छत्तीसगढ़

वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

राजा राव पठार में जुटे वनग्रामों के ग्रामीण, वन अधिकार एवं राजस्व ग्राम की प्रक्रिया की दी गई जानकारी

बालोद। वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया, वन अधिकार कानून और सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को लेकर बुधवार, 26 अगस्त 2026 को राजा राव पठार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में बालोद जिले के गुरूर एवं डौंडी ब्लॉक सहित धमतरी, कांकेर और गरियाबंद जिले के विभिन्न वनग्रामों से ग्रामीण एवं सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत राजा राव बाबा, बड़ादेव एवं शहीद वीर नारायण सिंह की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद जयकारे लगाए गए। प्रशिक्षण के प्रमुख ट्रेनर श्री अश्वनी कांगे, सेनापति KBKS भारत, सहायक ट्रेनर श्री संदीप सलाम एवं सामाजिक प्रमुखों का पारंपरिक रूप से पीले चावल से स्वागत किया गया। प्रशिक्षण में पहुंचे विभिन्न जिलों के ग्रामीणों का भी पीले चावल से स्वागत किया गया।

वनग्रामों के इतिहास को समझने से हुई प्रशिक्षण की शुरुआत

प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर श्री अश्वनी कांगे ने वनग्रामों के इतिहास और उनके अस्तित्व में आने की परिस्थितियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वनग्रामों की वर्तमान स्थिति को समझने के लिए सबसे पहले इनके इतिहास को समझना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि अंग्रेज शासन के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 के माध्यम से वनों का वर्गीकरण एवं वन प्रशासन की व्यवस्था विकसित की गई। जंगलों के दोहन और वन प्रबंधन की औपनिवेशिक व्यवस्था के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में लोग जंगलों में जाकर बसते गए। समय के साथ ऐसी बस्तियां वनग्राम के रूप में जानी जाने लगीं और इनसे संबंधित रिकॉर्ड मुख्य रूप से वन विभाग के पास रहा।

श्री कांगे ने कहा कि वनग्रामों के संबंध में सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासनिक व्यवस्था को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन्हीं अभिलेखों के आधार पर लंबे समय तक विकास एवं शासकीय योजनाओं का संचालन किया जाता रहा है।

उन्होंने प्रशिक्षण में जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में 434 वनग्रामों को अधिसूचना के माध्यम से राजस्व ग्राम में परिवर्तित किया जा चुका है, जबकि अन्य वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

वन अधिकार कानून के तहत अधिकारों की जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान वन अधिकारों को लेकर भी ग्रामीणों को जानकारी दी गई। श्री अश्वनी कांगे ने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के अधिकारों को समझने के लिए वन अधिकार अधिनियम, 2006 तथा केंद्र सरकार के 30 जनवरी 2018 के पत्र से संबंधित प्रावधानों और प्रक्रियाओं को समझना जरूरी है।

उन्होंने व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार तथा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) के लिए दावा प्रक्रिया, उपलब्ध अभिलेखों और ग्राम स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में जानकारी साझा की।

प्रशिक्षण के दौरान वन एवं भूमि से जुड़े विभिन्न कानूनों और समय-समय पर हुए कानूनी बदलावों का भी उल्लेख किया गया। कुछ ग्रामों को जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के प्रमाण-पत्रों की जानकारी भी प्रतिभागियों के साथ साझा की गई। जिन ग्राम समितियों को अधिकार प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए हैं, उनके अनुभवों और दस्तावेजों को भी प्रशिक्षण में सामने रखा गया।

राजस्व ग्राम बनाने की प्रक्रिया समझाई

दोपहर के भोजन के बाद प्रशिक्षण के दूसरे सत्र की शुरुआत सहायक ट्रेनर श्री संदीप सलाम ने की। उन्होंने वनग्राम को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया।

उन्होंने बताया कि इसके लिए ग्राम स्तर पर किन दस्तावेजों और प्रारूपों की आवश्यकता होगी, संबंधित प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ाई जानी है तथा ग्रामीणों और ग्राम समितियों की भूमिका क्या होगी। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों के सवालों का जवाब देते हुए आवश्यक दस्तावेजों और प्रक्रिया को लेकर व्यावहारिक जानकारी दी।

ग्राम स्तर पर बैठक कर प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर

अंतिम सत्र में मास्टर ट्रेनर श्री अश्वनी कांगे ने वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों और सामाजिक प्रतिनिधियों से सुझाव लिए। उन्होंने कहा कि केवल प्रशिक्षण तक सीमित रहने के बजाय अब प्रत्येक वनग्राम में ग्रामीण स्तर पर बैठक आयोजित कर आवश्यक जानकारी और दस्तावेजों को जुटाते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने ग्रामीणों से अपने-अपने गांव के पुराने अभिलेख, वनग्राम से संबंधित दस्तावेज, ग्राम सभा के रिकॉर्ड एवं अन्य आवश्यक कागजातों को व्यवस्थित करने और सामूहिक रूप से आगे की कार्रवाई करने की अपील की।

विभिन्न जिलों के ग्रामीण हुए शामिल

प्रशिक्षण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा जिला बालोद की अध्यक्ष श्री प्रेमलता कुंजाम, उपाध्यक्ष श्री भोलाराम नेताम, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग डौंडी के अध्यक्ष श्री तुलेश्वर हिचामी, जिला प्रवक्ता सुश्री निलिमा श्याम, सर्व आदिवासी समाज जिला बालोद के सचिव सूरज गावड़े सहित लक्ष्मी उइके, बंशी कुंजाम, भूमि कुंजाम, रामचरण पड़ोटी, मनीषा कोर्राम एवं वर्षा ठाकुर उपस्थित रहे।

इसके अलावा बालोद जिले के गुरूर एवं डौंडी ब्लॉक सहित धमतरी, कांकेर और गरियाबंद जिले के विभिन्न वनग्रामों से ग्रामीण एवं प्रतिनिधि प्रशिक्षण में शामिल हुए।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वनग्रामों के इतिहास, वन अधिकार कानून, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार तथा वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों को जागरूक एवं सक्षम बनाना रहा।