शिक्षा

MATS UNIVERSITY, RAIPUR ने राष्ट्रव्यापी ‘बचपन बचाओ अभियान’ में निभाई सक्रिय भूमिका,

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज स्कूली बच्चों को POCSO अधिनियम एवं बाल अधिकारों के प्रति किया जागरूक
विधि विभाग एवं सामाजिक कार्य विभाग
बच्चों के सुरक्षित भविष्य, अधिकारों के संरक्षण एवं बाल शोषण की रोकथाम के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रव्यापी *‘बचपन बचाओ अभियान’* के अंतर्गत MATS University, Raipur के विधि विभाग एवं सामाजिक कार्य विभाग के विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), रायपुर एवं दुर्ग के सहयोग से आयोजित इस अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने विभिन्न विद्यालयों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए।
अभियान के तहत विश्वविद्यालय की टीम ने GD Goenka International School, सेजबहार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मर्रा, तहसील पाटन, जिला दुर्ग तथा स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल का दौरा कर कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को जागरूक किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को POCSO अधिनियम, 2012, बाल अधिकारों, सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा बाल शोषण की रोकथाम के संबंध में सरल भाषा एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से जानकारी दी गई। साथ ही, किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में विश्वसनीय व्यक्ति को सूचित करने एवं कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
अभियान में रायपुर एवं दुर्ग के न्यायिक अधिकारियों, DLSA प्रतिनिधियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की गरिमामयी सहभागिता रही। इस अवसर पर MATS University के माननीय चांसलर श्री गजराज पगारिया, डायरेक्टर जनरल श्री प्रियांश पगारिया, माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) के. पी. यादव एवं माननीय रजिस्ट्रार श्री गोकुलनन्द पंडा सर एवं डेप्यूटी रजिस्ट्रार द्वारा मार्गदर्शन, प्रोत्साहन एवं संस्थागत सहयोग से विश्वविद्यालय की सामाजिक एवं विधिक पहल संभव हो सकी।
कार्यक्रम का नेतृत्व विधि विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पायल चटर्जी एवं सामाज कार्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना आर. तुपट के मार्गदर्शन एवं डॉ. आई. नागमणि देशलहरे, श्री ओम प्रकाश कनौजिया एवं डॉ. स्नेह कुमारी का विशेष योगदान रहा।
विश्वविद्यालय प्रबंधन, DLSA, न्यायिक अधिकारियों, विद्यालय प्राचार्यों, शिक्षकों एवं पैरालीगल वॉलंटियर्स (PLVs) के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
“हर बच्चे को सुरक्षित बचपन, सम्मान और भयमुक्त जीवन का अधिकार है।”