छत्तीसगढ़

सोच शिक्षा और संस्कार व्यक्ति को ऊपर उठाता है – आर. के. कुंजाम

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज़ 
व्यक्ति को ऊपर उठना है तो पहले सोच बनाये मेरे को परिवार के लिए, समाज के लिए, जिला के लिए, प्रदेश के लिए या देश के लिए कार्य करना है।सोच के आधार पर ही व्यक्ति अपने लक्ष्य को हासिल करता है। इसमें कई प्रकार की परेशानियां भी आती है। कष्ट भी होता है,हालात परीक्षा भी लेता है।पर अगर हम लक्ष्य या मन बना लिये तो समझो कोई रोक नहीं सकता। जैसे बाबा साहब अंबेडकर ने देश के सभी लोगों के लिए किया।
परिवार से माता पिता बड़े बुजुर्गो से तथा समाज से अपने रीति नीति परंपरा अनुसार संस्कार की प्राप्ति होती है। छत्तीसगढ़ही में एक कहावत आता है — जईसे जईसे मां बाप,तईसे तईसे लरिका।
जईसे जईसे घर द्वार तईसे तईसे फरिका ।।
घर परिवार माता पिता के समाज तथा आसपास परिवेश के आधार पर ही संस्कार की प्राप्ति होती है।और वही व्यक्ति को आगे बढ़ने में सहायक होता है।एक विचारधारा का विकास होता है।जो राष्ट्र हित तक ले जाता है। जैसा सोच होता है वैसे ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है।
हमें परिवार समाज के साथ तहसील जिला के साथ प्रदेश और राष्ट्र हित में सोचना चाहिए।
जो आई ए एस स्तर के व्यक्ति होते हैं वैसे ही मन बनाकर पढ़ाई करते हैं।और आगे बढ़ते हैं। हमें हर स्तर पर पढ़ने और बढ़ने की आवश्यकता है।
शिक्षा वह शेरनी का दूध है जिसे पीकर व्यक्ति आगे बढ़ता है।हक अधिकार के लिए लड़ता है। संविधान और संवैधानिक अधिकारों को जानता समझता है।
आज देश में जगह जगह भ्रष्टाचार व्याप्त है किस प्रकार से हक अधिकार छीना जा रहा है हमें पता नहीं।
खासकर हमारे आदिवासी समाज में गरीबी अशिक्षा समाज के पतन का कारण बन रहा है। गरीबी के कारण शिक्षा प्राप्त करने में असक्षम हो जातें हैं। हालात शिक्षित होने से रोक नहीं सकता।पर हम हालात गरीबी को दोष देते हैं।सोच नहीं बना सकते की हमें आगे बढ़ना है।
वर्तमान में धीरे-धीरे जागृति आ तो रही पर जैसे आना चाहिए नहीं हो पा रहा है।
वर्तमान में देख रहे हैं गरीब मजदूर के बच्चे भी तहसीलदार कलेक्टर और विधायक भी बन रहें हैं।जो जोश जूनून और लक्ष्य को प्रदर्शित करता है।
हमारे लोग संघ संगठनों में रहकर जो पढ़े लिखे लोग अधिकारी कर्मचारी नेता मंत्री समाज से आगे तो बढ़ जाते हैं पर समाज की ओर पीछे मुड़कर नहीं देखते। आदिवासी समाज में यही पतन का कारण बन रहा है।हम दूसरों की गुलामी करते हैं। हममें सोच विकसित करने की आवश्यकता है।
आदिवासी समाज के पढ़े लिखे अधिकारी कर्मचारी नेता मंत्री लोग व्हाट्सअप और शहर तक ही सीमित है।आज भी गांव देहातों में अशिक्षा भूखमरी गुलाम गिरी देखने को मिलता है।संघ संगठन बना तो लेते हैं पर स्वार्थ परता अपने तक सीमित रहते हैं।
अपने धर्म संस्कृति भाषा को बचाने की आवश्यकता है।हर समाज समुदाय का एक विशिष्ट पहचान होता है पर लोग आदिवासी धर्म संस्कृति भाषा को नष्ट करने दूसरों का अनुकरण करते हुए अपने धर्म संस्कृति को नष्ट कर समाज की पहचान को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं।
हर समाज समुदाय के अधिकारी कर्मचारी नेता मंत्री लोग अपने समाज को शिक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने जिस स्तर से हर क्षेत्रों में प्रयास कर रहे हैं उस हिसाब आदिवासी समाज के अधिकारी कर्मचारी नेता मंत्री का सोच नगण्य नजर आता है।
शिक्षा के साथ आर्थिक आधार पर समाज को ऊपर उठाने की आवश्यकता है।
शिक्षित होकर लोग समाज समाज की ओर ध्यान देना सीखें।आज की सोच पढ़ लिख कर केवल नौकरी ही पर्याप्त नहीं हमें पढ़-लिखकर सफल व्यवसाई, सफल कृषक बनने की भी आवश्यकता है।पर हममें सोच होना चाहिए।
हम समाज संगठन संघ से यही आशा रखते हैं हमारे पढ़े लिखे अधिकारी कर्मचारी नेता मंत्री गण समाज को ऊपर उठाने की दिशा में भी कार्य करें। स्वार्थ से ऊपर उठें।उन गरीबों को देखें जो एक वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं।जो ज़ुल्म अत्याचार सहकर जीवन यापन कर रहे हैं।
जल जंगल जमीन की रक्षा करें आदिवासी धर्म संस्कृति भाषा को संरक्षित करें संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें। ज़ुल्म अत्याचारो पर आवाज उठायें। महिलाओं से भी आग्रह है पढ़-लिखकर अपने धर्म संस्कृति भाषा समाज का सम्मान करें। बचाने का प्रयास करें। धर्म परिवर्तन न करें।
आदिवासी न हिन्दू है,न सिक्ख न ईसाई,न मुस्लिम है। आदिवासी प्रकृति के पुजारी जल जंगल जमीन के संरक्षक और विश्व को ग्लोबल वार्मिंग जैसे खतरनाक विनाशक से बचाने वाले हैं।सभी शुद्ध वायु आक्सीजन प्रदान करने वाले हैं। अतः धर्म परिवर्तन से बचें।
अपने गढ़ किलों देव शक्तियों को किसी अन्य के हाथों न जाने दें।गढ़ गोत्र बाना ठाना को संरक्षित करें। तभी शिक्षा का और शिक्षित समाज का सही अर्थ होगा। दिखावा में न जायें दिखावें में पैसा खर्च करने के बजाय समाज के गरीबों पर खर्च करें।सोच बनाये लक्ष्य बनाकर काम करें। समाज जरूर उठेगा धर्म संस्कृति भाषा संरक्षित होगा।