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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (10 सितंबर) विशेष समय पर बड़े भाई ने दिया परामर्श

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ना मिलता सहारा तो डिप्रेशन से बाहर आना था नामुमकिन
डर से हो जाता था डिप्रेशन और जीवन त्यागने की इच्छा
जांजगीर चांपा 09 सितंबर 2020।
दोस्तों के साथ अब व्यायाम करने जिम भी जाते हैं। बड़े भाई के साथ दुकान में मदद भी करते हैं। पटरी पर आ गई है अब धीरे-धीरे जिंदगी 24 वर्षीय मयंक (बदला हुआ नाम) दस महीने से गंभीर डिप्रेशन में जी रहे मयंक अब ज़िन्दगी दोबारा जी रहे हैं ।
मयंक का कहना है 10 महीने पहले पाचन क्रिया में खराबी आई थी जिसके कारण पेट में गैस बनने लगी थी और गैस होने से लगता था कि दिल का दौरा पड़ने वाला वाला है । कभी लगता था एक किडनी फेल हो रही है तो कभी लगता था लिवर फेल होने वाला है । यही सोच धीरे-धीरे डिप्रेशन की ओर ले जाने लगी जिसके कारण मन में अजीब-अजीब से ख्याल आते थे । इसी बीच कोविड-19 संक्रमण भी फैलने लगा लोगों से दूर भागना और दिमाग पर तनाव हावी होता चला गया ।लगता था जीवन त्याग दो । जीवन जीने का मुझे कोई हक नहीं है । एक बार प्रयास भी किया लेकिन बड़े भाई ने बचा लिया ।मयंक कहते हैं कि अगर बड़े भाई ना होते तो मैं अपना जीवन समाप्त कर चुका होता उन्होंने मुझे नया जीवन दिया है ।
मयंक के बड़े भाई का कहना है कि मयंक धीरे-धीरे परिवार और काम से दूर होने लगे थे यह संकेत हमको समझ नहीं आ रहे थे लेकिन फिर भी परिवार के लोग इनकी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे । आज मयंक पूर्व की भांति अपने पारिवारिक के साथ कार्य को पूर्ण रूप से सहयोग कर रहे हैं और नए कार्यों में भी रूचि ले रहे हैं यह सब संभव हो सका घरवालों के द्वारा उन पर रखी जाने वाली नजर से ।
समय पर मिले परामर्शदाताओं का सहयोग
राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय, बिलासपुर के चिकित्सक मनोवैज्ञानिक, डॉ.दिनेश लहरी बताते हैं जीवन समाप्त करने के कई कारण होते लेकिन मूलतः दो विशेष कारण माने गए हैं जिसमें सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक स्थिति या तो व्यक्ति सामाजिक प्रतिष्ठा के हनन के कारण आत्महत्या करता है या उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगती है । तब वह जीवन समाप्त करने की तरफ कदम बढ़ाता है लेकिन समय पर सहारा मिलना उसके जीवन में परिवर्तन भी रास्ता खोल देता है ।
कहॉ मिलती है मदद
जिला स्तर पर जिला चिकित्सालय में मानसिक स्वास्थ्य के लिये स्पर्श क्लीनिक की सुविधा उपलब्ध है । मानसिक स्वास्थ्य के परामर्श के लिए टोल फ्री नंबर 104 पर भी संपर्क कर परामर्श प्राप्त कर सकते हैं । तीनों ही स्थानों पर रोगी जानकारी गुप्त रखी जाती है ।
मनोरोगी के साथ कैसा व्यवाहर करें

परिवार में अगर कोई मानसिक रोग से ग्रसित हो जाता है तो उसे किसी मनोचिकित्सक से परामर्श लेना, रोगी के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करें उसकी परेशानी को समझने में मदद करें । उसे तनाव उत्पन्न करने वाले कारको से दूर रखें । रोग के लक्षण को इलाज द्वारा कम करते हुए नियंत्रित किया जा सकता है।