ग्रामीण विशेषछत्तीसगढ़

राज्योउत्सव में छत्तीसगढ़ के लोककलाकारों का अपमान एवं अन्देखी – अकबर राम कोर्राम

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

रायपुर। हमर राज पार्टी के  अध्यक्ष ने राज्योत्सव पर सरकार को आढ़े हाथ लिया है समाज ने आरोप लगाया है कि जिस तरह बाहर के कलाकारों को बुलाकर सम्मान एवं पुरस्कार दिया जा रहा  अपने छत्तीसगढ़ के कलाकारों को भी दिया जाना चाहिए इससे यह स्पष्ट है कि राज्य छत्तीसगढ़ के कलाकारों का अपमान एवं अनदेखा कर रही है सम्मान राशि दी जाती है वो छत्तीसगढ़ के आदिवासी और छत्तीसगढ़ीया कलाकारों को नही दी जाती छत्तीसगढ़ के कलाकारों को अपने छत्तीसगढ़ के राज्यस्थापना के 25 वर्ष में भी सम्मान नही मिल पा रहा है वे केवल सम्मान चाहते है उन्हें उतनी मोटी रकम भी नही चाहिए जो आप बाहर से कलाकारों बुलाकर उन्हें देते है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति हमारी धरोहर है, जिससे छत्तीसगढ़ के आदिवासी कलाकारों की पहचान न केवल भारत वर्ष में अपितु विदेशो में भी है छत्तीसगढ़ के कलाकार देश विदेश में बड़े बडे आयोजनों में भाग लेने जाते है लेकिन जब उनके ही प्रदेश में उनकी कला का देखने जानने सुनने के लिए छत्तीसगढ़ के आदिवासी सुदूर अंचलो से आशा के साथ लोग आते है लेकिन जिन्हें देखना सुनना चाहते है वो नही देख पाते राज्योत्सव में उनके कला का प्रदर्शन न होना ये छत्तीसगढ़ की कलाकारों का अपमान है ।

छत्तीसगढ़ में रहने वाले कलाकारों को मंच प्रदान करना ये छत्तीसगढ़ शासन की जिम्मेदारी है लेकिन संस्कृति विभाग में बैठे अधिकारी द्वारा पूर्व के आयोजनों में किस तरह उनकी अनदेखी की गई है उनका अपमान किया गया जिससे यंहा के कलाकारों को अपना ही प्रदेश पराया सा लगने लगा है छत्तीसगढ़ की खुशहाली, एकजुटता, विकास हमारी बोली भाखा को आगे बढ़ाने का काम यह सरकार नही कर रही हैं। उल्टा भेदभाव को बढ़ावा दे रही है जबकि छत्तीसगढ़ की संस्कृति की परंपरा सदियों से चली आ रही है जमीन से जुड़ी व मिट्टी की सुगंध और संस्कृति से सराबोर को बचाए रखना सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।

सरकार की जवाबदारी होनी चाहिए कि प्रदेश में बहुत से प्रसिद्घ लोक कलाकार हुए हैं, जिन्होंने लोक कला के माध्यम से प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है लेकिन उन्हें खुद के प्रदेश में सम्मान नही मिला सरकार ने भेदभाव कर इसे बढ़ावा दिया यह एक उदाहरण है ऐसे कई कृत्य सरकार में बैठे मंत्री व अधिकारियों के द्वारा किये गए है।

उनके इस तरह लिए गए बहुत से गलत नीतियों व निर्णयों के कारण अब छत्तीसगढ़ के लोगो को यह लगने लगा है कि हमारी अस्मिता, संस्कृति, परम्परा की रक्षा अब हमें ही करनी पड़ेगी जिसका परिणाम है कि आज छत्तीसगढ़ व गैर छत्तीसगढ़ी लोगो के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है हमारा छत्तीसगढ़ पहले ऐसा नही था प्रदेश के सभी जाति,धर्म के लोग एक दूसरे का सम्मान करते थे लेकिन आज इस प्रदेश की परमपरा, खुशहाली,संस्कृति, शांति सब कुछ यह सरकार खत्म कर रही है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।