गोंडवाना के समस्त गण्डजीव मुलवंशाज indigenous
यूपी के 16 जिलों को छोड़ बाकी जिलों में गोंड SC में है, असम में OBC में है,,
MP के कुछ जिलों में पनिका समाज St में है,,CG में OBC में है,
प्रधान MH & MP में st में है,,, उड़ीसा में और CG के कुछ जिलों में OBC में है,,,
ऐसे बहुत से,,, ट्राइब्स,,,, indigenous हैं जिन्हें sachdule tribes list में नहीं डाला गया है,,,
और,,, गोंडवाना के समस्त गण्डजीव ,,, जो कि भारत में आर्यों के आने से पहले,,,, कबिलाई व्यवस्था के अंग थे,,,,जो रूढी नेंगी व्यवस्था जिसे हम कोयापुनेम कहते हैं के अभिन्न अंग थे,,,जिन्हें हम मूल वंशज indigenous कह सकते हैं,,,, आर्यों के आने के बाद विभिन्न नेंग व्यवस्था जैसे मृत्यु ,जन्म नेंग में बाल बनाने वाले नाई,कपड़े धोने वाले धोबी,,,,और लोहार,कलार (कल बनाने वाले)कुम्हार, तेली आदि सभी कोयापुनेमी नेंगियो को,,, जातियाँ कहकर,,, प्रचारित कर संस्कृति को बिखेर दिया,,,,, आज हमारे नेंगी अपने कुल, गोत्र टोटेमिक आदि व्यवस्था को भूल चुके हैं,,,, और st, sc, obc वर्गों में बंटे हुए हैं,,,,
कोयापुनेम विस्तृत है,,,,,
और अगर हम धर्म कोड़ को,,,, आदिवासी तक सीमित कर देंगे,,, तो भविष्य में ये सभी नेंगी क्या कोयापुनेम में आ सकेंगे,,,,
क्या यह उन नेंगियो के साथ हमारा संकीर्ण मानसिकता प्रदर्शित नहीं होती,,,,,
हम गोंडी धर्म का समझौता किये ताकी सभी ट्राइब्स हमसे जुड़ सकें हम कोयापुनेम से भी समझौता किये क्योंकि यह बात लोगों तक नहीं पहुंच पाई है,,,,
तो फिर एक आदिवासी शब्द का समझौता कर आप लोग,,, indigenous शब्द को शामिल करें,,
Indigenous का अर्थ आदिवासी नहीं,,, मूलनिवासी या मूलवंशज होता है,,,
इसके लिये हम सब,,, धर्म कोड समन्वय समिति,,, के राष्ट्रीय अध्यक्ष तिरु. अरविंद उरांव जी को ज्ञापन देंगे,,,
,,,,,
सेवा जोहार,,,
जो हमारे साथ हैं,,, कृपया हमसे संपर्क जरूर करें,,,
