चैत्र नवरात्रि गोंडवंशी राजाओं के लिए शक्ति कठोर तप के साथ शक्ति साधना काल होता है
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज जिसमें निश्चित नियम का पालन करते हुए निर्धारित नेंग संपन्न किया जाता है. जिसमें कुछ निषेध (मनाही) का पालन किया जाता है. जो नयम और निषेध का अनुपालन नहीं करते या नेंग में त्रुटी हो जाने पर उसका दुष्परिणाम अवश्यम्भावी है.
इस गोंडवंशियों की शक्ति साधना अद्भुत और अद्वितीय हैं. इस अनुष्ठान में किसी किसी देवी देवता की आकृति … मूर्ति की आराधना नहीं की जाती बल्कि प्रकृति दो परम सत्य शक्तियों “जीवन और मृत्यु” की साधना की जाती है. जिसमे कठोर ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए अन्न, आमोद प्रमोद, श्रृगार, सुख सुविधा और शैय्या का त्याग किया जाता है. आत्म निग्रह, सत्य व्रत और शुचिता का अनुपालन किया जाता है. इससे ही आराध्य प्राकृत दैवीय शक्ति का सम्मान होता है. परिणाम स्वरुप आराधक को शक्ति प्राप्त होती है.
जिस प्रकार से नौ मास में मानव जीवन का सृजन होता है. उसी के अनुरूप “जौ” बीज को पञ्च महाभूत ( पृथ्वी, आकाश, जल, वायु और अग्नि) के उर्जा के साथ नौ दिन तक सेवा किया जाता है जिसे जंवारा कहा जाता है. जंवारा मञ्जूषा (टोकरी) के मध्य में अखंड ज्योति कलश स्थापित किया जाता है.. सेवा से निर्जीव बीज में जीवन का संचरण होता है. जैसे जैसे जंवारा की वृद्धि होती है वैसे वैसे ज्योति (लौ) की ऊंचाई भी बढती जाती है. . जो अष्टम रात्रि में पीत (पीले) वर्ण से रक्तिम आभा प्राप्त करती है…. और सर्वाधिक ऊंचाई प्राप्त करती है., इसे प्रमाणित करने के लिए लौ के ऊपर नीबू लटकाकर रखते हैं.जिसे अष्टम रात्रि में ज्योति (लौ ) स्पर्श करती है.
नवम दिवस में जंवारा में समाहित जीवन शक्ति को जीव के बदले जीव (बलि) देकर शांत किया जाता है यह काल शक्ति (मृत्यु) वंदना है इसकी भी निश्चित विधान है. कठोर साधक अपना रक्त अर्पित करते हैं, मेरे पितामह अपने रक्त अर्पित किये हैं. नवरात्रि साधना में इन पंक्क्तियों के लेखक ने अपने पितामह को स्व रक्त अर्पित करते हुए देखा है. वे अपने पितामह के साथ सह्साधक रहे हैं.
सार में …. चैत्र नवरात्रि कोई पर्व या उत्सव नहीं है, यह एक राजशाही तांत्रिक साधना है, जो इतनी सिद्ध और प्रमाणित है कि आम जन और सर्वजन भी निजी और सामूहिक रूप से मोहल्ला … गाँव स्तर पर अनुष्ठान पूरा करते हैं… और शक्ति और अपनी मनोकामना प्राप्त करते हैं.
बादल महल जुना शहर रतनपुर में भी स्थानीय गोंड समाज द्वारा पारंपरिक नेंग, नियम और निषेध (वर्जनाओं) का पालन करते हुए चैत्र नवरात्री (23 मार्च से 31मार्च 2026) साधना / अनुष्ठान किया जा रहा है. पंचम दिवस का अनुष्ठान 27 मार्च को होगा. नियम और निषेध (वर्जनाओं) का पालन करते हुए समस्त सम्मानित सामाजिक जन आमंत्रित हैं.
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