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जोहार फिल्म्स प्रोडक्शन C.G. की टीम पहुची दमकसा आश्रम……दादा शेरसिंह आचला से आशीर्वाद लेने

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

जोहार फिल्म्स प्रोडक्शन C.G. की टीम अपने फिल्म “दंदडाकोटुम” के सूटिंग लोकेशन हंटिंग के लिए पर्रेकोड़ो (दुर्गुकोंदल) के बाद अपने दुसरे पड़ाव ग्राम दमकसा जिला कांकेर पहुची. यहाँ अनेको राजकीय और सामाजिक संगठनो से सम्मानित पुनेमी महामना और गोंडी भाषाविद दादा शेर सिंह आचला जी का आश्रम है. हरेभरे जंगल के बीचोंबीच स्वयम के ग्यारह एकड़ पैत्रिक संपत्ति पर “जंगो रायतार विद्या केतुल शिक्षण एवं अनुसंधान संसथान” संचालित है. यह संस्थान सन 1992 से चल रहा है जिसमे संग्रहालय, ग्रंथालय, तथा शोधार्थी एवं विद्यार्थियों के लिये आवास की व्यवस्था है. कंप्यूटर एवं आडियो विजुअल प्रोजेक्टर सिस्टम भी उपलब्ध है. अतिथियों के लिए विश्राम एवं आवास की भी उत्तम व्यवस्था है.
संग्रहालय (म्यूजियम) में मानव जाति के विज्ञान सम्मत विकास के माडल प्रदर्शित हैं. पाषाण कालीन आदिम औजार से लेकर सैंधव सभ्यता काल के पात्र भी यहाँ देखे जा सकते हैं. कोरंडम खनिज के साथ ज्वालामुखीय लावा के संघनित प्रस्तर खंड भी संरक्षित है. कला दीर्घा में आदिम जनो द्वारा निर्मित / प्रयुक्त काष्ठ एवं बांस शिल्प के दुर्लभ संग्रह भी प्रदर्शित है.
ग्रंथालय में गोंडी दर्शन, भाषा और संस्कृति से सम्बंधित दुर्लभ पुस्तके पत्रिकाएं एवं नोट्स भी शोधार्थियों के लिए उपलब्ध हैं. म्यूजियम का एक खंड दादा को मिले सम्मान और स्मारिकाओं संग्रह के लिए सुरक्षित है.
गोंडी संस्कृति से सम्बंधित अध्येताओं और शोध कर्मियों के लिए पर्याप्त सामग्री यहाँ उपलब्ध है. आचला दाडाजी का यह केतुल ( केतुल गोंडी शब्द है हिंदी में शाब्दिक अर्थ कुटीर होगा) गोंड़ समाज के लिए अमूल्य धरोहर है.
दादा के गरिमापूर्ण सानिध्य और आत्मीय आतिथ्य प्राप्त कर टीम “दंडाकोटूम” गौरवान्वित है.

रमेश चन्द्र श्याम