छत्तीसगढ़

उच्च स्तरीय समिति , समान नागरिक संहित छत्तीसगढ़ के साथ सर्व आदिवासी समाज (रूढ़िजन्य परंपरा पर आधारित) का बैठक में आदिवासी समाज का यूसीसी पर आपत्ति

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
सर्किट हाउस रायपुर में उच्च स्तरीय समिति के साथ आदिवासी समाज के बैठक में सामाजिक प्रमुखों ने आपत्ति किए एवं संसद में गृह मंत्री और प्रदेश गृह मंत्री का सार्वजनिक बयान और उत्तराखंड में लागू यूसीसी में आदिवासी समाज को पृथक रखा गया उसी अनुरूप

छत्तीसगढ़ में भी विधिक रूप से स्पष्ट आदेश या सूचना जारी करें। विवाह एवं तलाक, भरण पोषण, सम्पत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार एवं विरासत , लिव इन संबद्ध में समान नागरिक संहिता में समिति के सामने सामाजिक प्रमुखों ने अपना पृथक परम्परा , प्रथागत कानून का बताते हुए एक कानून के अंतर्गत आदिवासी समाज को नहीं बांध सकते। इस विषयों में कोर्ट (न्यायपालिका) कोई सार्थक फैसला नहीं दे सकता क्योंकि परंपराओं से बिल्कुल अनभिज्ञ होते है। कुल परम्परा, कुल की सम्पत्ति, कुल वधू, बहु विवाह प्रथा, विवाह विच्छेदन, एक से ज्यादा शादी करने की रिवाज , आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासी की हस्तांतरित नहीं हो सकता और समाज में बिना समाजिक अनुमति की विवाह या लिव इन को मान्यता नहीं मिलना जैसे बातों से यूसीसी को पूर्ण रूप से आदिवासी समाज से खारिज करने की बात सर्व सम्मति से स्वीकार किए अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दिए। यूसीसी समिति ने सभी सम्भाग में बैठक लेकर विचार जानने की बात स्वीकार किए।
बैठक में अकबर राम कोर्राम, बी एस रावटे, विनोद नागवंशी, सविता साय, सुभाष परते, श्याम सिंह ताराम, महेश नाग, जीवराखान माराई,देवनाथ नागरची, विनोद भगत, बी एस नागेश, फणींद्र भोई,शिव चेचम,रूपेंद्र, मिंटू सिंह, प्रतिक्षा नेताम, जीवरखान उसारे एवं सामाजिक जनों ने बात रखी।
समिति ने स्वीकार किया कि आप लोगों की बात को समिति शासन को सौंपेगी।