नवीन कृषि प्रौद्योगिकी और अनुसंधान से मिलेगा किसानों को फायदा : श्री बघेल
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
मुख्यमंत्री ने किया फार्मटेक एशिया अन्तर्राष्ट्रीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का शुभारंभ
कृषि विज्ञान केन्द्र दंतेवाड़ा द्वारा गोबर से निर्मित हर्बल गुलाल का लोकार्पण किया
दिनांक 11 मार्च, 2022। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में कृषि एवं किसानों की तरक्की के लिए एक नया वातावरण तैयार हुआ है। पिछले तीन वर्षाें में राज्य में कृषि के क्षेत्र में जितनी तेजी से विकास हुआ है आने वाले वर्षों में उस्से भी तीव्र विकास होने की संभावनाएं हैं। इस नये वातावरण में किसानों को बहुत सारी नयी तकनीक, प्रौद्योगिकी और सूचनाओं की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने ना केवल क्रान्तिकारी अनुसंधान किये है बल्कि किसानों तक नवीन कृषि प्रौद्योगिकी कृषि अनुसंधान और सूचनाओं को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। श्री भूपेश बघेल आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय किसान मेले एवं कृषक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र दंतेवाड़ा द्वारा गोबर से निर्मित हर्बल गुलाल का लोकार्पण किया। श्री बघेल ने इस अवसर पर कृषि के क्षेत्र मंे उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील कृषकों एवं महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य महिलाओं को सम्मानित भी किया। उन्होंने कृषि वैज्ञानिक एवं प्रगतिशील कृषक डॉ. गजेन्द्र चन्द्राकर द्वारा निर्मित दाऊजी मखाना प्रोटीन बार का लोकार्पण भी किया।
फार्मटेक एशिया अन्तर्राष्ट्रीय कृषि प्रदर्शनी एवं किसान मेले का आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के कृषि तथा उद्यानिकी विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और ब्राह्मणी इवेन्ट कम्पनी के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। कृषक सम्मेलन की अध्यक्षता कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष श्री अग्नि चन्द्राकर, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, सचिव कृषि डॉ. एस. भारती दासन, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, संचालक कृषि श्री यशवन्त कुमार, संचालक उद्यानिकी श्री माथेश्वरन व्ही., इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय प्रबंध मण्डल के सदस्य श्री बोधराम कंवर, श्री आनंद मिश्रा तथा श्रीमती वल्लरी चन्द्राकर और बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक एवं कृषक गण उपस्थित थे।
कृषक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निरंतर किसानों के कल्याण एवं विकास के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षाें में राज्य के कुल बजट दो लाख चौहत्तर हजार करोड़ रूपये का लगभग एक तिहाई हिस्सा 91 हजार करोड़ रूपये किसानों के खाते में गया है। सरकार बनने के बाद किसानों का 11 हजार करोड़ रूपये का कृषि ऋण माफ किया गया। किसानों से पिछले तीन वर्षाें में 25 सौ रूपये प्रति क्विंटल की दर पर धान खरीदी की गई। इस वर्ष किसानों से 98 लाख मीटरिक टन धान की खरीदी की गई है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना लागू होने से किसानों का खेती पर भरोसा लौटा है। छत्तीसगढ़ में केवल धान का उत्पादन ही नहीं बढ़ रहा है बल्कि गन्ना, मक्का, दलहन, तिलहन, लघु धान्य फसलें एवं उद्यानिकी फसलों का रकबा भी तेजी से बढ़ा रहा है। यहां कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और मार्केटिंग का काम भी बड़े पैमाने पर हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत दो रूपये किलो में गोबर खरीद कर उसका जैविक खाद बना रहे हैं, उससे बिजली बना रहे हैं, प्राकृतिक पेन्ट बना रहे हैं। उन्होनंे कहा कि गोबर से दिये, गमले तथा अन्य सामग्रियां तैयार की जा रही है और आज कृषि विज्ञान केन्द्र दंतेवाड़ा द्वारा गोबर से हर्बल गुलाल का निर्माण भी किया गया है। श्री बघेल ने कहा कि पिछले तीन वर्षाें में प्रदेश में साढ़े आठ हजार गौठान बनकर तैयार हुए हैं। गौठानों को एक लाख हैक्टेयर भूमिका आबंटन किया गया है। सुराजी गांव योजना के माध्यम से गांवों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मिलेट मिशन के तहत कोदो, कुटकी एवं रागी के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर द्वारा कोदो, कुटकी एवं रागी के प्रसंस्करण हेतु मिलेट हब स्थापित किये जाने की प्रशंसा की।
कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की पहचान कृषि आधारित विकसित राज्य के रूप में बन रही है और आज यहां किसानों की दुर्दशा तथा पलायन की जगह किसानों की संपन्नता के बारे में चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास को और अधिक तीव्र करने के लिए छत्तीसगढ़ में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के बाद यहां कृषि एवं किसानों की स्थिति काफी बेहतर हुई है और किसानों की बेहतरी में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का बहुत बढ़ा योगदान है। कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किसानोपयोगी कृषि प्रौद्योगिकी, नवीन किस्मों, कृषि अनुसंधान एवं इसके किसानों तक प्रसार ने प्रदेश के किसानों को खुशहाली की नई राह दिखाई है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने इस अवसर पर कह कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ में किसानों के विकास के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि वश्विविद्यालय द्वारा किसानों के लिए नवीन कृषि प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विस्तार कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को भरपूर आर्थिक सहयोग एवं संबल प्रदान किया जा रहा है। पिछले तीन वर्षांे में राज्य में दस नये महाविद्यालय तथा दो नये कृषि विज्ञान केन्द्र प्रारंभ किये गये हैं। अगले वित्तीय वर्ष में साजा एवं पेन्ड्रा में नये कृषि विज्ञान केन्द्र प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है। डॉ. चंदेल ने कहा कि विश्वविद्यालय विभिन्न फसलों की 150 से अधिक नवीन किस्में विकसित की गई है जो अधिक उत्पादन देने तथा विभिन्न रोग-व्याधियों का मुकाबला करने में सक्षम हैं इनमंे से 45 किस्में को पिछले तीन वर्षाें में विकसित की गई है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित 27 कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से इस नवीन प्रौद्योगिकी तथा अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। डॉ. चंदेल ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार के सहायोग से विश्वविद्यालय में 14 करोड़ रूपये की लागत से स्थापित बायोटेक हब के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नवाचार एवं स्टार्टअप स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यहां स्थापित फायटो सेनेटरी लैबोरेटरी के द्वारा फसलों में पेस्टिसाईड, हैवी मेटल, रोगाणु तथा जैनेटिक मॉडिफिकेशन की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है जिससे यहां के किसानों, व्यापारियों एवं उत्पादकों को इनके निर्यात में मदद मिलेगी। निदेशक विस्तार डॉ. आर.के. बाजपेयी ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री जी.के. निर्माम, संचालक अनुसंधान डॉ. पी.के. चन्द्राकर, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय रायपुर डॉ. एम.पी. ठाकुर, अधिष्ठात कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय रायपुर डॉ. विनय पाण्डेय, अधिष्ठाता खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय रायपुर डॉ. एम.पी. त्रिपाठी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. जी.के. श्रीवास्तव एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में किसान एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
(संजय नैयर)
सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी

