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गोंडवाना की वैभवशाली इतिहास फैला है पूरे विश्व के पांच खंड धरती में -आर एन ध्रुव

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
आदिवासी गोंड समाज परिक्षेत्र कुकरेल द्वारा परिक्षेत्र स्तरीय गोंड समाज का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्राम अरौद डुबान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया।दो दिनों तक परिक्षेत्र कुकरेल 55 गांव के सामाजिकजन धर्म ,संस्कृति, न्याय -व्यवस्था, सामाजिक रीति रिवाज सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि आरएन ध्रुव प्रांताध्यक्ष अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक संघ छत्तीसगढ़ द्वारा गोंडवाना की वैभवशाली इतिहास के बारे में बताते हुए पूरे विश्व के गणतंत्र व्यवस्था 5 खंड धरती की संरचना की जानकारी दिए। उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था की प्रथम इकाई छोटे छोटे मोहल्ला मिलकर नार(गांव) बने है जिसक मुखिया गायता, ठाकुर,पूजा संचालन पंडा, बैगा भूमका एवं देवी-देवता खैर माता, तल्लूरमुत्ते, महावीर पाठ, बोदा दीवान, साहड़ा देव ,भाकुर्रा देव, भैसासुर होते हैं।12 गांव का एक पाली होता है। जिसके प्रमुख बारसाय, बरईहां होते हैं। बैठकों में 12 गांव का ठाकुर एवं गायता हिस्सा लेते हैं। इसी तरह 7 पाली का एक परगना 84 गांव का समूह का निर्माण होता है। जिसके प्रमुख मांझी होते हैं। मांझी के नेतृत्व मैं सात पाली का मुखिया परगना के संचालन में हिस्सा लेते हैं। इसी तरह 57 परगना का एक गढ़ 4788 गांवो के समूह से बनता है। गढ़ का मुखिया गढ़पति होता है।गढ़पति के नेतृत्व में 57 मांझी बैठकों में हिस्सा लेते हैं। इसी तरह 52 गढ़ का एक कोट 248976 गांव मिलकर बनते हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था में कोट का मुखिया कोटेश्वर कहलाते हैं एवं 52 गढ़ के अधिपति कोटेश्वर की बैठक व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं।ऐसे ही विश्व में 33 कोट हुए जिसके मुखिया शंभूसेक हैं। इस सभा में जंगो, कंकालीन, गौरा,धनित्तर, देवगन और लिंगो सभासद हैं।
इस तरह पूरी धरती पर बहुत ही व्यवस्थित ढंग से गण सत्ता की संरचना संचालित होती है।
10 राव, 18 पाठ शक्ति और 32 बहिनी और 64 जोगनी इन सातों के माध्यम से शंभू के द्वारा शंभू के निर्देशन में पूरी धरती का संचालन होती है।सभी गांवों की अलग अलग राव होते हैं। इस प्राचीन व्यवस्था के माध्यम से समाज कई वर्षों तक शासन व्यवस्था चलाई। आज भी हम सब पूर्वजों के बताए हुए रास्ते पर चलकर बैठक ,सभा सम्मेलन के माध्यम से समाज को एक सूत्र में जोड़ कर रखे हैं। उन्होंने कहा कि देश में गोंडवाना समाज सबसे बड़ा समाज है। देश में समाज की जनसंख्या तीन करोड़ के आसपास है जो पूरे विश्व के 150 देशों के जनसंख्या से भी अधिक है। पहले समाज अपने मजबूत गणतंत्र एवं संगठन शक्ति के बदौलत सत्ता में रहे। आज समाज को समय के साथ शिक्षा रूपी अस्त्र को अपनाते हुए रोटी-बेटी के साथ-साथ सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु राजनीतिक जागरूकता का परिचय देना होगा। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री जीवराखन लाल मरई जी ने कहा कि शासन आदिवासी समाज को ढाई लाख की आय सीमा बंधन कर क्रीमी लेयर में लाने से समाज के बच्चे स्कॉलरशिप नहीं मिलने के कारण उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने जल जंगल जमीन को बचा कर रखते हुए हमारे विशिष्ट संस्कृति जन्म, विवाह,मृत्यु संस्कार के संरक्षण संवर्धन हेतु कार्य करना होगा।
इस अवसर पर प्रथम कार्यक्रम की अध्यक्षता गजानंद मरकाम परिक्षेत्र अध्यक्ष, वेद प्रकाश ध्रुव जिला अध्यक्ष युवा प्रभाग, श्रीमती दिनेश्वरी नेताम जिला अध्यक्ष महिला प्रभाग, महेंद्र नेताम जिला उपाध्यक्ष, दिनेश नाग सरपंच ग्राम पंचायत अरौद डुबान एवं समापन समारोह के मुख्य अतिथि दिनेश नाग सरपंच ,अध्यक्षता गजानंद मरकाम परिक्षेत्र अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथि शैलेश नाग जनपद सदस्य धमतरी, नकुल ध्रुव जनपद सदस्य नगरी, सुश्री दुखिन ध्रुव सरपंच केरेगांव, श्रीमती ईश्वरी नेताम सरपंच कुम्हड़ा, देवचंद उईके सरपंच डोकाल, धूरसिंह नागवंशी सरपंच बाजार कुर्रीडीह ,मिनेश ध्रुव सरपंच बनबगौद, सत्यवान मरकाम सरपंच कांटा कुर्रीडीह, श्रीमती भोज बाई ध्रुव सरपंच कुकरेल, श्रीमती हेमपुष्पा मरकाम सरपंच माकरदोना, श्रीमती हेमलता नेताम सरपंच सियादेही, गणेश राम ध्रुव सरपंच बरारी के उपस्थिति में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में गजानन मरकाम अध्यक्ष, गोवर्धन मंडावी सचिव, चित्रसेन नेताम कोषाध्यक्ष, लखन लाल मरकाम सह सचिव, हरेश्वर पोयम संचालक, संतोष कुंजाम, ईश्वर नेताम, गौतम सूर्यवंशी युवा अध्यक्ष, कुमार सिंह ध्रुव मुड़ा अध्यक्ष, भगवान सिंह नेताम ,धनीराम सूर्यवंशी ,मानसाय मंडावी , अश्वनी ठाकुर महिला अध्यक्ष शिवरानी उपाध्यक्ष लक्ष्मी मंडावी सचिव चंद्रकिरण नेताम विशेष रुप से उपस्थित थे।