राष्ट्रपति से मिला सर्व आदिवासी समाज का प्रतिनिधिमंडल, अलग आदिवासी धर्म कोड, आरक्षण और पेसा कानून सहित संवैधानिक अधिकारों पर रखी मांगें
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
धमतरी। सर्व आदिवासी समाज के राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष अरविंद नेताम के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सहित झारखंड, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और असम के सामाजिक प्रमुखों के प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति से मुलाकात कर आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, आगामी जनगणना में अलग आदिवासी धर्म कोड, आरक्षण, पेसा कानून और जल, जंगल, जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न मांगों के संबंध में राष्ट्रपति को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा आदिवासियों के लिए संविधान में किए गए प्रावधानों के पालन तथा वर्तमान स्थिति की समीक्षा कराने का आग्रह किया।

प्रतिनिधिमंडल ने आगामी जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड का प्रावधान करने तथा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से आदिवासी समाज को पृथक रखने का निवेदन किया। समाज ने कहा कि आदिवासियों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए संवैधानिक संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
प्तिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ में पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक नियमों को लागू करने तथा ग्राम सभाओं को उनके अधिकारों के अनुरूप पूर्ण अधिकार प्रदान करने की मांग रखी। समाज ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्राम सभा की भूमिका मजबूत होना आवश्यक है, ताकि स्थानीय संसाधनों, परंपराओं और सामुदायिक हितों की रक्षा हो सके।
खनन एवं औद्योगिक परियोजनाओं के लिए आदिवासियों की जमीन के अधिग्रहण, उन्हें जमीन से बेदखल किए जाने और विस्थापन से जुड़ी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर में भूमि बंदोबस्ती नहीं होने के कारण आदिवासियों को राजस्व विभाग से संबंधित कार्यों में आ रही परेशानियों से राष्ट्रपति को अवगत कराया।
इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नक्सल समस्या के कारण विस्थापित हुए आदिवासी परिवारों को उनके मूल गांवों में वापस बसाने के लिए आवश्यक पहल की जानी चाहिए। सलवा जुडूम और नक्सल हिंसा के चलते विस्थापन झेलने वाले परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया गया। नक्सल मामलों में वर्षों से जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों के मामलों की निष्पक्ष जांच कराकर पात्र लोगों की शीघ्र रिहाई के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया।प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासी समाज के आरक्षण, पदोन्नति में आरक्षण, बैकलॉग पदों पर भर्ती, स्थानीय भर्ती तथा आय सीमा से संबंधित विषयों को भी राष्ट्रपति के समक्ष रखा। विशेष रूप से 2.50 लाख रुपये की आय सीमा से जुड़े मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करते हुए समाज ने संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और अधिकार, पांचवी अनुसूची में अधिकार की केंद्र और राज्य शासन के द्वारा पालन और वर्तमान स्थिति को लेकर समीक्षा का आग्रह किया राष्ट्रपति । इन सभी विषयों पर अलग-अलग पत्र सौंपकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। बहुत
प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि राष्ट्रपति ने आदिवासियों की पहचान, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होकर कार्य करने तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल द्वारा रखी गई मांगों पर विचार करने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में अरविंद नेताम (अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज), अकबर राम कोर्राम (अध्यक्ष, गोंडवाना गोंड महासभा, छत्तीसगढ़), बी.एस. रावटे (कार्यकारी अध्यक्ष), विनोद नागवंशी (प्रदेश सचिव), देवकुमार धान (पूर्व सांसद, झारखंड), भुवन कोर्राम (राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, गोंडवाना गोंड महासभा, मध्यप्रदेश), विश्वनाथ ताना जी वाकड़े (महाराष्ट्र), निपोन सुटिया मोहनलाल कोमारे (कोषाध्यक्ष), जीवराखन मरई (प्रदेश उपाध्यक्ष), सविता साय (महिला प्रभाग अध्यक्ष), सुभाष परते (युवा प्रभाग अध्यक्ष), सुमेर सिंह नाग (अध्यक्ष, गोंडवाना समन्वय समिति, बस्तर संभाग) तथा महेश रावटे (संयुक्त सचिव) आदि शामिल रहे।

