बिजली निजी हाथों में, भाजपा सरकार का जनता की जेब पर डाका : विनोद चंद्राकर
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने कहा कि भाजपा सरकार स्मार्ट मीटर के बाद अब बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। टाटा पावर ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों में बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।

श्री चंद्राकर ने कहा कि बिजली जनता की मूलभूत आवश्यकता है, कोई मुनाफे का कारोबार नहीं। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के पास अपना विशाल नेटवर्क, अधोसंरचना और अनुभवी मानव संसाधन मौजूद है। इसे मजबूत करने के बजाय निजी कंपनियों को बिजली वितरण में प्रवेश देना आम उपभोक्ताओं, किसानों और गरीब परिवारों के हित में नहीं है।
उन्होंने कहा कि निजी कंपनी का उद्देश्य मुनाफा कमाना होगा, जबकि सरकार की जिम्मेदारी जनता को सस्ती, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना है। निजीकरण से बिजली दरों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है। साथ ही विद्युत विभाग के हजारों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े होंगे।
श्री चंद्राकर ने कहा कि नियामक आयोग ने 1 अक्टूबर को जनसुनवाई निर्धारित की है। सरकार को जनभावनाओं और कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए निजीकरण का समर्थन नहीं करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार निजी कंपनियों को बढ़ावा देने के बजाय छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी को मजबूत करे और प्रदेश की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया पर रोक लगाए।

