Thursday, May 21, 2026
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छत्तीसगढ़

तीन गोंडवाना स्टेट बिलाइगढ़, रायगढ़ और सरईपाली ने मिलकर मनाया बिलाईगढ़ में मनाया विश्व आदिवासी दिवस….

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

गोंडवाना साम्राज्य के एक जीवंत साक्ष्य बिलाईगढ़… बिलासपुर से ८२ कि.मी. दूर स्थित है. पहले यह नगर महासमुंद जिला में आता था लेकिन अब २०२२ से सारंगढ़ –बिलाईगढ़ जिला में पड़ता है. बिलाईगढ़ गोंडवाना स्टेट कटगी का भाग है. राज घराना का एक भाई कटगी और दूसरा बिलाईगढ़ का राजपाट संभाला था.
बिलासपुर से पामगढ़ होते हुए शिवरीनारायण… और महानदी पार कर उस तरफ ग्राम गिधौरी पड़ता है. गिधौरी से सारंगढ़ रोड पर १० कि.मी. के फासले पर पवनी ग्राम का तिराहा आता है. पवनी से ७ कि.मी. अन्दर बिलाईगढ़ पड़ता है.
कार्यक्रम संयोजक खोलबहरा सिदार और ब्रिजभान सिंह जगत जी बताया कि आदिवासी समाज के मुखिया गण और शासकीय सेवक मिलकर राजा साहब बिलाईगढ़ के अगुवाई में हरेक साल यह पर्व मनाते हैं. अर्थ व्यवस्था का भार समाज के कर्मचारी गण ही आपस में मिलजुल कर वहन करते हैं. पिछले वर्ष यह आयोजन भटगांव में किया गया था.
कार्यक्रम का आयोजन थाना मैदान में किया गया था, जहाँ पक्का और स्थायी मंच बन हुआ है. पास में ही राज घराने के पुरखौती समलाई दाई का मंदिर है. प्राचीन मूर्ति के साथ समलाई दाई की नयी मूर्ति स्थापित है. देवांगन समाज की परमेश्वरी दाई का भी यहाँ ठाना है. ठाना में पारंपरिक पूजन के पश्चात हजारों की संख्या में युवक युवतियों ने डीजे के साथ विशाल रैली निकाली जो नगर भ्रमण करते हुए वापस पंडाल पहुचकर सभा में तब्दील हो गयी. राज महल से मुख्य अतिथि राजा ओंकारेश्वर शरण सिंह (ओट्टी), कुंवर युवराज शरण सिंह (कटगी स्टेट) और राजा देवेन्द्र प्रताप सिंह पोर्ते, कुमार विश्व विजय सिंह (रायगढ़ स्टेट) को बाजे गाजे के साथ जुलुस के शक्ल में कार्यक्रम स्थल तक लाया गया. राजा देवेन्द्र प्रताप सिंह अभी राज्य सभा के सदस्य हैं. राजा देवेन्द्र बहादुर सिंह सरईपाली – फुलझर स्टेट अपरिहार्य कारणों से नहीं पहुँच पाए.
इस आदिवासी पर्व में आसपास के गाँवो तथा उड़ीसा के गाँव से भी गोंड, कंवर, बिंझवार,उरांव के साथ साथ संवरा, मांझी, कुडूख, खड़िया, कनडरा, खैरवार, मुंडा कौंध,बिंझिया, भैना एवं धनवार समाज के लोग भी शामिल हुए थे.

छत्त्सीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा की और से बिलासपुर से सर्वश्री रमेश चन्द्र श्याम कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, समय सिंह गोंड कार्यकारी जिला अध्यक्ष बिलासपुर, परमेश्वरी श्याम, जगदीश प्रसाद सिदार, चाम्पा से तरुण नेताम राष्ट्रीय महासचिव, रायगढ़ से श्यामलाल जगत प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, संपिया (खरसिया) से ननकी राम सिदार संरक्षक मालखरौदा राज, सारंगढ से जयसिंह ओट्टी जिलाध्यक्ष, कोदोपाली (भटगांव) से ताराबाई राजेश्वर, नवापारा उड़ीसा से घासीराम माझी कार्यकारी अध्यक्ष अठारह्गढ़ गोंड महासभा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए.

विभिन्न क्षेत्रो ये युवक युवतियों के टोलियों के रंगारंग कार्यक्रम के बीच में अतिथियों का उद्बोधन भी चलता रहा. राजा देवेन्द्र प्रतापसिंह ने समाज को संबोधित करते हुए यह बताया कि १०० साँसदो का शिष्टमंडल जो प्रधान मंत्री से मिला था, में वे भी थे. उन्होंने आश्वस्त किया कि एसटी/ एससी आरक्षण में क्रीमी लेयर का नियम लागू नहीं किया जाएगा.
कार्यक्रम देर शाम तक चलता रहा. हमलोग श्रीमतीजी के एक वर्ष पूर्व भटगांव में मिली सहेली चंदादेवी सिदार (सबर) के आमंत्रण पर उनके घर चले गए. चायपान और घरेलु चर्चा में पडोसी देवांगन परिवार भी घुलमिल गए. चूँकि रात्रिभोज श्रीमती कुसुमलता नेताम के घर ग्राम धनसिर में था, इसलिए चंदादेवी जी के मनुहार को विनम्रता पूर्वक अगले वर्ष के लिए स्वीकार करते हुए विदा लिए. .
ग्राम धनसिर बिलाईगढ़ से बसना रोड पर ९ कि.मी. दूर मुख्य सड़क पर ही स्थित है. रात आठ बजे कुसुमलताजी के घर पहुंचे. श्री ननकीराम सिदारजी वहां पहले ही पहुँच गए थे. कुसुमलताजी उनकी बड़ी बेटी हैं और श्रीमती जी के फुफेरी बहन हैं. दरअसल बिलाईगढ़ प्रवास में एफ. एम. चैनल सक्रीय था. पूरा कार्यक्रम ऍफ़.एम् यानि फिमेल चैनल द्वारा प्रायोजित और नियंत्रित था. हम लोग संगठन और सामाज के विषय वस्तु पर दिमाग खपाते रहे. उधर महिला मंडली अलग बैठकर आगामी नवम्बर में तय वैवाहिक कार्य पर चर्चा करती रहीं.
शुद्ध शाकाहारी और स्वादिष्ट घरेलु भोजन से मन तृप्त हुआ. इतना स्वादिष्ट हरी मूंग की दाल और मखना भाजी पहली बार खाया. भोजन करते रात के ग्यारह बज गए.
बिलासपुर वापसी के लिए विदा लिए तो करील, आचार के लिए बाड़ी के नीबू और ऋ रूचि का ल रखते हुए पका हुआ मखना भाजी भी टिफिन में पैक कर दिए.
बिलाईगढ़ में राजाओं, [प्रजाजनों, और विशेषकर श्रीमतीजी के परिजनों से मिले सम्मान से मै स्वयं अभिभूत था, साथी लोग आश्चर्य चकित थे. बिलाईगढ़ प्रवास निश्चय ही अपने जातीय गौरव का भान कराने वाला और यादगार रहा .
रात दो बजे बिलासपुर पहुंचे. मौसम ने साथ दिया. दिन रात में बारिश नहीं हुई. . .