हमार राज पार्टी ने राज्य में प्रस्तुत नवीन बजट को छत्तीसगढ़ी और विशेष रूप से आदिवासियों के समक्ष आ रही समस्याओं को दूर करने में नाकामी बताया जाए – बी.एस. रावटे
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
रायपुर लगभग 1 लाख एकड़ आदिवासी अनुसूचित क्षेत्र की भूमि पर विभिन्न परियोजनाओं के अधिग्रहण की तलवार लटक रही है परंतु इसके उचित मुआवजे और पुनर्वास पर छत्तीसगढ़ का बजट पूरी तरह साइलेंट है
आज भी 2010 में निर्धारित जमीन के दरों के आधार पर मुआवजा और पुनर्वास देने का प्रयास हो रहा है
रायपुर 3 मार्च हमर राज पार्टी ने आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार के द्वारा वित्त मंत्री ओपी चौधरी के माध्यम से प्रस्तुत बजट को स्थानीय नागरिकों किसान और विशेष रूप से आदिवासियों के सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं को दूर करने में कही नहीं बताया है। हमार राज पार्टी ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक और खनन परियोजनाओं का विस्तार केंद्र के दबाव में किया जा रहा है और इस हेतु राज्य सरकार राज्य के हितों को दरकिनार कर इन परियोजनाओं को मंजूर कर रही है। हसदेव क्षेत्र में नई खदान परसा को खोलने के पीछे यही दबाव है अन्यथा यहां पर पूर्व से ही चालू खदान परसा ईस्ट केते बासन साल भर में 200 लाख टन का कोयला उत्पादन कर रही है जो राजस्थान विद्युत मंडल और अडानी के लिए पर्याप्त है। परंतु फिर भी विष्णु देव साय सरकार ने परसा खदान में खनन प्रारंभ कर दिया है।
हमार राज पार्टी ने कहा कि यह केवल एक उदाहरण है लगभग 1 लाख एकड़ अनुसूचित क्षेत्र की कृषि भूमि और ग्रामों पर अधिग्रहण और विस्थापन की तलवार लटक रही है और इसके बदले में उचित मुआवजा और पुनर्वास के ऊपर किसी का ध्यान नहीं है। आज भी 2010 के दरों के आधार पर मुआवजा देने का प्रयास हो रहा है और पुनर्वास में नौकरी आदि की व्यवस्था करने के बजाय 10 साल पहले का निर्धारण ₹500000 एक मोस्ट राशि देकर प्रभावितों को रोजगार हक से बेदखल किया जा रहा है। जहां तक नई भूमि अधिग्रहण कानून के तहत भूमि के मार्केट रेट से चार गुना मुआवजा देने की बात होती है उसमें सबसे बड़ी बाधा यह है कि 2019 के बाद से राज्य सरकार ने जमीन के मार्केट दरों का रिवीजन नहीं किया है जबकि जमीन की कीमतें दोगुनी हो चुकी है। कम से कम महंगाई दर के हिसाब से इसमें वृद्धि कर चर्चा करने की घोषणा वित्त मंत्री को करनी चाहिए थी परंतु इस पूरे पहलू पर मुख्यमंत्री का बजट भाषण साइलेंट है।
डीएमएफ के पैसे को भी जिस तरह बंदर बात पिछले 10 सालों से चल रही है उसे रोकने के कोई प्रभावी कदम इस बजट में नहीं उठाए गए हैं यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए की डीएमएफ के पैसे से कुछ हिस्सा परियोजना प्रभावित व्यक्तियों को प्रतिवर्ष नगद राशि के रूप में दिया जाए जैसा की महतारी वंदन आदि योजना में हो रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासी बहुल है ।जनसंख्य अनुरूप हर तीसर व्यक्ति आदिवासी है। प्रदेश के 61 प्रतिशत क्षेत्रफल पांचवीं अनुसूचित के तहत अनुसूचित है , जहां के अकूत संसाधनों की राजस्व बहुत है । आदिवासी भाषा,संस्कृति , साहित्य के उत्थान के लिए प्रदेश में बजट नहीं मिला। आदिवासियों के पारंपरिक जातरा , ऐतिहासिक मेला मड़ाई के साथ प्रदेश के प्रथम शहीद को नमन करते प्रदेश कई जगह शहीद मेला होता है उसका आश्वासन के बाद कोई बजट नहीं है। 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस की आयोजन के लिए भी बजट नहीं दिए। आदिवासी सलाहकार समिति का गठन उसका अलग से कार्यालय एवं संचालन के लिए बजट नहीं दिए।
बी एस रावटे
प्रदेश अध्यक्ष ,हमर राज पार्टी

