छत्तीसगढ़

आदिवासी नगारची महासभा में अधिकार और एकजुटता परिचय दिया 

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

धमतरी. विंध्यवासिनी वार्ड स्थित शहीद वीर नारायण सिंह सामुदायिक भवन में रविवार को छत्तीसगढ़ आदिवासी नगारची समाज की प्रदेश स्तरीय वार्षिक महासभा हुई। प्रदेशभर से जुटे समाजजनों ने एक मंच पर सामाजिक एकता, आदिवासी अधिकार, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ युवाओं के रोजगार संगठनात्मक मजबूती जैसे मुद्दों पर मंथन किया। महासभा में वक्ताओं ने साफ कहा कि अधिकारों की रक्षा के व लिए समाज को संगठित होकर अपनी आवाज मजबूती से उठानी होगी। मुख्य अतिथि अनुसूचित जनजाति आयोग छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 42 जनजातियां हैं और सभी प्रकृक्ति पूजक हैं। आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, रहन-सहन और

पारंपरिक रीति-रिवाजों से है। इन्हें संरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी दूर है। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों को करने के साथ आदिवासी समाज के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने वालों के खिलाफ समाज को जागरूक होने की बात कही। श्री मंडावी ने समाज के संगठन को मजबूत करने के लिए विधिवत पंजीयन और बायलॉज बनाने तथा समय-समय पर ऑडिट कराने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजातियों से जुड़ी

शिकायतों के निराकरण के लिए आयोग में व्यवस्था है। पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है। अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद ने महासभा को सामाजिक समरसता का सम्मेलन बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज की एकता और मजबूती का संदेश देते हैं। युवा विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं और नई दिशा दे रहे हैं। नई पीढ़ी को संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महासभा जैसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं।

जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए एकजुट हों: ओंकार

विधायक ओंकार साहू ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है और सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करता आया है। समाज अपने अधिकारों के प्रति पहले से अधिक जागरूक हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में आदिवासी समाज अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है। समाज की आवाज को मजबूती से उठाने और अधिकारों के लिए एकजुट रहने की जरूरत है। सिहावा विधायक अंबिका मरकाम ने कहा कि वार्षिक महासभा के माध्यम से समाज की रीति-नीति और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर मिलता है। उन्होंने शासकीय विभागों में आदिवासी युवाओं की भर्ती. रोजगार और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर विचार करने की बात कही।

परंपराओं को बचाने में आदिवासी समाज की बड़ी भूमिकाः रंजना

पूर्व विधायक रंजना साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराएं आज भी प्रदेश की पहचान हैं। उन्होंने समाज के पुरोधाओं और महान क्रांतिकारियों के संघर्ष से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी को समाज को बढ़ाने का आह्वान किया। आगे महासभा में महापौर सहित सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष जीवराखन मरई, गोंड़ समाज के जिलाध्यक्ष माधव सिंह ठाकुर, आदिवासी नगारची समाज के प्रदेश अध्यक्ष देवनाथ नेताम सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और समाजजन लगभग तीन हजार उपस्थित थे