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छत्तीसगढ़ में आरी-डोंगरी खदान के टेंडर को लेकर बवाल , ऑनलाइन के बजाए ऑफ़लाइन टेंडर से भ्रष्टाचार की बू , आयरन ओर खदान चहेतों को आवंटित करने की साजिश , भ्रष्टाचार का बड़ा खेल , किसके जेब में जाएंगे 500 करोड़ ? उत्तर बस्तर में CMDC की आयरन ओर खदान की बंदरबांट की शिकायत केंद्रीय एजेंसियों को , अफसरों से लेकर अध्यक्ष ने साधी चुप्पी

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मुख्य ख़बरCHHATTTISGARHNEWS

By Jiwrakhan lal Ushare cggrameen nëws

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कांकेर कच्चे / छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर में स्थित CMDC की आरी-डोंगरी खदान को औने-पौने दाम में अपनों को आवंटित करने के लिए सरकार के नुमाइंदों ने कायदे कानूनों की धज्जियाँ उड़ा दी है | ताजा जानकारी के मुताबिक इस खदान की नियमनुसार आवंटन प्रक्रिया अपनाने से राज्य सरकार को करोड़ों की आमदनी हो सकती है |लेकिन भाई भतीजावाद और अपनों को उपकृत करने के लिए जिम्मेदार अफसरों ने कायदे कानूनों को ताक पर रख दिया है | दरअसल  खदान आवंटन के लिए केंद्र शासन द्वारा निर्धारित  प्रक्रिया अपनाए जाने के निर्देश तमाम राज्य सरकारों को दिए गए है |इसके तहत खदान आवंटन के टेंडरों को ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत अंजाम दिए जाने के निर्देश है | लेकिन आरी-डोंगरी खदान आवंटन को लेकर ऑफ़ लाइन प्रकिया अपनाई जा रही है |

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 शिकायतकर्ताओ  के मुताबिक ऑफ़ लाइन टेंडर पर जोर देने वाले अफसर उन्हें ना तो टेंडर फॉर्म दे रहे है और ना ही किसी तरह का सहयोग कर रहे है | शिकायतकर्ता यह भी कह रहे है कि अफसरों ने उन्हें साफ़ कर दिया है कि वे टेंडर फॉर्म के लिए जोर आजमाईश ना करे | उन्हें कुछ खास लोगों को ही टेंडर फॉर्म उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है | बताया जाता है कि वैधानिक प्रक्रिया नहीं अपनाने से इस खदान के आवंटन मामले में राज्य सरकार की तिजोरी को 500 करोड़ से ज्यादा का चूना लग सकता है | ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया होने से ना केवल पारदर्शिता  रहेगी बल्कि प्रतियोगिता होने से सरकारी राजस्व में इजाफा होगा | 

उधर मामले की अधिकृत जानकारी और टेंडर फॉर्म में अपनाई जा रही मनमानी को लेकर संवाददाता ने छत्तीसगढ़ माइनिंग डेवलपमेंट कार्पोरेशन के चेयरमेन गिरीश देवांगन से संपर्क किया | लेकिन उनके मोबाइल पर लगातार कॉल फॉर्वडिंग जारी रही | नतीजतन उनकी ओर से इस मसले को लेकर कोई प्रति उत्तर नहीं मिल पाया है  | फ़िलहाल शिकायतकर्ता मांग कर रहे है कि आयरन ओर की इस खदान आवंटन प्रकिया को नियमानुसार ऑनलाइन किया जाए | उनकी दलील है कि खदान आवंटन मामले में भ्रष्टाचार की बू आ रही है | लिहाजा इस दिशा में राज्य सरकार ठोस कदम उठाने चाहिए