13 सितम्बर, 2026 संवैधानिक एवं आदिवासी विषयों पर चर्चा स्थान कला भवन, सेमिनार हॉल, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर छ.ग.
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 13 सितंबर : आदिवासी अधिकारों के संरक्षण और सम्मान का संकल्प
13 सितंबर आदिवासी समुदायों के अधिकारों, सम्मान और उनकी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण दिन है। 13 सितंबर 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘संयुक्त राष्ट्र के स्वदेशी लोगों के अधिकारों की घोषणा’ (UN Declaration on the Rights of Indigenous Peoples—UNDRIP) को अपनाया था। इस ऐतिहासिक घोषणा ने दुनिया भर के आदिवासी समुदायों के अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मान्यता प्रदान की।
इस घोषणा का उद्देश्य आदिवासी लोगों के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना तथा उनके साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में वैश्विक प्रयासों को मजबूत करना है। इसमें आदिवासी समुदायों की भाषा, संस्कृति, परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और अपनी विशिष्ट पहचान को बनाए रखने के अधिकार को विशेष महत्व दिया गया है।
आदिवासी समाज का जीवन सदियों से जल, जंगल और जमीन से गहराई से जुड़ा रहा है। इसलिए भूमि, क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों तथा उनसे जुड़े निर्णयों में उनकी भागीदारी का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। आदिवासी समुदायों के विकास से संबंधित योजनाओं और नीतियों में उनकी आवाज और भागीदारी सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
भारत में भी आदिवासी समुदाय देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश सहित अनेक राज्यों में आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराएं, लोककला, लोकगीत, भाषाएं और जीवन-पद्धतियां आज भी समाज की पहचान को मजबूत करती हैं। आदिवासी अधिकारों की चर्चा केवल अधिकारों तक सीमित न रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक संरक्षण से भी जुड़ी है।
13 सितंबर का अवसर हमें यह याद दिलाता है कि विकास की प्रक्रिया में आदिवासी समुदायों की पहचान, संस्कृति और अधिकारों का सम्मान आवश्यक है। साथ ही यह दिन समाज और सरकारों को आदिवासी समुदायों के संवैधानिक एवं मानवीय अधिकारों के प्रभावी संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश देता है।
इस अवसर पर उपस्थित गण मन ने अपने विचार संदेश मुख्य अतिथि मान. अरविंद नेताम (पूर्व केन्द्रीय मंत्री)
अध्यक्षता प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल
कुलपति-पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर विशिष्ट अतिथि डॉ. नंदकुमार साय पूर्व अध्यक्ष – राष्ट्रीय जनजाति आयोग भारत सरकार मान. आर. के. विज पूर्व डी.जी. छ.ग. शासन प्रो. हेमलता बोरकर विभागाध्यक्ष-समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययन शाला पं. रवि.शु.वि.वि. रायपुर श्री सुमेर सिंह नाग संभाग अध्यक्ष-गोंडवाना समाज समन्वय समिति, बस्तर
श्री सुदीप श्रीवास्तव वरिष्ठ समाजिक कार्यकर्ता एवं एडवोकेट (सुप्रीम कोर्ट) प्रो. निस्तार कुजुर समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययन शाला पं. रवि.शु.वि.वि. रायपुर
द्वितीय सत्र समय : 01:00 बजे
मुख्य अतिथि मान. देवकुमार धान
पूर्व मंत्री एवं संयोजक-राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति भारत
अध्यक्षता मान. अकबर राम कार्राम अध्यक्ष-गोंडवाना गोंड महासभा छ.ग.अतिथि मान. बी.एस. रावटे – कार्यकारी अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज छ.ग.श्रीमती सविता साय प्रदेश उपाध्यक्ष, छ.ग. कंवर समाज विकास समिति श्री रामेश्वर राम टोप्पो अध्यक्ष छ.ग. उरांव (सरना) आदिवासी विकास परिषदश्री श्याम तारम – राष्ट्रीय महासचिव, अ.भा. हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज डॉ. किरण नुरेटी – प्रोफेसर एवं आदिवासी साहित्यकार
निपोन चेतिया – वरिष्ठ सलाहकार, असम छात्र संघ एवं राष्ट्रीय पुरस्कृत (सांस्कृतिक)विजय कंडरा – प्रदेश अध्यक्ष, छ.ग. कंडरा समाज देवनाथ नगारची – प्रदेश अध्यक्ष, छ.ग. नगारची समाज
कमलेश ध्रुव (सोरी) अध्यक्ष, केन्द्रीय गोंडवाना गॉड महासभा धमधागढ़ सुभाष परते – प्रदेश अध्यक्ष (युवा प्रभाग), सर्व आदिवासी समाज छ.ग.जीवराखन मरई – प्रदेश उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष, मां अगारमोती ट्रस्ट, धमतरी श्रीमती अकदा ठाकुर – प्रदेश उपाध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज छ.ग.विनोद कोशले – को-फाउंडर, सोशल जस्टिस एंड लिगल फाउंडेशन
मदन लाल नायक प्रदेश अध्यक्ष, खड़िया आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ सहनी राम सिदार कलंगा आदिवासी समाज छत्तीसगढ़श्री भरत लाला मलिक प्रदेश अध्यक्ष, धोबा कल्याण समिति छत्तीसगढ़
विनोद भगत – राजी देवान, राजी पहड़ा भारत श्री विनोद कुमार नागवंशी प्रदेश सचिव, सर्व आदिवासी समाज छ.ग. इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के पूरे छत्तीसगढ़ के लगभग 200 समाज के प्रमुख लोक उपस्थित थे

