संवैधानिक अधिकारों के विभिन्न मांगों को ले कर धमतरी कलेक्टर के द्वारा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सर्व आदिवासी समाज ने ज्ञापन सौंपा
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विश्व आदिवासी अधिकार दिवस 13 सितंबर 2025 के उपलक्ष्य में संवैधानिक अधिकारों के लिए मांगों की पूर्ति हेतु ज्ञापन सौंपा गया
वर्ष 2007 में संयुक्ता राष्ट्र की घोषणा United Nations Declaration on the Rights of Indigenous Peoples declared in the General Assembly में 46 अनुच्छेद अधिकार है। जिसमे आत्मनिर्णय का अधिकार, राजनीतिक स्थिति, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सांस्कृति की रक्षा, आदिवासी सम्मान की रक्षा हेतु अधिकार प्राप्त है। भारत की केंद्र सरकार एवं राज्यों की सरकार इन संवैधानिक और नैतिका अधिकारों को तत्काल लागू करें।
आदिवासीयों का प्रमुख मांग
1. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 25 जुलाई 2025 को भूमि सुधार संशोधन अधिनियम के अंतर्गत ‘जमीन रजिस्ट्री’ की सभी प्रक्रियाए रजिस्ट्री कार्यालय में पूर्ण कर रहे है। जिससे जमीन रजिस्ट्री में पारदर्शिता नहीं है। अतः इस अधिनियम को पूर्व की भांति भूमि पंजीयन के लिए क्रेता-विक्रेता की पूर्ण विवरण की इश्तिहार जारी कर दावा- आपत्ति के बाद ग्राम पंचायत में अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर प्रमाणीकरण किया जावे।
2. छात्रवृत्ति योजना में अनुसूचित जनजाति वर्ग के पालकों का निर्धारण किए गए आप सीमा राशि 2 लाख 50 हजार रू. को समाप्त किया जाए।
3. अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए नियोजन और पदोन्नति में आरक्षण नियम 5 को पुनः अधिसूचित करें एवं माननीय सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश दिनांक 01-05-2023 दिनांक 24-02-2025 को पदोन्नति में तत्काल लागु कलेक्टर महोदय के आवेदन प्रस्त छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (6) के तहत अनुसूचित जनजाति की भूमि-अंतरण प्रतिबंध में ऋण पुस्तिका को सम्मिलित नहीं करने, जारी प्ररिपत्र दिनोंक 17 अगस्त 2016 को तत्काल निरस्त किया जाए 

