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अदाणी फाउंडेशन के ऑर्गेनिक फार्मिंग एवं नॉन एग्रीकल्चर आधारित आय सृजन मॉडल को समझने के लिए बैंकर्स तथा सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के निदेशक ने परसा गांव का दौरा किया

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अंबिकापुर परसा। अदाणी फाउंडेशन और महिला सहकारी समिति मब्स के सहयोग से परसा गांव आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नया मिसाल बन रहा है। ऑर्गेनिक फार्मिंग एवं नॉन एग्रीकल्चर आधारित आय सृजन मॉडल की वास्तविकता से रूबरू हुए श्री कमलेश कुंदन, क्षेत्रीय प्रबंधक, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, सर्गुजा-बलरामपुर क्षेत्र (छत्तीसगढ़) ने भी अदाणी फाउंडेशन और मब्स के इस संयुक्त प्रयास की जमकर तारीफ की। श्री राजेश रंजन, यूनिट सीएसआर प्रमुख, अदाणी फाउंडेशन, सरगुजा के साथ हुई एक मुलाकात में श्री कमलेश कुंदन ने कहा, “अदाणी फाउंडेशन द्वारा महिला सहकारी समिति मब्स के माध्यम से महिला सशक्तीकरण और परसा ग्रामीणों की आजीविका के लिए जैविक कृषि संवर्धन तथा गैर कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से विकसित परसा मॉडल की कहानी सुनकर, मैंने आज परसा गाँव का दौरा किया और ग्रामीणों के साथ बातचीत कर, वित्तीय समावेशन और स्वरोजगार प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीणों के लिए आजीविका में वृद्धि लाने के अवसरों के बारे में जाना। यह वास्तव में मेरी कल्पना से परे था, जब मैं महिला सहकारी मब्स के बैनर तले मसाला बनाने की इकाई चलाने वाली महिलाओं से मिला। महिलाएं आत्मविश्वास और उद्यमी दिखाई दीं। अदाणी फाउंडेशन की इस तरह के एक आत्मनिर्भर ग्राम विकास मॉडल को विकसित करने के लिए जितनी सराहना की जाए कम है।”

इसके अलावा श्री शिव कुमार यादव, उप सरपंच – ग्राम पंचायत, परसा, और महिला उदमी बहूदेशी सहकारी समिति (मब्स) की अमिता सिंह एवं श्रीमती वीणा देवांगन के साथ परसा गांव के वर्मिकंपोस्ट और मसाला बनाने की इकाई का दौरा करते हुए श्री विनय मोहन शर्मा, निदेशक – सेंट्रल बैंक आरएसईटीआई ने जोर देकर कहा कि, “मेरी समझ में, परसा ग्राम विकास मॉडल पूरे सरगुजा डिवीजन और शायद छत्तीसगढ़ राज्य में अद्वितीय है, क्योंकि गाँव के पुरुष और महिलाएं भागीदारीपूर्ण आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से गाँव को आत्मनिर्भर बनाने की बात करते हैं। सेंट्रल बैंक रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग संस्थान, अंबिकापुर इनकी आजीविका में वृद्धि के लिए स्वरोजगार प्रशिक्षण के माध्यम से परसा के ग्रामीणों को सहायता प्रदान करेगा।”

इस दौरान श्रीमती सुरंजना बिस्वाल, संकाय – आरएसईटीआई ने ग्रामीणों के साथ स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में जानकारी साझा की। श्रीमती रजनी श्रीवास्तव, मार्केटिंग हेड – मब्स और श्रीमती निरूपा सोनी तथा श्री उमेंद्र साहू, पीओ-एएफ ने उपरोक्त बैंकर एवं आरएसईटीआई के परियोजना दौरे का सफलतापूर्वक समन्वयन किया।

उल्लेखनीय है कि मब्स, अदाणी फाउंडेशन के निरंतर सहयोग से स्थापित एक स्वतंत्र समिति है जिससे जुड़ी 250 महिलाएँ अपने कौशल से विभिन्न आजीविका परियोजनाओं का संचालन करती हैं। सहकारी समिति के सदस्य सतत उत्पादन को भी बढ़ावा देते हैं और जिले के किसान क्लब द्वारा उगाये अनाज और सब्ज़ियों की उपभोगता भी बढ़ाते हैं जिससे जिले के किसानों को फसल पर निश्चित आमदनी होती है। स्कूल के लिए मिड-डे मील बनाने में मब्स की महिलाएँ इन अनाजों और सब्ज़ियों का इस्तेमाल करती हैं जिससे ग्रामीण भारत के छात्रों की पोषण-सम्बन्धी ज़रूरतें पूरी होती हैं।