ग्रामीण विशेष

कहो नहीं, करके दिखाओ

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
कहो नहीं, करके दिखाओ…. यह सूक्ति जिस महामना की है उसने वर्षों पहले बादल महल परिसर में मुझसे कहा था “ ये आपके राजा- महाराजाओं की विरासत है इसे जानिए और समाज को बताइए…. यह रतनपुर के आदि शक्तियों का मूल स्थान है। यहाँ क्या है ? क्या नहीं है ? यहाँ बैठकर जानिए।“ वह अवसर था लिमहागढ़ के डॉ. एम सिंह खुशरो जी के गोंडवाना किला महल के लोकार्पण का. बादल महल से लिमहागढ़ के लिए बाइक रैली निकली थी। मैं भी बाइक में था, लेकिन दादा हीरा सिंह मरकाम ने चरपहिया वाहन में अपने पास बिठाकर बताया था कि कई बाहरी लोगों ने इसे हथियाने की कोशिश की लेकिन अजब गजब घटनाएं उनके दर पेश आईं, और सब नाकामयाब हुए,
उन्होंने कुछ चमत्कारी और रहस्यमय बातें भी बताई। अभी बादल महल परिसर में जो दृष्टिगोचर होता है उससे कहीं ज्यादा अगोचर है। अमूर्त है। अदृश्य शक्तियां विचरण करती हैं। जिसे सक्षम और सुपात्र व्यक्ति ही “रिसीव” कर पाते हैं। गोंड़ों के देवी-देवता अब भी जाग्रत हैं। उन्हें नियम पूर्वक मान सम्मान दिया जाए तो साक्षात सुफल दायी होंगे।
रतनपुर की महामाई दाई गोंड़ों की कुलदेवी है, किला नेताम राजाओं का है। गोंडवाना साम्राज्य के संस्थापक यदु राय (जादो राय) का भी यहाँ से संबंध का जिक्र होता है। सभी कड़ियाँ अभी जोड़ना बाकी हैं।
गोंडवाना साम्राज्य का “लोगो” (राज्य चिन्ह) “गजारूढ़ सिंह” गोंड़ राजाओं के शौर्य का प्रतीक है। बारह योद्धाओं की शक्ति एक वृषभ (बैल) के बराबर। दस वृषभ शक्ति एक अश्व (घोड़ा) शक्ति के बराबर। बारह अश्व शक्ति बराबर एक महिष (भैसा) शक्ति, पंद्रह महिष शक्ति एक गज (हाथी) के बराबर। पाँच सौ गज शक्ति एक सिंह शक्ति के बराबर मन जाता है। यह शक्ति मापन का प्राचीन मानक है। ऐसे सिंह को अपना राज चिन्ह अपनाने वाले पराक्रमी गोंड़ राजाओं के शक्ति स्थल है बादल महल।
15 अक्तूबर का शक्ति संयोजन जात्रा एक शक्ति साधना का अनुष्ठान था चुनरी चढ़ाव रैली नहीं, जो दिव्य शक्ति द्वारा संचालित हो रहा था। व्यक्ति माध्यम मात्र था। गोंड़ों के दैवीय शक्ति का संधारण नेग, नियम, निषेध और संयम का पालन करनेवाला गोड़ पुरुष ही कर सकता है, अन्यथा अनिष्टकारी परिणाम मिलता है। यह सत्य है और तथ्य है। इसलिए “चुनरी चढ़ावा” और डीजे का परहेज किया गया था। चुनरी चढ़ावा रैली राज नेताओं का राजनीतिक हथकंडा है इसे अलग से कभी भी किया जा सकता है. डीजे मस्ती का भाव पैदा करता है जबकि माँदर और गुदुम बाजा शक्ति संचारित करता है, इसीलिए कई शक्तियां साथ चल रही थी।
मंदिर में बिचौलिये पुजारियों को हटाकर अपने गोंडी रीति रिवाज से सेवा अर्जी भूमका बैगा द्वार की गई जिसकी अग्रिम सूचना कलेक्टर महोदय को दे दी गई थी.
लेकिन माताजी के संज्ञान में यह बात आई कि कुछ जिम्मेदार व्यक्तियों ने शक्ति स्थल के उस नियम और निषेध का अनुपालन नहीं किया गया जिसका हर गोंड़ परिवार के देवालय में कड़ाई से पालन किया जाता है। यह माताजी का प्रायश्चित हीन अपमान है
पुनश्च, गोंड़ समाज सहित समस्त आदिवासी समाज के सियानों, युवा शक्तियों, मातृशक्तियों, का हार्दिक आभार, सेवा जोहार जिन्होंने धार्मिक अनुष्ठान के भाव अनुरूप मार्गदर्शन करते हुए अपने दायित्व का पालन किया। रतनपुर महमाई दाई को अपनाने और अपने नेग नीति नियम और निषेध के साथ सेवा अर्जी का अधिकार प्राप्त करने तक उनका नेतृत्व, मार्गदर्शन, सहयोग और आशीर्वाद मिलता रहे …. यही कामना है।
रमेश चंद्र श्याम