शिक्षा रूपी अस्त्र को अपनाकर समय के साथ चलने वाला समाज विकास पथ पर आगे बढ़ेगा-आर एन ध्रुव
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
आदिवासी समाज युवा प्रभाग मैनपुर द्वारा शहीद वीर नारायण सिंह शहादत दिवस वन विभाग प्रांगण मैनपुर में आहूत की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष आर एन ध्रुव, कार्यक्रम के संरक्षक श्रीमती लोकेश्वरी नेताम जिला पंचायत सभापति गरियाबंद, विशेष उपस्थिति अजाक थाना प्रभारी वेदवती दरियो, मैनपुर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष भोला जगत, अध्यक्ष सहकारी समिति खेदू नेगी, रूप कुमार ध्रुव सीईओ जनपद पंचायत मैनपुर, नरसिंह सीईओ, भाग सिंह ठाकुर जिला अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ गरियाबंद, उद्धव ध्रुव रेंजर, सोपसिंह मंडावी, यशवंत सोरी अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ, जन्मेजय नेताम, टीकम सिंह नागवंशी, गुजेश कपिल की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री ध्रुव जी ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह जी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में शहीद हुए वीर सपूतों के बलिदान के बदौलत हम सब आजादी की स्वच्छंद हवा में विचरण कर रहे हैं। आजादी के पहले हमारे पूर्वज तीर, धनुष ,तलवार, ढाल और बाजुओं में ताकत के बल पर शत्रुओं से विजय पाई ।लेकिन अब समय के साथ युद्ध की परिभाषा बदल गई है। अब जो समाज शिक्षा रूपी अस्त्र को अपनाकर समय के साथ चलेगा वही समाज विकास पथ पर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि हमारा समाज पहले अपने बाजुओं मे ताकत ,कुशल रन कौशल एवं सत्य के मार्ग पर चलकर कई वर्षों तक इस देश में राज्य किए। लेकिन अब हम लोकतांत्रिक व्यवस्था में संगठित होकर अपनी वोट की ताकत को पहचान कर अब भी सत्ता में प्रमुख रूप से भागीदार हो सकते है। श्रीमती लोकेश्वरी नेताम जी ने युवा प्रभाग आदिवासी समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की भूरी- भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि हम सबको हमारे शहीद वीर सपूतों के बताए हुए रास्ते पर चलकर जल – जंगल- जमीन की रक्षा हेतु एकजूट होना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि समाज के धर्म, संस्कृति, रीति-रिवाजों की रक्षा हेतु संकल्पित हो। श्रीमती दरियो जी ने एट्रोसिटी एक्ट कानून एवं महिलाओं के ऊपर होने वाले अत्याचार पर कौन कौन सी धारा के साथ कहां शिकायत करना चाहिए उसकी जानकारी दिए। कार्यक्रम का संचालन समाज प्रमुख महेंद्र नेताम द्वारा किया गया। युवाओं द्वारा आदिवासी संस्कृति पर आधारित एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्ध जन उपस्थित थे ।

