ग्रामीण विशेषसामाजिक

ईशर देव, गवरा दाई के मड़मिंग कार्यक्रम में गोंडी धर्मी अपने सांस्कृतिक विवाह गीत में झूमे 

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
दिनांक 18.11.2021 गुरुवार को गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति एवं छत्तीसगढ़ गोंडवाना संघ के संयुक्त तत्वावधान व परम श्रद्धेय गोंडवाना गुरुदेव, गुरुमाता के सानिध्य में गरियाबंद के स्कूल मैदान में ” पूर्ण ईशर गवरा महोत्सव एवं बड़ादेव महापूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया.
उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में परम आदरणीया गुरुमाता तिरुमाय दुलेश्वरी सिदार जी, अति विशिष्ठ अतिथि _तिरु. राजा लाल टारकेश्वर शाह खुसरो जी, पूर्व विधायक राजा ओंकार शाह जी,राजा निलेंद्र बहादुर जी ( फिंगेश्वर), अध्यक्षता तिरु. दुष्यंत ध्रुवा जी ( जिलाध्यक्ष गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति), विशिष्ठ अतिथि _ विधायक तिरु. डमरूधर पुजारी जी, तिरु. संजय नेताम जी (जिला पंचायत उपाध्यक्ष ), सभापति टुकेश्वरी नेताम जी ( जिला पंचायत सदस्य) , तिरु. केशरी ध्रुव (जिला पंचायत सदस्य), पूर्व विधायक तिरु. गोवर्धन मांझी जी, तिरु चंद्रभान नेताम जी (प्रांताध्यक्ष गों. ध. संस्कृति सं. समिति), तिरु. सोनउ ध्रुव जी( प्रांताध्यक्ष छ. ग.गोंडवाना संघ), संयोजक लच्छन मरकाम, संरक्षक सिया मंडावी, जिला गरियाबंद से नोकचंद ध्रुव, रूपेंद्र ध्रुव, युवा प्रभाग से~ शंकर ध्रुव, मनोज मरकाम, दुलेशवरी कुंजाम संस्कृति दल गोंडवाना के महतारी कर्मा नर्तक दल जिला ~कवर्धा गोंडवाना जागृति कर्मा नर्तक दल जिला ~मुंगली , जय बूढ़ादेव अखाड़ा दल जिला बेमेतरा
सहित कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए हजारों हज़ारों की संख्या गोंडी धर्मी समाजजनों की उपस्थिति रही !
गोंडवाना गुरुदेव, गुरु माता जी ने अपने दिव्य संदेश में ईशर देव, गवरा दाई की मडमिंग महोत्सव का धार्मिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला तथा गोंडी संस्कृति को विश्व संस्कृति जननी बताते हुए समाजजनों से अपनी अनादिकाल से चली आ रही बहुमूल्य संस्कृति के तहत तीज त्यौहार मनाने, अपनी पहचान को नहीं खोने, संगठित व सहयोगात्मकभाव से सामाजिक कार्य को संपादित करने, शिक्षा, व्यवसाय को बढ़ावा देने, गांव गांव में गवरा कलश के माध्यम से एक मुठ्ठी अन्न बचाकर समाज में समृद्धि लाने, युवा एवं युवती शक्ति को समाज में आगे लाकर समाज को सशक्त बनाने की बात कही.
इन्होंने अपने संदेश में कहा कि हर समाज की अपनी धर्म , संस्कृति व भाषा होती है उसी से उसकी पहचान बनती है, वैसे ही हमारी अपनी गोंडी भाषा, संस्कृति है. जन्म, विवाह व मृत्यु का नेंग जोग अन्य समाज से भिन्न होने के कारण विश्व में हमारी विशिष्ठ सांस्कृतिक पहचान है, गोंडी धर्म _ प्रकृति धर्म है, वैवाहिक रिश्ता_प्रकृति दर्शन के अनुसार ममा फुफू, सम विषम, गढ़ व्यवस्था के तहत संपादित होने, सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने तथा समाज को सर्वांगीण विकास के दिशा में सतत आगे बढ़ने का संदेश दिए.
सादर जय सेवा !