।
प्रदेश में खनिज उत्खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की जगह उसे लीज में लेकर जमीन मालिक को शेयर होल्डर बनाया जाए । खनन , उद्योग,बांध एवं शासकीय प्रयोजन के लि आदिवासियों का विस्थापन बंद करे।
बस्तर ,सरगुजा सहित पूरे प्रदेश में सदियों से पारंपरिक निवास रत आदिवासियों के जमीन का हक मिले एवं जमीन बंदोबस्ती किया जाए।
12 आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल , व्यवसायिक कालेज एवं स्वास्थ्य सेवा के साथ आजीवका के लिए रोजगार मुहैया कराया जाए। आदिवासियों के परंपरा आस्था के स्थल को सुरक्षित करें डोंगरगढ़ में आदिवासियों के आस्था स्थल बलाई दी बमलेश्वरी में आदिवासियों को अपने परंपरागत एवं रीति रिवाज से पूजा करने से गैर संवैधानिक रूप से बना ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जा रहा है ट्रस्ट को भंग कर आदिवासियों को दिया जाए बालोद जिला में सदियों से मान्यता प्राप्त आस्था स्थल जाम जामडी पाठ आदिवासियों को दिया जाए बालोद जिला में सदियों से मान्यता और आस्था स्थल जमीनी पाठ जिसे पाटेश्वर धाम नाम देकर कब्जा कर रहे हैं आदिवासियों को अपने संस्कृति से वंचित किया जा रहा है और उन पर कार्यवाही की जाए देश मूलवासी आदिवासियों के अस्मिता, संवैधानिक अधिकार , पारंपरिक प्रथागत कानून अधिकार और संस्कृति पहचान के लिए उपरोक्त विषयों पर अतिशीघ्र कार्यवाही एवं पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश और सकारात्मक पहल करने का कष्ट करे।

