ट्रायबल कम्युनिटी को भावी पीढी के लिए शहर उन्मुख होना आवश्यक है
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
३० जून २०२४ को मेरे अनुज सुरेश कुमार श्याम SECL के 35 वर्षों के सेवा के बाद निवृत्त हुए. जीवन के दूसरी पारी की शुरुआत तथा गृह प्रवेश के उपलक्ष में पारिवारिक मिलन समारोह का आयोजन किया गया. आयोजन में निकटतम सम्बन्धी और घनिष्ठ बंधु – बांधव सम्मिलित हुए.
अनुज वधु अभी शिक्षिका के रूप में सेवारत हैं. दो भतीजे हैं एक मेकेनिकल इंजीनियर और एक कामर्स ग्रेजुएट है. दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. आसमां सिटी संकरी, बिलासपुर में दो मकान है जहां रिश्तेदारों और इष्ट मित्रों के बच्चे पढ़ते और प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग क्लास अटेंड करते हैं.
अग्रज के अनुसरण करते हुए अनुजों ने परम्परा के साथ प्रगतिशील आधुनिकता को अंगीकार किया और प्रगति के लिए शहरी जीवन को अपनाया. गाँव में जमीन जायदाद बनाने के बजाय भाइयों ने तथा सालाबाबू ने भी बिलासपुर में घर बनाया. गाँव में भले ही जमीं जायदाद नहीं है लेकिन आज सभी के परिवार बिलासपुर में रहते हैं. गाँव से निकले… बाहर नौकरी किये… और रिटायर होने के बाद फिर गाँव में जा बैठे. यह तो उत्तरोत्तर प्रगति नहीं हुई. कालोनी लाइफ पले बढे पढ़े बच्चे गाँव जाने से कतराते हैं; क्योंकि गाँव के लिए यातायात के साधन सुगम और सुलभ नहीं है. गुणवत्ता युक्त शिक्षा. बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, और रोजगार के लिए शहर ही आना पड़ता है. ऐसा नहीं है की गाँव में प्रतिभा का अभाव है लेकिन प्रतिभाओं को तराशने का अवसर और साधन शहरों में है. बेटियां गाँव में व्याहना नहीं चाहती. मैंने अपने रिश्तेदारों और साथियों के बेटियों के लिए गाँव के संपन्न घराने से रिश्ते प्रस्तावित किया. लेकिन… “भईया, शहर में नौकरी करैया… कालोनी में रहैया परिवार बतावा न” … जैसे जवाब सुनने को मिलता है. इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है की वैवाहिक संबंधो के लिए शहरी रिश्ते को प्राथमिकता दी जाती है. शहर में “ दू कुरिया के घर वाला गाँव के बीस एकड़ के खेती वाला “ पर भारी पड़ता है. तभी तो सुदूर आदिवासी अंचल के मंत्री, विधायक, अधिकारी, कर्मचारी शहरों में अपना घर अवश्य बनाते हैं और अपने परिवार को शहरों में ही रखते हैं. … समयानुकूल ट्रायबल कम्युनिटी को भावी पीढी के लिए गाँव के मोह त्यागकर शहर उन्मुख होना आवश्यक है.. प्रतिगामी विचार छोड़कर प्रगतिशील सोच अपनाना ही होगा अन्यथा …. ज़माना आगे निकल जाएगा … हम पीछे रह जायेंगे. .

