छत्तीसगढ़सामाजिक

आदिवासी महापर्व करमा (करमडार) महोत्सव

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
आदिवासी समाज आदि काल से प्रकृति के पुजारी हैं।विश्व मे प्रकृति जल जंगल जमीन को बचाने प्रकृति की सेवा संरक्षण करने विश्व के आदिवासियों के साथ सभी को संदेश देने के उद्देश्य प्रकृति की पूजा के तहत एक अंश के रूप करमा भारत के विभिन्न भागों मे अंचलों मे रहने वाले आदिवासी जनजाति अपने अपने स्तर पर मनाते आ रहें हैं।ताकि हमारी रूढिवादी परंपरा संस्कृति संरक्षित रहे।सभी आदिवासी समाज एक हो,प्रकृति के सिध्दांत पर चलें।
इसी को देखते हुए गोंडी धर्म गुरूदेव गुरूमाता के आशीर्वाद से गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति ,छत्तीसगढ़ गोडवाना संघ तथा प्रदेश युवा प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान मे छत्तीसगढ़ ,उड़िसा ,मध्यप्रदेश महाराष्ट्र के प्रत्येक जिला जहाँ जहाँ गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण,छ.ग .गो संघ के लोग हैं।हर्षोल्लास के मनाया जा रहा है।
प्रकृति संरक्षित रहेगा, जल जंगल जमीन रहेगा,पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
हांलाकि वर्तमान मे विकास के नाम पर जंगलों को नष्ट किया जा रहा है, कंपनियां लगायी जा रही है।पर विकास के नाम पर जंगल नष्ट और पर्यावरण प्रदुषित हो रहा है,स्वच्छ आक्सीजन मिलना दुभर हो रहा है।जो कोरोना काल मे देखने को मिला।
कहने का मतलब आदिवासी अपनी हर कार्य प्रकृति, पुरखा को साक्षी मानकर करते है।धरती आकाश, अग्नि, वायु जल तथा वनस्पति वनस्पति की पेड़ पौधों की पूजा अर्चना करते हैं।इसी के तहत आज दिनांक 6/9/22 भादो एकादशी भारत के आदिवासी जन करमा महोत्सव अर्थात करमडार महोत्सव रात भर राजा करमसेन के पूजा कर करमडार की पूजा अर्चना करते है करमा नृत्य के माध्यम से शक्ति को रिझाया जाता है।
इसमे बच्चियों द्वारा बांस की छोटी टोकरी जई बोया जाता है पांच दिन सेवा किया जाता है इसके तहत आखिरी दिन कुंवारी बच्चियों द्वारा व्रत भी धारण किया जाता है।
इस प्रकार अपने रूढिवादी परंपरा रीति नीति संस्कृति को बचाने जीवित रखने का प्रयास गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति एवं छत्तीसगढ़ गोडवाना संघ के द्वारा गुरू के निर्देशानुसार मनाते आ रहे हैं और आदि पर्यंत मनाते जायेगा।तभी हमारी संस्कृति बच सकती है और हमारे आनेवाले जनरेश भी अपने रीति परंपरा को जान पहचान सकते हैं।
आर. के. कुंजाम गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय महासचिव छत्तीसगढ़