ग्रामीण विशेष

आदि वंशीय गोंड़ राजाओं के साम्राज्य देवालय बादल महल और महमाई मंदिर जन देवालय रतनपुर के मध्य शक्ति-संयोजन जातरा.. समाज प्रमुखों के सहभागिता के साथ सम्पन्न..

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

बादल महल जूना शहर में गोंड़ राजवंश की भग्न किन्तु जागृत शक्ति स्थल विद्यमान है। जिसकी सेवा अर्जी देवहार गढ़ पुजारी संगठन के संस्थापक संरक्षक ऋषि राज गुरुदेव के मार्ग दर्शन में ग्राम जूना शहर के गोंड़ समाज के लोगों के सहयोग से वहाँ के पुजारी लोग कर रहे हैं।
कुँवार सुदी पंचमी दिन गुरुवार को धर्म नगरी रतनपुर में जिला बिलासपुर में गोंड़ समाज ने अपने कुलदेवी महमाई दाई की सेवा अर्जी गोंडी रीति रिवाज से की। सर्वप्रथम बादल महल जिसे सात मंजिला अवशेष के कारण सतखंडा महल के नाम से भी जाना जाता है, से गोंडी नीति, नेग, नियम और निषेध का पालन करते हुए शक्ति संधारण के साथ अभिमंत्रित बाहुँक (शक्ति संवाहक) , ज्योति कलश, एवं शस्त्र धारण कर पद जातरा पारंपरिक गुदुम बाजा के साथ निकली।
महमाई दाई पहुचने पर मंदिर में बाहुँक और बईगा ने पिंजरे में बंद होकर सेवा अर्जी से इनकार का दिया। और अन्य समाज के पुजारियों को दरकिनार कर गर्भगृह में बैठकर अपने नेग नियम से दाई की सेवा अर्जी की। बाहुँक ने सार्वजनिक रु से गोहार लगाई कि ”जोहार जोहार महामाई दाई, तैं हमर कुल देवी, तैं हमर मूल देवी, कुछ चूक के कारन हमन तोर सेवा तोर नेग नियम औ निषेध के साथ नई कर पात हन, हमन ला शक्ति दे अधिकार दे, ताकि तोर सेवा हमन तोर नेग नियम से कर पाइन….
बाहुँक का भार रमेश चंद्र श्याम ने उठाया। गोंडी बईगा की जिम्मेदारी गंगाराम छेड़ाईहा और उनके सहायक ने निभाई। सम्पूर्ण आयोजन का नियंत्रण जूना शहर के सियान मिलन सिंह मरावी के हाथ में तथा व्यवस्था की जिम्मेदारी उमेद सिंह मरावी पास रही। ।
तीन जिलों बिलासपुर, कोरबा, जाँजगीर चाम्पा के विभिन्न महासभा के सगा सियान, मातृशक्ति और युवा शक्ति भक्ति भाव से सम्मिलित हुए। बादल महल परिसर के सम्पूर्ण सेवा अनुष्ठान साधक माताजी और वहाँ के पुजारी ने करवाई।
आयोजन में सम्मिलित गोंड़ समाज सहित समस्त आदिवासी समाज के आस्थावानों को इस अनुष्ठान में गोंडवाना के दैवीय शक्तियों का आभास हुआ।
रमेश चंद्र श्याम