छत्तीसगढ़

शिक्षक भर्ती में आदिवासी वर्ग के शिक्षित बेरोजगारों के लिए डीएड ,बीएड एवं टीईटी की अनिवार्यता को शिथिल किए जाने की मांग

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज़ 
अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ जिला कोंडागांव के जिला स्तरीय सम्मेलन/बैठक प्रांताध्यक्ष श्री आर एन ध्रुव जी के मुख्य आतिथ्य, श्री आर.सी. ध्रुव जिलाध्यक्ष बिलासपुर, श्री अकत ध्रुव जिलाध्यक्ष मुंगेली के विशेष आतिथ्य में 11 जून को संपन्न हुआ। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष कोंडागांव श्री मन्ना नेताम द्वारा किया गया। इस अवसर पर आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के संबंध में सभी ब्लॉक पदाधिकारियों ने बारी–बारी से विस्तार पूर्वक अपनी–अपनी बातें रखे। सभी ने एकमत से कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अंतरिम राहत आदेश के अनुसार राज्य स्तर के पदों में 32% आरक्षण के साथ स्थानीय जिला स्तर पर तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों पर भर्ती नहीं होने से जिले में सभी समुदाय के युवाओं को भारी नुकसान हो रहा है। आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग में शिक्षक भर्ती में आदिवासी वर्ग के शिक्षित बेरोजगारों के लिए डीएड ,बीएड एवं टीईटी की अनिवार्यता को शिथिल किए जाने की मांग रखी गई। जिससे सुदूर वनों में रहने वाले, अभाव में जीवन यापन करने वाले आदिवासी वर्ग के युवाओं को शिक्षक बनने का अवसर मिल सके। कॉलेजियम सिस्टम समाप्त कर सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट एवं न्यायिक सेवा में न्यायाधीशों की भर्ती यूपीएससी पेटर्न पर न्यायिक सेवा के माध्यम से करने की मांग की गई। जिससे अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग को सुप्रीमकोर्ट, हाईकोर्ट में जनसंख्या के अनुपात में न्यायाधीश बनने का अवसर मिल सके। सर्वसम्मति से संवैधानिक हितों की रक्षा हेतु सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक चौतरफा लड़ाई लड़ने का निर्णय के साथ सामाजिक एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किए। स्थानीय स्तर के विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु चर्चा परिचर्चा पश्चात सम्मेलन संपन्न हुआ।
स्वागत उद्बोधन जिला अध्यक्ष श्री मन्ना नेताम द्वारा किया गया। इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष हृदय मंडावी,जिला महासचिव रामसिंह नाग, सखाराम वट्टी, विपिन भगत, नरेंद्र कुमार मरकाम, रमेश कुमार पोयम, यशवंत बघेल, शांति लाल सलाम, रघुनाथ नेताम, लुदरू मरकाम, सदाराम नेताम, जीआर कोर्राम, भजन लाल सलाम, शिव मंडावी, सूरज लाल मातलाम भुनेश्वर पुजारी, शंभू नेताम, शरद कुमार कोडोपी के साथ ही अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।