ग्रामीण विशेषछत्तीसगढ़

ग्राम बिटकुली के विद्यानंद ऊद्देश (गोरेलाल उद्देश जी के बडे भाई) को भावभीनी श्रद्धांजलि

Spread the love

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

मा. विद्यानंद उद्देश का का निधन १६ सितम्बर २०२४ को हो गया था जिसका दशगात्र कार्य उनके गृह ग्राम बिटकुली (टेगनमाडा) जिला बिलासपुर में २५ सितम्बर २०२४ को संपन्न हुआ. दिवंगत विद्यानंद जी बहत्तर वसंत देख गौरवपूर्ण स्मृति छोड़कर इस दुनिया से विदा हुए हैं. अपने चार पुत्रों और दो पुत्रियों सहित नाती नतनींन और पोते पोतियों से लहलहाती- महमहाती पारिवारिक बगिया छोड़ गए हैं. पुत्र दिलीप CSPGCL में कार्यपालन अभियंता हैं दुसरे पुत्र SECL में सहायक प्रबंधक हैं. तीसरे पुत्र अशविनी सरपंच हैं. चौथे पुत्र शशांक प्रतियोगी परीक्षा की तयारी कर रहे हैं. स्मृतिशेष विद्यानंद उद्देश जी संगठन के वरिष्ठ और सक्रीय कार्यकर्ता श्री गोरेलाल उद्देश जी के बड़े भाई और डॉ. संतोष उद्देश जी के चाचा थे.
वहां डॉ. नवल ध्रुव मिले. वार्तालाप से यह पता चला कि वे कोटगढ़ (अकलतरा) से हैं. मैंने अपना परिचय दिया कि मैं भी किरारी (अकलतरा) का निवासी हूँ. हम एक दुसरे को नहीं पहचान रहे थे. लेकिन दोनों की अर्धांगिनी एक दुसरे को जानती पहचानती है. कोटगढ़ में वीरनारायण सिंह बलिदान दिवस कार्यक्रम में उनके ही घर डॉ. अनिल जगत के साथ सपरिवार भजिया चाय का स्वल्पाहार लिए थे. ये डॉ. नवल ध्रुव श्रवण के साढू हैं. …
ग्राम बित्कुली लगभग ७५ कि.मी. की दुरी पर बेलगहना मरीमाई ठाना मार्ग पर स्थित है. बिटकुली से मरीमाई २७ कि.मी. दूर पड़ता है. आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ASU के रैली में शामिल होकर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन दिए और करीबन सव दो बजे हम लोग बिलासपुर से ग्राम बिटकुली के लिए रवाना हुए थे . रतनपुर से पेंड्रा रोड में आगे बढे, दारसागर पहुंचे. दारसागर से बेलगहना – कोनचरा – मिट्ठूनवागांव – नगोई होते हुए ग्राम बिटकुली पहुचे.
बिटकुली एक आदिवासी बहुल छै सात सौ जनसंख्या वाला गोंडवाना वनग्राम है. जिसमें गोंड बहुसंख्य के साथ कुछ घर कोल समाज के हैं. एक दो घर के राउत, केवट और लोहार हैं. ग्राम पंचायत बिटकुली के आश्रित गाँव रिग्ररीगा है.
विशेष … बित्कुली गाँव में भुइयां फोड़ हनुमान मूर्ति है. यहाँ के लोग बताते हैं कि जब अकाल पड़ता था और बारिश नहीं होती थी तो इस मूर्ति के सर पर गोबर थाप देते थे और तब तक भजन कीर्तन करते थे, जब तक बारिश से मूर्ति का गोबर धुल नहीं जाता था. चोबीस घंटे के अन्दर परिणाम मिलता था. यह महिमा और परंपरा अब भी प्रचलन में है.
चंदनपान के समय रमेशचंद्र श्याम और गंगाराम छेदैहा जी ने गोंडी मृत्यु संस्कार (कुंडा मिलान) संस्कार के बारे में संक्षिप्त जानकारी उपस्थित सगाजनो से साझा की और अपने संस्कृति को अपनाने का आग्रह किया. .
इस प्रवास में बिलासपुर से रमेशचंद्र श्याम के साथ सर्वश्री गंगाराम छेदैहा कार्यकारी ब्लाक अध्यक्ष बिल्हा (द) समय सिंह गोंड कार्यकारी जिला अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा, बद्री खैरवार, अनिल ध्रुव प्रदेश संयोजक ASU साथ रहे.