पंझर के दीवान बरन सिंह ठाकुर (जगत ) को पत्नी शोक …
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
श्रीमती यशोदा देवी ठाकुर का निधन २९ अगस्त २०२४ को हो गया था जिसका दशगात्र कार्य गृह ग्राम पंझर जिला रायगढ़ ६ सितम्बर को संपन्न हुआ. यशोदा देवी पंझर के दीवान की पत्नी और बनोरा के दीवान की पुत्री थी.. स्मृति शेष यशोदा देवी जी बरन सिंह ठाकुर के साथ वर्ष १९६४ में दाम्पत्य सूत्र में बंधी. वे अपनी अमृतमयी ममता से सिंचित पारिवारिक बगिया में दो पुत्र यशवंत सिंह पुत्रवधू सुचिता सिंह, लोकेश्वर सिंह पुत्रवधू श्रीमती शिवानी सिंह, दो पुत्री गंगेश्वरी मांझी दामाद बलभद्र मांझी, राजकुमारी मरकाम दामाद हरिसिंह मरकाम तथा नाती पोते सहित संपन्न और खुशहाल परिवार छोड़ कर गई हैं. बड़े दामाद बलभद्र मांझी उड़ीसा से सांसद हैं और छोटे दामाद छत्तीसगढ़ प्रशासन के ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग में कार्यपालन अभियंता हैं.
बरन सिंह जी स्वयं सशक्त और प्रभावशाली राजनितिक व्यक्ति हैं, पास के ही गाँव नंदेली के नन्द कुमार पटेल परिवार से मितनहा सम्बन्ध है. वे क्षेत्र के गोंड समाज के प्रमुख हैं. धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में उनकी सक्रीय सहभागिता रहती है. बिलाईगढ़ के विश्व आदिवासी दिवस आयोजन के समय वे रायपुर के हास्पिटल में दिवंगत पत्नी की इलाज और देखभाल में व्यस्त थे.
ग्राम पनझर : खरसिया रायगढ़ हाइवे पर चपले के पास बायंग चौक पड़ता है. बायंग चौक जाना – माना जगह है. क्योंकि यही से गोंड़ और अघरिया जमींदारों की गाँव को रास्ता जाता है. चौक से करीब चार पांच कि. मी. की दुरी पर बायंग गाँव पड़ता है जो मंत्रीजी ओ.पी. चौधरी का पैत्रिक गाँव है. बायंग से आगे स्व. नन्द कुमार पटेल जी का गाँव नदेली है. यही पास में तारापुर है जो राजा यशवंतज सिंह (पोर्ते) का गाँव है. बनोरा, कछार, पनझर सभी गोंडवाना जमींदारी है.
बरन सिंह ठाकुर जी के तीन पुरखे (जगत राजा) लोग रायगढ़ रियासत के तीन जमींदारी प्राप्त किये थे… कर्रापाली (खरसिया) पनझर और कछार, जिला रायगढ़. उन्ही के वंशज अभी कर्रापाली में सिदार, कछार में दीवान और पनझर में ठाकुर उपनाम से जाने जाते हैं. इस क्षेत्र में अघरिया (पटेल) और गोंड लोगो की ही जमीदारी है… जुगलबंदी है… मितानी है… और राजनितिक रसूख भी है. इन पंक्तियों के लेखक जीवन संगिनी भी पनझर जमींदार के आँगन में खेली हैं… पली हैं.
आयोजित शोक सभा में क्षेत्र के गोंड और अघरिया समाज के प्रमुख लोग सम्मिलित हुए और ठाकुर परिवार के प्रति भावांजलि अर्पित किये. गोंड़ राज घराने से रायगढ़ राजमाता भवानी देवी सिंह, बिलाईगढ़ से कुंवर युवराज शरण सिंह, मालखरौदा से राजा जितेन्द्र बहादुर सिंह, तारापुर से राजा यशवंत राज सिंह ने अपने उदगार व्यक्त किये. छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा से रमेशचंद्र श्याम कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष ने गोंडवाना संस्कृति के अनुसार मृत्यु (कुंडा) संस्कार के बारे में बताया तो अघरिया समाज के लोग बहुत प्रभावित हुए. गोंडवाना गोंड महासभा मालखरौदा राज से संरक्षक श्री ननकी राम सिदार, रामलाल राज, गिरवर सिंह, तमनार से अध्यक्ष श्री बनमाली प्रसाद सिदार ने भी अपने भावनाएं व्यक्त की.
शोक सभा के समापन पश्चात गोंड राजाओं और समाज प्रमुखों की अलग बैठक हुई, क्योंकि समाज प्रमुख और रजा लोग भी सामाजिक संगठन में सक्रीय हैं. चर्चा के दौरान सभी ने गोंड महासभा और सर्व आदिवासी समाज संगठन के बिखराव पर चिंता व्यक्त की.
यह तय किया गया कि रायगढ़ क्षेत्र के गोंड समाज की बैठक हो और सामाजिक एकीकरण पर चिंतन मनन के बाद एकीकरण की पहल की जाए. \
रमेश चन्द्र श्याम

