एक दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी सेमिनार रायपुर छत्तीसगढ़
दिनांक : 19 अगस्त, 2023, दिन: शनिवार न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाईन, रायपुर (छ.ग.)
कार्यशाला के बिन्दु
1 ) UCC कानून के विरोध में 2 ) वन अधिकार संरक्षण अधिनियम 2023
3 ) मणिपुर कांड
4) राष्ट्रीय युवा संसद 2023
5 ) देश में आदिवासियों की संवैधानिक अधिकार तथा
आदिवासियों पर चौतरफा हमले एवं छत्तीसगढ़ में बस्तर और सरगुजा में बढ़ते शोषण अत्याचार के विरोध में
उपर्युक्त विषय के सम्बन्ध में आपका ध्यान आकृष्ट करते हुए कहना है कि 14 जून 2023 को भारतीय लॉ कमीशन (लॉ कमीशन ऑफ इंडिया) ने देश में समान नागरिक संहिता के संबंध में पब्लिक नोटिस जारी किया गया है। यह 22वाँ लॉ कमीशन है जिसे देश में लागू करने के उद्देश्य से सभी हितधारकों से इसके पक्ष-विपक्ष आदि पर 14 जुलाई 2023 तक 30 दिनों के अन्दर विचार – प्रतिनिधित्व आमंत्रित किया है। यू.सी.सी. पूरे देश के लिए एक कानून प्रदान करेगा जो सभी धार्मिक समुदाय पर उनके व्यक्तिगत पारिवारिक मामले जैसे विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने आदि पर लागू होगा। भारत का संविधान भाग-IV अनुच्छेद 44 के तहत् राज्यों को इसे लागू करने का निर्देश दिया गया है। इस अनुच्छेद का पालन ही करने पर इसे ना तो अदालतों में चुनौती की जा सकती ना ही इसके माध्यम से लागू किया जा सकता है। इसके बावजूद इसे लागू करने के लिए जनहित याचिका दायर की जाती है। राज्यों के सार्वजनिक नीति का मामला है ना कि अदालती मामला प्रजातंत्र में लोकनीति जनमत में निहित है, जनता जैसे चाहेगी कानून उसी अनुरूप बनते हैं। हम जानते है कि भारत में विविधता में एकता हमारे देश की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। भारतीय नागरिक विभिन्न धर्मो समुदायें जातियों एवं
जनजातियों से आते हैं। यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है। यहाँ विभिन्न समुदाय जैसे-ईसाई, यहूदी, मुस्लिम, हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिख, जनजातियों आदि के अपनी व्यक्तिगत कानून हैं और उनके सामाजिक व्यवस्था उनके द्वारा ही शासित होती है। इन्हीं में से भारत देश के 781 आदिवासी समुदाय ऐसे हैं जो भारत देश में अनुसूचित जनजाति/ ट्राईबल के रूप में सुचीबद्ध है। कोई तो ऐसे हैं जिन्हें अभी तक सूची में शामिल ही नहीं किया गया। आदिवासी समुदाय अपने विवाह, तलाक, विभाजन, उत्तराधिकारी, विरासत, गोद लेने के मामले में प्रथागत / रुढ़ी विधि (Customary Law) से संचालित हैं। बहुतायत में ये लिखित और मौखिक रूप से लोक आचरण में है। यहाँ तक आदिवासी समाज जाति विहित होने के साथ जन्म से मृत्यु तक की रीति रिवाज हिन्दू एवं भारत देश के अन्य जातियों एवं समुदायों से भिन्न (अलग) है। फलस्वरूप हिन्दू कानून भी आदिवासियों पर लागू नहीं होते हैं। यह माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आदिवासी हिन्दू नहीं हैं ऐसा फैसला लिया गया है। क्योंकि उनकी अपनी प्रथागत कानून (Customary Law) है जो संविधान के तहत् संरक्षित है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 (3) (क) में प्रथा दस्तूर रीति-रिवाज को कानून का बल दिया गया है। यहाँ तक कि अदालतों ने भी अपने कई निर्णयों में कहा है कि आदिवासी हिन्दू नहीं हैं और भी अपने प्रथागत कानूनों द्वारा निर्देशित होते हैं। समान नागरिक संहिता लागू होने से विभिन्न पहचान प्रभावित होगी जिससे जनजातियाँ आबादी पर निम्नलिखित प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगाभारत देश में सभी जनजातियों के प्रथागत / परम्परागत कानून समाप्त हो जायेगा । प्रथागत कानून के सम्बन्ध में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 (CNT Act) संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 (SPT Act) और देश के प्रत्येक राज्यों में जमीन संबंधी आदिवासियों के लिए अधिनियम बने हैं।
[8/20, 8:51 AM] cggrameennews2019: अरविंद नेताम जी चर्चा में मुख्य बिंदुओं पर विचार करना चाहता हु कुछ विषयों पर इसलिए कहना चाहता हूं जो आज की स्थिति हम क्या सोच रहे हैं आदिवासीयों को भी पता होना चाहिए मैं इतना कह सकता हूं कोई भी चित्र दिखाएं कर हमला करवा दिया विश्व आदिवासी समाज सामाजिक कानून सदियों से कस्टमर ला के ऊपर निर्भर है खड़ा है और यह समाज देश का 15 करोड़ से अधिक है आज तो भारत सरकार जो भी सोच रहे हैं यूनिफॉर्म सिविल कोड लगता है दिल्ली में बैठकर जैसे कोई भेज दिया है जो ऑनलाइन है छोटे-छोटे देश है जहां छोटी-छोटी आबादी है 15 18 करोड़ का आबादी की लोग अपनी धरोहर है उसको एकाएक कैसे बदल देगे अगर बदलना हो तो कब के समाज बदल जाता तो मेरा एक जो कहना है कि मैं इस पक्ष में नहीं हूं युनिफोर्म सिविल कोड के माध्यम से अपनी कस्टमर ला बर्बाद कर दो जिस दिन कस्टमर मिला बर्बाद है आदिवासी समाज अपने आप पर बर्बाद हो जाएगा वजह है आदिवासी समाज बिल्कुल रिजेक्ट करतीं है भी आदिवासी अपने कस्टमर ला से संचालन कर रहा है इसे अच्छी बात और क्या हो सकती है अगर इनके चक्कर में रह जाएंगे तो इस समाज में अवस्था फैल जाएगी जिसकी अपने अंदाजा नहीं लगा सकते मेरा ख्याल से रायपुर में छत्तीसगढ़ में पहली बार है पर यहां ऐसा लगता है कि ऐसे कार्य में जंगल में मोर नाचे किसने देखा इसकी पिरी प्लानिंग समाज की तरफ से नहीं हो पा रहा सिलेक्टेड लोगों को पावर रनिंग से साथ सिलेक्ट बुलाए जाते हैं उन्हें इस समय की छत्तीसगढ़ में सामाजिक क्षेत्र काफी है और प्लानिंग के साथ काम करने जरूरत है बहुत और अच्छे लोग बात प्रचार-प्रसार और अच्छा होता और समाज की चेतना थी यह कहना चाहता हूं अच्छी बात है दे आया रहा है दुरुस्त आया है आप लोग प्रयास के राष्ट्रीय स्तर पर बहुत से मुद्दे हैं उसमें अच्छी बात है आप लोग विचार करते हैं और मणिपुर के घटना के बाद पूरे देश में चर्चा का विषय है देश में ऐसा घटना कलंक पूरे समाज के लिए देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए घटनाओं का भारत सरकार राष्ट्रीय सरकार कमजोरी की हुआ है अब मुझे ऐसा लगता है कि देश में हमारी जो आदिवासियों की भावना है उसको समझने में भारत सरकार केंद्र सरकार बहुत देर कर दी केवल मणिपुर की घटना नहीं है हम पूरे देश में देख रहे हैं यह आगे चलकर कहीं ना कहीं बढ़ता जाएगा पर एक बात नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट में 50 साल से देख रहा हूं जाता रहा हूं पार्लियामेंट के मेंबर और मंत्री रहते हुए दौड़ा करता था एक बात बताओ बहुत अच्छे फाइटर है ऐसा फाइटरमैं कभी निश्चिंत रहता हूं अभी लड़ाई लड़ लेंगे पर आप भी मीडिया सब पब्लिसिटी होती है पर एक बात करना चाहता हूं मेरे बस्तर रोज कुछ ना कुछ मणिपुर जैसे घटना होती रहती है कहीं चर्चा नहीं होता इसलिए कि जंगल ् है मीडिया कुछ भी नहीं है करती दूसरा योगी सरकार में रहा है नसीब से दुआ करते हैं कि मीडिया में समदड़ी संकट की घड़ी से गुजर रहे हैं यहां के समाज कुछ चर्चा आपने भी नहीं किया जैसे कि पागल हो सरवादी उसे समाज इस बार आगामी विधानसभा चुनाव में उतरेगा मैं आपको बताना चाहता हूं दुखी मन से फैसला किया है आपको बताना चाहते पिछले 15 सालों से काम करते आ रहा है और कोई भी सरकार बैठे रहते आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 15 साल में एक भी मांग पूरा में एक भी मांग किया गया मैं हमारे ऑफिस में चार्ट बनी हुई है 23 सूत्री मांग आज भी इतने साल तक धरना प्रदर्शन धारण करते रहे आखिर कोई सरकार में सुनवाई नहीं हुआ समझ में आखिर करें क्या प्रजातंत्र में जो हथियार उपलब्ध है वही तो हमारा धन-बल आंदोलन और क्या हो सकता है हमने विचार किया एक बात निर्णय लिया इस विचार क्या दोनों पार्टी कांग्रेस और बीजेपी चुनाव के समय में किसी न किसी पार्टी को वोट देंगे कांग्रेस को देंगे या बीजेपी को देंगे कहां जाएंगे मजबूरी है उनकी वह समझते हैं कि आदिवासी समाज मजबूरी में वोट देंगे समझते हैं तो हम लोगों ने सोचा भी इस मजबूरी की इलाज क्या है समाज में फैसला किया कि चलो चुनाव राजनीति के राज्य में उतर आ जाना चाहिए और कोई इलाज नहीं है एक फैसला हुआ है हमारा लड़ाई सरकार से राजनीतिक दलों से नहीं है सामाजिक आंदोलन आंदोलन के आधार पर लड़ रहे हैं हमारे संविधानिक अधिकार बाबा साहब अंबेडकर साहब संविधान में लिखा दिया है उसके आधार पर और भी बीच में कानून बनते रहे हैं उसकी लड़ाई कानून शासन प्रशासन का पालन करना इस राज्य में ठीक उल्टा हो रहा है और समाज में जुड़ेंगे और यह पहला राज्य होगा जो पहली लड़ाई होगी शायद उसका रिजल्ट जो भी होगा उसकी चिंता नहीं करते कहीं ना कहीं समाज में एक बदलाव आएगा सामाजिक आंदोलन समाज और हम पुरे छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी समस्याएं रिजर्वेशन अधिकार खत्म करके रख दिया मैं महानुभाव बताना चाहता हूं भारत सरकार में था मनमोहन सिंह साहब प्राइम मिनिस्टर थे नीति आयोग देश में उदारीकरण की जिसकी पहली बात चर्चा होती है उदारीकरण चंद्रशेखर जी से मिलने दे संपत्ति मध्य मंत्री भी बने गांधी का देश है संपत्ति पॉलिसी पर उदारीकरण देश में नहीं चल सकताहै तब हम भोपाल पार्लियामेंट में बरसों क्लास शेड्यूल ट्रैक सर्च कर बैठे रामविलास पासवान थे हम बोलते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी एक-एक प्रोफेसर अर्थशास्त्र बुलाया जाए उनसे समझाया जाए कि हो उदारीकरण है क्या फिर हमें दोनों ने कहा सबको यह नीति है आदिवासी के खिलाफ है भद्दा मजाक है में रिजर्वेशन आरक्षण उसके बाद में मिनरल खनिज के बारे में आदिवासी इलाके में जितने खनिज संपदा संचल है जंगल में है आदिवासी की इलाके में है और उन्होंने पहले लुटेरे आएंगे कारखाना घराने आएंगे सरकार के साथ मिलकर लूटेंगे आप जब सरकार संभालेगा तब तक- काम कर दिया जाएगा 1996 पेसा कानून जब बना बनाने की बात आई तो ध्यान में था आने वाली पीढ़ी या उनके बच्चों के लिए कुछ भी इंतजाम कर ले किस पैसा कानून बनाने के लिए हमने बहुत मेहनत किया और एक अधिकार नहीं है इसमें बहुत सारे अधिकार हैं और उसमें से एक अधिकार ग्राम सभा का अधिकार जल जंगल जमीन पर पेसा का अधिकार क गांव ग्राम सभा अधिकार दिया बिना ग्राम सभा के मंजूरी के सरकारी जमीन में घुस नहीं सकता इनको छोटा-मोटा कानून 25 साल पहले बनने के बाद में थोड़ा सा राजगढ़ किसी राज्य ने नहीं बनाया सबसे दूर भाग एक भारतीय राज्य में पिछले साल नियम बनाए सरकार ने मूल कानून ताकत को खत्म कर दिया गया ो समाज के पास नियम के माध्यम से खत्म कर दिया मुझे इस बात के दुख है कि प्रदेश में हमारे कानून बनाने में से और वही सामने हमारी बनाई उसका नंबर गला छोड़ दिया जाए सरकार हमारे शरीर की हमारे व्यक्ति के लिए इसे दुर्भाग्य की क्या हो सकती है हमने जीवन भर समाज की लड़ाई इंदिरा गांधी इंदिरा गांधी कहते पहले आदिवासी है तब कांग्रेसी है पहले यह समाज की बाद सोचेंगे उसके बाद कांग्रेस के चलते हैं हमने कल करके भी दिखाया इंदिरा गांधी के करके दिखाया है उनके अंदर काम की कई पॉलिसी बदला है तो ऐसे ऐसे निर्णय मेरा कहना मतलब राजनीतिक स्थिति और आज की राजनीतिक परिषद जर्मन आसमान का फर्क है और पिछले 9 अगस्त को 1 साल बाद में कांग्रेस छोड़ इससे मुस्तीफा दिया इस मोह में लगा यह भी दुर्भाग्य बाद देखिए मैं तीन बार कांग्रेसी छोड़ें तीन बार पकड़ वापस लाएं चल आज तीन बार आत्म सम्मान पर ठोस में कभी नहीं किया मैं खुलेआम करता आदिवासी राजनीति में स्वाभिमान को बहुत ख्याल रखना आत्मसम्मान को बहुत ख्याल रखना है स्वाभिमान बेचकर राजनीति नहीं कर सकता आदिवासी बाकी तो करते हैं राजनीति देश में सोशल समाज की कोई जगह नहीं है सब कुछ करते हैं पर समाज ट्रैवल में आज भी आत्मसमर को ख्याल रखा जाता है मेरे कहने का मतलब उसे स्थिति के कारण से आज बहुत देख रहे हैं एक चुनौती समाज के सामने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है यानी इतनी बदलाव हो रहा है शोषण हो रहा है एक सीमा होती हैअगर हम शरीर के आदमी समाज के आगामी करें तो कौन करेगा इस प्रदेश में कौन करेगा और आज और खुशी है हमारे झूठी में लगे ना जवाब देने चल रहा है हमने अभी पिछले 12 साल हो जाते हमारी टीम के साथ हमने समाज में पूछा 15 साल बीच में आंदोलन कर रहे हैं समाज के हित की लड़ाई करें समाज संकलन जब चुनाव होता है तभी पता चलता है तुमने कहा कि यह कांग्रेस या बीजेपी को वोट देंगे दोनों राजनीतिक दल का वही हाल है मैं कहां के समाज को उतारा है आदिवासी आंदोलन से जागे जिस दिन आदिवासी समाज जाग जाएगा हम कहते हैं क्या समाज के अधिकार की लड़ाई आने वाला वीडियो वाले आने वाला जल जाएगा कल अपने लड़ाई लड़ेगा इस बात की खुशी में हमें कोई चिंता हम चाहते हैं कि आने वाले अपनी लड़ाई खुद लड़नी अपनी लड़ाई खुद लड़ो हमको दमन दमाद कहते थे सब में डिटेल देते थे अब कहां दबाने वह तो ससुर जी का एहसास भी गया साले साले गायब हो गए स्थिति नहीं रहेंगे आप सरकारी चिंता नहीं किया आदिवासी समूह दिवाली दिवाली नहीं दोगे तो बुड्ढे में जाओगे दूसरी बार इस देश में सब मिल जाएगा जमीन नहीं मिलने वाला कितना बचा सको तो बचा लो नहीं तो लुटेरे आएंगे ऐसे लूटेंगे पता नहीं चला कब का कहना चालू कर दो 2530 कहां जाओगे झोपड़े जाओगे मैं चाहता हूं कि आज इस अवसर पर जो दिल की बात है दिल की भावना है क्यों चीनी मैदान में प्रयास कर रहे हैं समाज को नया प्रयोग कर रहे हैं की कितना सफलता मिलेगी हमने भविष्यवक्ता ना चिंता नहीं करते किस को नुकसान पहुंचा एविन चिंता मेरी ड्यूटी नहीं है कि सामने वाला है जो भी हो वह अपना नुकसान हो कितना होगा वह अपना जानू मेरे को सोचने की जरूरत है समाज को सोचने की जरूरत
क्योंकि 4 साल में एक बैठक हुई थी पूरे देश के सारे आदिवासी एकीकरण और एक राष्ट्रीय मंत्र आदिवासी संसद का नाम दिया गया और कमेटी का नाम दे सकते हैं हमारा करना चाहिए आदिवासी समय सरस्वती वह भी यही चाहता है वह अपने तरफ से जाता है फिर समाज और अभी-अभी अलग तरीका से निकलता है कहीं ना कहीं कन्फ्यूजन होता है धर्म की स्थिति पैदा होता है की स्थिति क्या होगा हमारे गोड समाज में राष्ट्रीय एकीकरण किया जाए वह भी अपनी है लेकर आगे बढ़ता है अलग-अलग तरीके से हमें आगे बढ़े तो कभी स्टेशन में हो सकता है क्या एकीकरण हो पाएगा या बीच में हमारी कम्युनिकेशन जोकि अपने पार्टनर बहुत जरूरी है क्योंकि जिस प्रकार जा रहे हैं सभी प्रदेशों में लगातार मीटिंग सॉन्ग तो इस बात को ध्यान देना है कि वहां पर सक्रिय संगठन ने सामाजिक संगठन में देश पकड़ गतिविधि करते हैं वह चाहते हैं तो मोहन नहीं चाहते नहीं होनी चाहिए प्रकार से हमारे आदिवासी हो आप जो देना चाहिए पुराण किया है यह युवा और वरिष्ठ के बीच में एक कम्युनिकेशन के बना हुआ क्योंकि हमारे यहां भी बीएससी उसी के नाम से संगठन चल रहा है जीएस का भी एक संगठन है और फीचर है मध्य प्रदेश में कहीं ना कहीं आदि युवाओं के उम्र यह भरा हुआ है कि वह हमें प्लेटफार्म में हमें कुछ करने का इज़ादी नहीं देतेइसको भी पार्टनर बहुत जरूरी है आज हमने ग्रेविटी जी जिस प्रकार का युवा सांसद होनी चाहिए उनको देखो देना चाहिए हमारे रिश्ते को उनका मार्गदर्शन देने के लिए आगे आना चाहिए क्योंकि मौका दे हमारा फर्ज होनी चाहिए रात को हमें समझना है बहुत लंबा हो जाएगा एकीकरण एकीकरण कहीं ना कहीं हम एक जगह एक मंथ में आ जाए एक छत के नीचे आजा एक माला में जीरो सारी चीज होती है लेकिन यह होने से हम यह होने से एक नहीं हो पा रहा है इसलिए सबसे ज्यादा आपसी संवाद है और सबसे बढ़िया तरीका है हमारे बीच में जो गिफ्ट रहते उनको काटने का जहां तक चलाएं करवा के चला रहे हैं और जो टॉपिक है मणिपुर का था हमारे फोन के देखो बहुत ही सारी बातें के लिए मैं कहना चाहूंगा इस देश में 40-45 सारीज कम कर रही है जो अपने झंडे पर लेकर आगे बढ़ रही है उसे घंटे में हमारे से बीच में उसे रस किस प्रकार का काम है भाइयों की सकरी दिया वहां दिखानी होगी क्योंकि यार देखने आईसीसी में कब्जा है अभी यह बताइए कि मैं मांगने कहां जाओगे कब जरूरत होगी एक संविधान एक तरफ रह जाए और संविधान में आर्टिकल 19 हमें दिया गया बोलने की आजादी सिंधिया जा रही है हम भी घबरा रहे हैं बोलने से हम चाहे आरएसएस के विचारधारा के साथ लेकर चलने वाला के बीच में अपनी बात रख नहीं पा रहे हैं हमारे लोगों के विरोध उठा नहीं रहे आज विधानसभा चले जाइए आगरा वाली आदिवासी आदिवासी उसके साथ कैसे व्यवहार होता है उसको समझाइए बहुत जतन कर ले बात हमारी जमीनों का सबसे ज्यादा गिनती हो रही है और जब मैंने ऐसी दवाई जा रही है सरकार की जारी हो रही है कि हम उनके आवाज नहीं उठा पा रहे हैं कहीं ना कहीं हमारी आरती की कमजोरी है और आप जो लिटरेसी कहीं नहीं आती है उसके कारण हमारे आदमी समझा करो sdm.com.in

