भगवान के पैदा होने से पहले से ही आदिवासी पैदा हुआ है:-मान.सतीश पेंद्राम
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
कोंडागांव: गोंडवाना समाज समन्वय समिति जिला कोंडागांव ने जिला स्तरीय गांयता जोहारनी कार्यक्रम का आयोजन हाईस्कूल मैदान जैतपुरी ब्लाक फरसगांव में किया गया ।
इस जिला स्तरीय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भगवान बिरसा ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मान.सतीश पेंद्राम जी महाराष्ट्र ,विशिष्ट अतिथि माननीय श्री झनक ध्रुव जी विधायक गरियाबंद,मान.पनकू राम नेताम जी जिलाध्यक्ष छ.ग.सर्व आदिवासी समाज जिला कोंडागांव एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरु.सोनधर नेताम जी,तिरु.चेरकू राम नेताम, एवं तिरु.सतऊ राम नेताम(सभी ब्लाक अध्यक्ष गों.स.स.स.) ने की ।
कार्यक्रम से पूर्व मान.सतीश पेंद्राम जी ने सैकडों सामाजिक कार्यकर्ताओं के अगुवाई में रैली के शक्ल में आकर र्कोंडागांव शहर में स्थित आधुनिक भारत के शिल्पकार बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी ,वीर गुंडाधूर,रानी दुर्गावती ,नार्र गांयता चौक (मर्दापाल चौक),तथा चौपाटी स्थित शहीद वीरनारायण सिंह के प्रतिमाओं पर सेवा अर्जी कर काफिला कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुआ ।
भारी बारीस के बावजूद हजारों की भीड़ मुख्य अतिथि का स्वागत पारंपरिक गाजे बाजे के साथ किया ,उपस्थित अन्य अतिथियों के उद्बोधनों जिसमें विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर बात रखी गई इसके पश्चात चूंकि आज इस गांयता जोहारनी कार्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा लोग मुख्य अतिथि को सुनना चाहते थे ,उत्साह से आयोजन में एक अलग ही शांति छा गई मानों जैसे सबकी मुराद पूरी हो गई हो।समय समय पर जन्मे समाज के प्रेरणा श्रोत रहे भगवान बिरसा मुंडा,टांट्याभील,गुंडाधूर,बाबा साहेब ,रायतार जंगो, पेनों के जय घोष के गगन चुंभी नारों के मध्य मुख्य अतिथि को उद्बोधन के लिए आमंत्रित किया गया ।
अपने उद्बोधन में मान. सतीश पेंद्राम ने समाज से आव्हान किया कि सभी आदिवासी समुदाय एक मंच पर एक विचार व एक लक्ष्य को लेकर साथ काम करें।बस्तर में आदिवासियों पर हो रहे शोषण,हत्या,बलत्कार व आदिवासियों पर नक्शलवाद के ठप्पा को मिटाने के लिए संवैधानिक जागरूकता पर जोर दिया। अपने उद्बोधन में उन्होने यह भी कहा कि आदिवासी, भगवान की उत्पति से पहले से रहते आए हैं ,इसलिए इस गोंडवाना लैंड (वर्तमान भारत )के मूल मालिक हैं और इसलिए सुप्रीमकोर्ट के उस निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इस भूभाग में निवास करने वाले प्रत्येक नागरिकों का कर्तव्य है कि आदिवासियों का सम्मान करें। आदिवासियों की विभिन्न समस्याओं का जिम्मेदार समाज से बने गुलाम नेताओं को ठहराते हुए अफसोस जाहिर की । भाषा व संस्कृति का महत्व आदिवासियों की जीवन रेखा है तथा समाज के लिए जीवन का महत्व बताते हुए उन्होने कर्मचारियों के लिए कहा कि कुछ कर्मचारी ऐसे होते हैं *जो ईमानदारी से ड्यूटी करते हैं ,समय पर आते जाते हैं ,बाकी किसी से कोई मतलब नहीं रखते ,किसी से कोई लेना देना नहीं ,वे सिर्फ जाति प्रमाणपत्र के धारक हैं*
ऐसे लोग समाज के लिए बोझ और गुलाम हैं व मूर्दों के समान हैं। उन्होने समाज में व्याप्त राजनीतिक अज्ञानता व राजनीतिक षडयंत्रों पर प्रकाश डालते हुए यह भी कहा कि किसी पार्टी का नेता पांच साल के लिए बनता है और जिंदगी भर गुलामी करता है लेकिन जो
समाज का कार्यकर्ता बनता है वह जिंदगी भर समाज के लिए काम करेगा, नेता से बड़ा समाज का एक सामाजिक कार्यकर्ता होता है क्योंकि समाज का कार्यकर्ता ही समाज की वजूद के लिए मरता है, शहीदों का विचारधारा ही समाज एवं देश को जिंदा रखा है इसलिए शहीदों की विचारधारा से ही समाज, देश जीवित रहेगा, समाज बहुत बड़ी चीज है इसके सामने पार्टी कुछ भी नहीं है।
लेकिन वहीं यदि एक मजदूर भी, समाज के उत्थान व एकता लिए समय ,विचार व अपने परिश्रम का चार पैसा लगाता है तो उन सब पढे़ लिखे व्यक्ति से ज्यादा महान है।वहीं पर समाज में कुकुरमुत्तों की तरह उगने वाले समाज के राजनीतिक चाटुकार व गुलामी मानसिकता रखने वालों को समाज के लिए काम करने हेतु आव्हान किया।
अपने ओजस्वी व तेज तर्रार अंदाज के लिए तथा आदिवासियों के मुद्दों पर मुखर होकर बोलने के लिए पूरे देश ही नहीं वरन विदेशों में भी जाने जाने वाले श्री सतीश पेंद्राम जी ने बस्तर में हो रहे नर संहार,मणीपुर में हुई आदिवासियों पर अत्याचार पर तथा आए दिन आदिवासियों पर हो रहे जुल्मों ,विस्थापन आदि विषयों पर प्रदेश व देश की सत्ताधीशों पर तीखी बातें रखी और वर्तमान हालात से समाज को आगाह करते हुए आव्हान किया कि हमारी आने वाली पीढी़ को यदि जिंदा देखना चाहते हैं तो समूल आदिवासी एक होकर साथ काम करें।
अंत में नार्र गांयता तिरु.रती राम नेताम जी के उपस्थिति में मुख्य अतिथि को तिरु.रतीराम नेताम जी व अध्यक्ष गोंडवाना ने (बस्तरिया वट्टी दादी रचित) एवं अन्य लेखकों के द्वारा रचित सामाजिक व्यवस्थाओं पर आधारित लेखों का संग्रह
1. येरमिह्तना एक महान गोटूल
2. कोयामर्री गोंडी पल्लो करियाट
3. गोंडो की पेन व्यवस्था
4. कोया बुम एक समृद्ध ग्राम व्यवस्था
पुस्तकें भेंट की ।
अंत में विभिन्न ग्रामों से आए नर्तक दलों की प्रस्तुति व समूह नृत्य उपरांत क्षेत्र प्रमुख फुलसत्या मरकाम के द्वारा आभार उद्बोधनोपरांत सभा समापन की घोषणा की गई ।

