प्रकृति पुत्रो– जागो और जगाओ, पर्यावरण बचाओ– प्रकृति बचाओ*

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

हरेली जगार जंगल रैली एवं पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी 31 जुलाई को गोंडवाना भवन शंकरदाह में
अखिल गोडवाना गोंड़ी साहित्य परिषद का अभिनव पटल प्राकृतिक जोहार हरेली जगार जंगल रैली एवं पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी दिनांक 31 जुलाई 2022 दिन रविवार दोपहर 2:00 बजे से गोंडवाना भवन शंकरदाह में आयोजित है। इस अवसर पर *पांच पेड़ लगाएंगे घर में शांति लाएंगे, जय प्रकृति– जय संस्कृति* का नारा को लेकर धमतरी शहर में रैली निकाली जाएगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि धमतरी जिला के कलेक्टर श्री पी.एस.एल्मा जी, अध्यक्षता अखिल गोंडवाना गोंडी साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.एल. कोर्राम जी, विशिष्ट अतिथि गोंडी धर्माचार्य, पर्यावरणविद श्री शेरसिंह आंचला जी, अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष आर.एन. ध्रुव जी होंगे। ज्ञात हो विगत 2006 से प्रारंभ हुए कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण संदेश जन जागरण महायात्रा इस वर्ष 13 जुलाई से 31 जुलाई 2022 तक बूग सिंगा बूम गोटूल कोयानार केकरा खोली तहसील नगरी, मगरलोड़ जिला-धमतरी से प्रारंभ हुआ है।
समिति द्वारा पवित्र मन से मार्मिक अपील करते हुए कहा है कि सृजन की बेला है झूम रहा तरू पल्लव वन सृष्टि नमन-सृष्टि नमन… हम प्रकृति पुत्र है धरती हमारी माता है पवन हमारे पिता है माता की काया में पिता के स्वास का स्पदन जीवन का सत्य है प्रकृति पूजा ही सत्य की उपासना है सावन का महीना नव जीवन संचार की मधुर बेला है धरा और गगन का आलीय आलिंगन-महा मिलन-पोखरालसून्य में आनंद का विस्तार धरती का सिंगार, मेध मंदरिहा बिजली नचनिया पावन-बड़े फनकार, दसो दिशा सुख सोहर गावें, ज्ञानी करो विचार, सरर-सरर बहे पुरवाई उमड़-घुमड़ धन गरजे,रिम-झिम-रिम-झिम बरखा रानी, अमृत रस जरा परसे, प्रकृति की ममता बरस रही है धरा और गगन में आनंद का उत्सव हो रहा है, हरियर लुगरा चूनर धानी, खूब सजी है धरती रानी, धरती के काया में हलचल हो रहा है । सुखे पड़े वन संपत्तियों बीजो में अंकुरण हो रहा है, वसुंधरा की गोद भराई हो रही है, धरती माता के उन नन्हे तरू शिशुओं की देख भाल हमें ही करनी है, ये वनौषधियों के शिशु बड़े होकर जानलेवा बिमारियों से हमारी रक्षा करेगें, ये फलदार वृक्ष बड़े होकर हमें मस्त मधुर मीठे फल देंगे, सुखदायी छाया प्रदान करेंगे, ये कंद-मूल शिशु बड़े होकर हमें पौष्टिक आहार प्रदान करेंगे, आज हम इनकी सुरक्षा करेंगे तो कल यही तरू पल्लव, लता, बेल, बड़े होकर हमें शीतल मंद-सुगंधमय प्राण दायनी पवन प्रदान करेंगे, पेड़-पौधे हमें कुछ नहीं मांगते हमारे द्वारा निस्पादित वायु को पीकर हमें प्राण वायु-प्रदान करते है, ये दाता है हमारे देवता है, गोंड़ियन समुदाय में पेड़-पौधों की मान्यता पारिवारिक सदस्य के रूप में होती है, ये हमारे पुरखे ही तो है, रूख हमर दाई ये जगत के महामाई ये, बचाव रूख राई ला जगत के महामाई ला । फलदार वृक्ष लगायेगें-पौष्टिक आहर पायेंगे। आवो हम वृक्ष लगाये-जन जीवन को सुखी बनाये ।। पेड़ लगाबो त- नवा जीवन पाबो। कंदमूल-वनौषधी बचाओ-जन जीवन को सुन्दर-सुखद बनाओ । वृक्ष का विनाश-जन जीवन का सर्वनाश । हर्रा, बहेड़ा, आँवला तीन फलो का योग खाये मन प्रसन्न रहे-काया रहे निरोग । प्रकृति अनंत सुख और समृद्धि का मूल है प्रकृति की उपेक्षा महान मूल है, बूम सिंगा बूम गोटूल ने ठाना है वृक्ष सगा बनाना है। पुत्रों आवो हम मनाये प्रकृति जोहार हरेली जगार जंगल तिहार।पेड़ से हवा-हवा से बादल-बादल से वर्षा-वर्षा से सुखी संसार, शंभू गौरा शक्ति संघ एवं बूम सिंगा बूम गोटूल द्वारा निसर्ग के करीब आदिम जन जीवन की अंतर गहराई में उतर कर विनाश की ओर अग्रसर विश्व को बचाने की अपील की गई है।