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कोरोना से लड़ाई में रायपुर रेल मंडल की महिला कर्मियों का योगदान

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रायपुर -13 अप्रैल, 2020 पीआर/ आर/ 21

          दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर मंडल में मालगाड़ियों  का सुरक्षित परिचालन हो इसके लिए रेलवे ट्रैक को सुरक्षित रखना  इंजीनियरिंग विभाग का महत्वपूर्ण कार्य है  ।
         विषम परिस्थितियों में भी पूरे देश में मालगाड़ियों का परिचालन लगातार हो रहा है । रायपुर मंडल में  मालगाड़ियों का परिचालन सुरक्षित एवं निर्बाध हो सके इसलिए रेल पथ के संरक्षा प्रहरी (ट्रैकमैन)  रेलवे ट्रैक की संरक्षा में  महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए रेलवे ट्रैक पर कार्य कर रहे हैं ताकि चलने वाली मालगाड़ियां अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंच सके एवं लोगों को समय पर उनकी सामग्री मिल सके । भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाली माल गाड़ियों का परिचालन अभी भी पूरी क्षमता से हो रहा है । भारत के सभी थर्मल पावर प्लांट की यह जीवन रेखा है और संपूर्ण भारत में यदि हमें बिजली पानी की आपूर्ति अबाध रखना है तो माल गाड़ियों का दौड़ते रहना बेहद आवश्यक है। कोरोना से जंग में पुरुष कर्मी जहां मैदान में डटे हैं वहीं महिला कर्मचारियों को 'घर से कार्य ' के तहत घर से ही अपना योगदान देने के लिए कहा गया है। आज पूरे बाजार में मास्क की उपलब्धता नगण्य हो गई है और भारतीय रेल के कर्मचारी भी इस कमी से जूझ रहे हैं। यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है । इंजीनियरिंग विभाग के ट्रैक मैन की महिला कर्मचारियों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और रेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए सामग्री से मास्क का निर्माण कार्य *घर से कार्य* के तहत शुरु कर दिया है और अभी तक लगभग 3000 से भी अधिक मास्क बनाकर  रेलवे में कार्य कर रहे कर्मचारियों के उपयोग हेतु जमा भी करा दिया है।  जिसमे महत्वपूर्ण योगदान ट्रैकमैन संतोषी मांझी ने 100 से भी अधिक मास्क बनाये है उनके इस योगदान से अब मास्क की कमी से लड़ने में पूरी मदद मिल रही है।  मास्क निर्माण का कार्य अभी भी जारी है और रेल प्रशासन द्वारा इस कार्य को सराहा जा रहा है वहीं महिला कर्मचारियों को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है।

इस प्रकार विभिन्न विभागों के सहयोग से रायपुर रेल मंडल ने मास्क तैयार किये है आवश्यक रेल कर्मियों के मध्य वितरित भी किया हैं।

    ट्रैकमैन- ट्रैक की पेट्रोलिंग, गेटमैन एवं की-मैन का कार्य कर रहें हैं। एक की-मैन अपने कार्य के लिए सुबह 5 बजे निकलता है और अपने क्षेत्र के पूरे ट्रैक का अच्छे से निरीक्षण करके शाम को 5 बजे घर लौटता है। इस दौरान वह औसतन 12 किलोमीटर प्रतिदिन रेलवे ट्रैक पर चलता है एवं यह सुनिश्चित करता है कि ट्रैक पर सब ठीक है और जरूरत होने पर उच्च अधिकारियों को इस से अवगत कराता है। वहीं गेटमैन अपने फाटक पर मुस्तैदी से खड़ा रहकर सड़क से आने जाने वाले वाहनों की संरक्षा का ध्यान रखता है। 
        ट्रैकमैन में कार्यरत महिला कर्मचारियों द्वारा मास्क बनाने का कार्य किया जा रहा है  इन्हें मास्क बनाने के लिए रेलवे द्वारा सामग्री उपलब्ध कराई गई है ट्रैक पर कार्य करते समय करोना वायरस के  संक्रमण से बचाने के लिए  सैनिटाइजर,  मास्क,  हैंडवॉश  भी उपलब्ध कराए गए हैं,  सभी लोग निश्चित दूरी बनाते हुए कार्य कर रहे है ।  ट्रैकमैन का कार्य  मैनुअली होता है  इसलिए इन्हें विषम परिस्थितियों में भी  देशहित में कार्य कर रहे हैं  रेलवे ट्रैक को ग्रीष्म ऋतु के अनुरूप मापदंडों के अनुसार भी दुरुस्त कर रहे हैं रेल पटरियों को समय-समय पर विभिन्न मौसम के अनुसार एडजस्ट करना पड़ता है ।   

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