मनीराम नेताम द्वारा ग्राम फदहा के कुल 4.41 एकड़ भूमि को गैरआदिवासी लव कुमार श्रीवास को विक्रय अनुमति का फ़ाइल फिर खुला
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज तहसीलदार बोदरी ने कर दिया था आपत्ति ख़ारिज … SDM बिल्हा ने आपत्तिकर्ता के पुनर्विचार आवेदन को मान्य किया…
मनीराम नेताम पिता गोपाल नेताम द्वारा ग्राम फदहा के कुल 4.41 एकड़ भूमि को गैरआदिवासी क्रेता लव कुमार श्रीवास पिता रामा श्रीवास को विक्रय अनुमति के लिए आवेदन किया हुआ है.
उक्त प्रकरण में छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रमेश चन्द्र श्याम ने नियत तिथि 26 जून 2025 को नायब तहसीलदार बोदरी के कोर्ट में आपत्ति दर्ज किया है. जिसका 7 जुलाई 2025 को पहली पेशी थी. तीन दिन पश्चात 11 जुलाई 2025 को आपत्ति मा. तहसीलदार द्वारा यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि आपत्तिकर्ता का इस प्रकरण में हितबद्ध नहीं है.
तहसीलदार द्वारा आपत्ति ख़ारिज करने के विरुद्ध आपत्तिकर्ता ने निम्न बिन्दुओं पर विचार करने हेतु SDM बिल्हा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया… :
1. यह प्रकरण दो पक्षों के मध्य विवाद में निर्णय देने का विषय नहीं है बल्कि गंभीरतापूर्वक “परिस्थिति, प्रविधि और हेतु” का पड़ताल करते हुए आदिवासी भूमि को गैर आदिवासी को विक्रय अनुमति देने से सम्बंधित है.
2. जिसमे अनुमति प्रदाता सक्षम अधिकारी जिला कलेक्टर महोदय को सम्बंधित अधीनस्थ राजस्व अधिकारी द्वारा जांच पडताल कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना अभीष्ट है. जिससे अनुमति प्रदाता अधिकारी अनुमति प्रदान करने / न करने का उचित निर्णय ले सके.
3. आपत्तिकर्ता ने जाँच पड़ताल के लिय सम्बन्धित 11 विचारणीय बिन्दुओं पर प्रतिवेदन / अनुमति प्रदाता का ध्यानाकर्षण के लिय प्रश्न उठाया है.
4. आपत्तिकर्ता के आपत्ति का सार बिंदु वाद भूमि की “बेनामी भूमि” होने की आशंका है. राजस्व संहिता के धारा 165-6-ग (पांच) : और स्पष्टीकरण (ख) : के अनुसार बेनामी संपत्ति है या नहीं साबित करने का दायित्व अनुज्ञा प्रदान करने / न करने वाले पर है. भू राजस्व संहिता के सम्बंधित अनुच्छेद का छायाप्रति आपके अवलोकनार्थ (परिशिष्ट ब ) संलग्न है
5. उन बिन्दुओं पर आवेदक द्वारा सम्यक एवं बिन्दुवार वस्तुनिष्ठ उत्तर नहीं दिया गया है. जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उक्त संपत्ति (बेनामी निषेध अधिनियम (1986) “बेनामी संपत्ति नहीं है ” आपत्ति के विचारणीय बिंदु और आवेदक के आंशिक उत्तर आपके अवलोकनार्थ संलग्न है (परिशिष्ट “अ”)
6. आपत्ति ख़ारिज करने का एक कारण आपत्तिकर्ता का हितबद्ध नहीं होना बताया गया है. आपत्तिकर्ता संवेदनशील, सक्षम और प्रतिबद्ध ट्राइबल एक्टिविस्ट है, आदिवासी भूमि को गैर आदिवासी के पास विक्रय करने से आदिवासी समाज का हित बाधित होता है. आदिवासी भूमि और बेटी की समाज से बाहर जाने के बाद समाज में वापसी व्यौहरिक रूप में संभव नहीं है. आदिवासी भूमि और बेटी बचाना प्रथम कर्तव्य है.
7. आपत्ति खारिज करने का एक अन्य कारण यह दिया गया है कि “आवेदक अपने आवश्यकता एवं बिना दबाव के वाद भूमि को विक्रय करना चाह्ता है.” इस वाक्यांश में “गैर आदिवासी को विक्रय करना चाहता है” का उल्लेख नहीं किया गया है.
8. आपत्ति खारिज करते हुए यह भी उल्लेख किया गया है कि “ह. प. से प्रतिवेदन अप्राप्त. प्रतीक्षा हो.” हलका पटवारी से प्राप्त प्रतिवेदन से आपत्ति के कुछ बिन्दुओं पर जवाब प्राप्त हो सकता था. हलका पटवारी के प्रतिवेदन के बिना ही आपत्ति ख़ारिज कर दिया गया.
उपरोक्त बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए आपत्तिकर्ता द्वारा किये गए ध्यानाकर्षण के 11 बिन्दुओं का पुनर्विलोकन / पुनर्विचार करने का आवेदन सद्म बिल्हा को किया गया था. जिसे SDM दवार स्वीकार किया गया और प्रकरण के बिन्दुवार निराकरण के लिए तहसीलदार को फ़ाइल वापिस कर दिया गया है.
पुनः सुनवाई की पहली पेशी 26 सितम्बर को हुई. अगली पेशी 10 अक्तूबर को है..
रमेशचंद्र श्याम
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष

