हाना कल्क स्थापित करने के लिए ले जाने के पूर्व अपने परिवार के मृत आत्माओं के नाम से पत्थर नये कपड़े में लपेट कर रखा गया है
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज हाना कल्क स्थापित करने के लिए ले जाने के पूर्व अपने परिवार के मृत आत्माओं के नाम से पत्थर नये कपड़े में लपेट कर रखा गया है इसी प्रकार सभी काड़ावेडा से सम्बंधित उसेंडी अलग -अलग गुट्टा के लोग पहले से पूर्वजों के तय अनुसार स्थानों में स्थापित किये गये इस परम्परा को मानने वाले उसेंडी कुटुम्ब के पचास हजार से अधिक लोग उपस्थित हुए जिसमें बहन , बेटियों के साथ नाति ,सम्धान का विशेष महत्व देखने को मिलता है यह गोंड जाति का अदभुत परम्परा है जिसका विश्व में सिर्फ गोंड मुरिया जैसे आदिवासियों में ही देखने को मिलता है काड़ावेडा नारायणपुर में यह कार्यक्रम 22 वर्ष बाद आयोजित किया गया इस समय जो लोग शामिल हुए वे बहुत ही भाग्यशाली हैं इसके पश्चात पता नहीं कब और किसको अवसर मिलेगा अपना -अपना भाग्य है यही सोंच कर मैं भी अपने माता-पिता के याद में पत्थर गाड़ने अपने कुटुम्ब के साथ शामिल हुआ आने वाले समय में जब ऐसा उत्सव आयोजित होगा तो उस समय क्या पता जिंदा रहेंगे भी की नहीं यदि जिंदा रह भी गये तो ये बात
तय है कि हम देखने सुनने या चलने लायक भी नहीं रहेंगे।इस वर्ष 22फरवरी से प्रारम्भ यह हाना कल्क उत्सव का समापन 25 फरवरी को अपने पूर्वजों से क्षमा याचना के साथ समापन होगा। जहां पर स्थानीय युवा बुजुर्गों के मार्गदर्शन में व्यवस्था सम्बहालने में लगे हैं निश्चित ही बधाई के पात्र हैं मैं सभी का हृदय की गहराई से सेवा जोहार करता हूं। इस अवसर पर उसेंडी कुटुंब परिवार के अलग-अलग जगह से पुरुष एवं महिला उपस्थित थे पारस उसेंडी गायता गुट्टा,कोदागांव 

