कार्तिक के पावन महिना, गांव गली खोर ल करे अंजोर
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
*खार खेत म धान के बाली,चले पुरवहिया म मारे हिलोर।*
कुंवार महिना के जवई अऊ कार्तिक महीना के आगमन सुंदर अऊ सब बर अमृत लेके आथे।जईसे शीत बरसे के शुरू होथे शीत के बरसना अऊ ठंड के आगमन ले कई प्रकार के रोग राई दूर हो जथे।हरा भरा खेत खलिहान दिखथे,धान जेन ल अन्नपूर्णा माता के नाम ले जाने जाथे म सुंदर बाली आ जथे।धान के खेत के सुनहरा पन अईसे लगथे जना -मना सोना बगरे हवय।ओ समय मन झूमर जथे।
इही अन्नपूर्णा माता के आगमन में किसान अपन कोठी ढोली के साफ सफाई,घर द्वार के लिपई पोतई करके अन्नपूर्णा माता जेन लक्ष्मी स्वरूप म होथे जेकर आशीर्वाद लें पालन पोषण होथे अऊ अन्न धन भरे रहिथे के स्वागत खातिर तैयारी करके रखे जाथे।
गांव के लईका मन बड़े बिहिनिया उठ के कार्तिक नहाथे,लोग शीत के आनंद ले खातिर शरीर ल स्वस्थ अऊ तंदरुस्त रखें खातिर टहलथे जेकर ले शरीर स्वस्थ अऊ मन चंगा रहिथे।ये महिना म जादा तबियत खराब नई होवय,हरियर हरियर साग भाजी ताजा मिलथे जेन साग के साथे साथे दवा के भी काम करथे।
फेर आदिवासी गोंड के साथ साथ गांव भर के लोग मिलके ईसर गवरा के बिहाव रचना के आयोजन घलो होथे जेमा बिहाव के पूरा नेग दस्तूर ल करथे,तीन से पांच दिन पहिली फूल कुचरथे जेमा पांच से सात फूल,देशी अंडा,आदि ल कुंवारी लड़की पांच या सात के हाथ कुचरवाय जथे जेन सतबहिनीया के नाम से जाने जाथे अऊ गीत गाके चाऊर चढाथे –
*एक पतरी रैनी भैनी ,राय रतन ओ गवरा दाई,तोरे शीतल छांव, चौकी चंदन पीढूली गवरा के होथे मान, जैईसे गवरा नाम तईसे देबे आषिशे परवा छछलगे डार।* अईसे सात चाऊर चढ़ाथे फेर सुआ नाचथे,जेमा गांव के सिद्धबाबा डंढैय्या माता, सातो माता,शीतला महामाया ठाकुरदेव गांव के बैगीन बैगा सब ग्राम रक्षक ल याद करे जाथे। जेमा गांव के सुखी समृद्धि के कामना करें जाथे रात भर पूजा अर्चना करके आशीर्वाद लेथे,फेर पूजा अर्चना के बाद सुबह सुबह सरवर स्नान कराय जथे। चुंकी देवाधिदेव महादेव ईसर राजा के रूप,गवरा माता ल बिहाव करे खातिर आथे जेन ल गोंड समाज ईसर राजा गवरा माता ल कुल देवी के रूप म मानथे ऐखरे आगमन स्वरूप म घरो घरो दीया जलाय जथे।
फेर दूसरे दिन राऊत भाई मन गांव किसान के सहयोग ले गौधन पूजा करथे गाय के गला म सोहई बांध के आशीष देथे गांव गांव मातर मड़ई शुरू हो जाथे।येखर बाद से ही गोंड आदिवासी म अपन बेटी बेटा बर मंगनी जचनी बिहाव के काम शुरू होथे इही ल देवारी अर्थात देव आगमन के रूप म देखे जाथे।
फेर कार्तिक पुन्नी के दिन जम्मो कार्तिक नहवईय्या अंवरा पेड़ के नीचे खीर रांध के खाथे अऊ पुन्नी स्नान ल आशीर्वाद लेके अंतिम करथे।
छत्तीसगढ़ म विभिन्न धर्म संस्कृति रीति नीति परंपरा के मनईय्या समाज रहिथे,फेर सबो झन मिलजुल के सबो तिहार ल एक परिवार के रूप म मनाथे।ईही तिहार मन एकता और भाईचारा लेके आथे।इही अनेकता म एकता के प्रतीक के रूप म माने जाथे।फेर कुछ मन नशापान अऊ जुआ चित्ती म घलो लिप्त रहिथे।जेन उचित नही हवय।ऐखरे कारण देवारी तिहार,कई परिवार ल दिवालिया घलो बना देथे।
त जम्मो समाज के भाई बहिनी मन से आग्रह हवय अईसन तिहार ल शांत एकता अऊ छल कपट दुश्मनी ल छोड़ एक साथ जुर मिल के बड़े प्रेम भाव से हंसी खुशी से मनाना चाहिए।
जय सेवा जय जोहा
लेख – आर के कुंजाम ‘प्रकृति’
व्याख्याता
पंडित दीनदयाल उपाध्याय वार्ड कर्मचारी कालोनी भाटापारा जिला बलौदाबाजार भाटापारा छत्तीसगढ़
9907670711
पिन-493118

