पोषण पखवाड़ मना रहा अदाणी फाउंडेशन, आयोजित कर रहा विभिन्न कार्यक्रम
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
रायगढ़; मार्च 31, 2022: अदाणी फाउंडेशन द्वारा मनाये जा रहे राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा के दौरान तमनार विकासखंड के 32 ग्रामों के 1800 से अधिक गर्भवती और शिशुवती महिलाओं, किशोरी बालिकाओं, एवं बच्चों को शामिल किया गया है। दिनांक 21 मार्च से 4 अप्रैल तक मनाए जा रहे पोषण पखवाड़े में अदाणी फाउंडेशन की सुपोषण परियोजना की प्रशिक्षित सुपोषण संगनियों द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण कर एवं पोषक आहार, इत्यादि के बारे में सभी को जागरूक किया जा रहा है
पोषण पखवाड़ा के अवसर पर मिलुपारा, लिब्रा, चितवाही, बजरमुडा इत्यादि सहित के 32 ग्राम में विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है। सुपोषण संगिनियो द्वारा पोषण जागरूकता रैली, स्वस्थ्य बालक बालिका प्रतिस्पर्धा, पोषण संबंधित समूह चर्चा, सेहतमंद रसोई के तरीके, पोषण एवं स्वच्छ जल, हाथ धुलाई जागरूकता नारा लेखन एवं जैसे कार्यक्रमों का प्रतिदिन आयोजन हो रहा है। पोषण के प्रति जागरूकता लाने के लिए संगीनियों ने लोगों को सामान्य तौर पर गांव में मिलने वाली फल, सब्जियों के साथ-साथ उन्हें पकाने के तरीको में छोटी-छोटी सावधानियों के प्रति जागरूक किया जिसका सीधा प्रभाव लोगों के सेहत पर होता है। इस दौरान सुपोषण संगीनियो द्वारा बच्चों के अन्थ्रोपोमेट्रीक माप के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि अदाणी फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ के रायगढ़ सहित रायपुर और सरगुजा जिलों के विभिन्न ग्रामों में अपने निगमित कार्यक्रम के तहत निरंतर सुपोषण के बारे में जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है। अपने राष्ट्रव्यापी ‘प्रोजेक्ट फॉर्च्यून सुपोषण’ के तहत अदाणी फाउंडेशन की 400 से अधिक महिला सुपोषण संगिनियों की टीम, 14 क्षेत्रो को कवर करते हुए, 12 राज्यों के 640 से अधिक गांवों तक पहुंची है। जिसके माध्यम से हज़ारो लोगों को लाभान्वित होने का मौका मिल रहा है। इस दौरान अदाणी फाउंडेशन द्वारा महिला और बाल विकास मंत्रालय (एमडब्लूसीडी) सूचित विषयों के अनुरूप विभिन्न गतिविधियों को क्रियान्वित किया गया है।
कुपोषण से जंग: भारत के बेहतर भविष्य की ओर एक कदम
गौरतलब है कि भारत में कुपोषण, सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि विश्व में सबसे अधिक अविकसित (4.66 करोड़) और कमजोर (2.55 करोड़) बच्चे, भारत में ही मौजूद हैं। मंत्रालय के अनुसार देश में कुल 33,23,322 बच्चे कुपोषित हैं। वहीं कोरोना महामारी से स्वास्थ्य तथा पोषण संकट और अधिक गहरा गया है। 14 अक्टूबर 2021 तक भारत में 17.76 लाख बच्चे अत्यंत कुपोषित (एसएएम) और 15.46 लाख बच्चे अल्प कुपोषित (एसएएम) की श्रेणी में शामिल थे। दूसरी तरफ ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट देखें तो 116 देशों में जहां 2020 में भारत 94वें स्थान पर था, वहीं 2021 में 7 स्थान नीचे गिरकर 101वें स्थान पर पहुंच गया है। ऐसे में कुपोषण से लड़ाई में कॉर्पोरेट घरानों की सीएसआर गतिविधियां बहुत अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं। क्योंकि कुपोषित बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होती है और किसी गंभीर बीमारी का शिकार होने पर उनके मृत्यु की संभावना नौ गुना तक बढ़ जाती है। अति कुपोषित अवस्था वाले बच्चों में भी बीमारियां और मृत्यु होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
अदाणी फाउंडेशन के बारे में:
1996 में स्थापित, अदाणी फाउंडेशन वर्तमान में 18 राज्यों में सक्रिय है, जिसमें देश भर के 2250 गाँव और कस्बे शामिल हैं। फाउंडेशन के पास प्रोफेशनल लोगों की टीम है, जो नवाचार, जन भागीदारी और सहयोग की भावना के साथ काम करती है। वार्षिक रूप से 3.2 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित करते हुए अदाणी फाउंडेशन चार प्रमुख क्षेत्रों- शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य, सतत आजीविका विकास और बुनियादी ढा़ंचे के विकास, पर ध्यान केंद्रित करने के साथ सामाजिक पूंजी बनाने की दिशा में काम करता है। अदाणी फाउंडेशन ग्रामीण और शहरी समुदायों के समावेशी विकास और टिकाऊ प्रगति के लिए कार्य करता है, और इस तरह, राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देता है।

