जुना शहर, रतनपुर के गोंड समाज ने उठाया बीड़ा … गोंड़ राजवंश के विरासत सतखंडा महल (बादल महल) को आम जन को परिचित कराने.
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
प्राचीन रतनगढ़ मध्य भारत के छत्तीस गढ़ों के राजाओं (गढ़पतियों) का राजधानी था. वर्तमान जुनाशहर के गोंडवाना सतखंडा महल का भग्नावशेष इसका स्तब्ध साक्षी है. इस जगह से दादा हीरासिंह मरकाम के सानिध्य में आठ वर्ष पूर्व 2 जनवरी 2018 को मै परिचित हुआ था. अवसर था मा. एम. सिंह खुशरो द्वारा ग्राम लिमहा (बेलतरा) में बनवाये गए गोंडवाना किला महल के पूजा एवं औपचारिक उद्घाटन का. तब दादा के अगुवाई में सतखंडा महल से ही लिमहा के लिए बाइक रैली निकली थी.
जुनाशहर रतनपुर कोटा रोड पर लखनी दाई डोंगरी से थोड़ी दूर आगे स्थित है. यहाँ गोंडवाना राजवंश के धरोहर सतखंडा महल, कोको बावड़ी और प्राचीन कलिका मंदिर है.
गोंडवाना सतखंडा महल के सात तल्ला थे. अभी पांच तल ही नजर आते है. प्रथम भूतल जमींदोज हो गया है और सप्तम तल गिर गया है. सात मंजिला गगनचुम्बी इमारत की वजह से इसे “बादल महल” के रूप में जाना जाता रहा होगा. भग्न महल के अन्य कक्ष और परकोटे के भग्नावशेष अब भी विद्यमान है. महल परिसर ग्यारह एकड़ क्षेत्र में फैला था लेकिन अभी करीबन दो एकड़ ही बचा है. महल के बाहर एक सुखा कुआँ है जिसकी अधिकांश गहराई मलबे से पट गई है. राजमहल से गुप्त भूमिगत मार्ग इस कुएं में ही खुलता है.
राजमहल परिसर में राज देवालय भी है जिसके कंगूरे ध्वस्त हो गए हैं. गुम्बद को मरम्मत कर संरक्षित किया गया है. राज देवालय में बाहर की ओर खुलनेवाले पांच कक्ष है. भीतरी हिस्से में एक हाल है. हाल में ही शक्ति स्थल है जहाँ मुख्य जवांरा कलश पाठ है. हाल के उत्तरी छोर में ज्योति कलश कक्ष है. दक्षिणी छोर के कक्ष में शिव लिंग स्थापित है. कक्ष में गोंडवाना अस्त्र – शस्त्र भी सुरक्षित रखे हुए हैं. इसी कक्ष के एक कोने के फर्श में में तालाबंद लोहे का कपाट है. जिसके सम्बन्ध में लोगों के होठों पर रहस्यमय तालाबंदी है. जहाँ …….. होने की संभावना है.
प्राचीन रतनगढ़ 36 गढ़ों के अधिकांश गोंड़ राजाओं सहित अन्य राजाओं …. तंवर, कँवर, बिंझवार, खैरवार आदि राजाओं के गोंड महाराजा की राजधानी थी. इसी महल में राजाओं की बैठकें होती थी. अंचल के राजघरानो में रायगढ़, सारंगढ़, बिलाईगढ़ (कटगी) सक्ती, चाम्पा (चंपा नगरी) करगी, कोसगई, कोरबा, लाफागढ़, मातिनगढ़, पाली, खैरागढ़, धमधागढ़, पिथौरागढ़, पंडरिया ….. आदि आदि राजघरानो के वंश सूत्र (Lineage) मिलते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश रतनपुर (रतनगढ़) के गोंड राजवंश के वंशसूत्र रहस्यमय ढंग से लुप्त है या षड्यंत्र कर नष्ट कर दिया गया है. इसके संभावित कारण अनिष्ट की आशंका से अज्ञात वास या राजघरानो का आपसी षड्यंत्र अथवा अन्य परिस्थितियां हो सकती है … यह अध्ययन और शोध का विषय है.
पुनश्च… सतखंडा राजमहल परिसर में निर्बाध रूप से गोंड़ी नेंग नियम के अनुसार कुवांर और चैत मास में पंचमी तिथि से नौ दिन तक जोत जंवारा के साथ शक्ति साधना की जा रही है. इसका जिम्मा जुनाशहर रतनपुर गोंड समाज के प्रमुख द्वय श्री मिलन सिंह मरावी एवं उमेद सिंह मरावी ने उठाया है. यह अनुष्ठान मान्यवर गुरुदेव महिपाल सिंह मरकाम निवासी रंजना के सानिध्य में की जाती है इस वर्ष भी 23 से 31 मार्च तक शक्ति साधना की जायेगी. जुनाशहर के गोंड समाज ने क्षेत्र के गोंड समाज सहित सभी आदिवासी समाज को गोंड़ राजवंश के विरासत को सम्मान और संरक्षण के लिए आव्हान किया है.
रमेश चन्द्र श्याम
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष

