कोरोना संक्रमण के कारण लाॅकडाउन में नवाचारी पहल

रिसर्च फैलो की नियुक्ति के लिए आनलाइन इन्टरव्यू आयोजित
रायपुर, 29 मई, 2020। कोरोना संक्रमण के कारण लागू देशव्यापी लाॅकडाउन की वजह से लोगों के एक स्थान पर एकत्र होने पर लगी रोक के कारण शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा बैठकें, साक्षात्कार आदि कार्य भी स्थगित रखे गए हैं। ऐसी स्थिति में आनलाइन कक्षाओं के आयोजन के साथ ही आनलाइन बैठकों एवं साक्षात्कारों का भी आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में एक नवाचारी पहल करते हुए आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के बायोटेक्नोलाजी विभाग में रिसर्च फेलो के पद पर नियुक्ति हेतु आनलाइन इंटरव्यू का आयोजन किया गया। भारत सरकार द्वारा रामतिल की नई प्रजातियों के विकास हेतु चार वर्षांे के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में एक परियोजना स्वीकृत की गई है। इस परियोजना में रिसर्च फेलो के 2 पद स्वीकृत किए गए है। इस पद पर नियुक्ति हेतु वाक-इन इंटरव्यू का आयोजन किया जाना था परन्तु कोरोना संकट को देखते हुए आनलाइन साक्षात्कार का आयोजन किया गया जिसमें रायपुर एवं अन्य जिलों के 7 अभ्यर्थी शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि रामतिल की फसल सरगुजा क्षेत्र में ली जाती है। यह एक तिलहनी फसल है जिसमें 35 प्रतिशत तक तेल होता है। इसका तेल खाने, जलाने एवं औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। अतः इस तिल की मांग उद्योग जगत में अधिक है। वर्तमान में किसानों द्वारा रामतिल की स्थानीय प्रजातियां ही लगाई जाती हैं जिसका उत्पादन भी कम होता है। स्थानीय प्रजातियों की औसतन उपज लगभग 3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। रामतिल की अधिक उपज देने वाली प्रजातियों के विकास हेतु विश्वविद्यालय में यह परियोजना स्वीकृत की गई है। इस परियोजना की कुल लागत 81 लाख रूपये है जिसका संचालन बायोटेक्नोलाजी विभाग की वैज्ञानिक डाॅ. श्रीमती जेनू झा द्वारा किया जाएगा। बायोटेक्नोलाजी विभाग में संचालित की जाने वाली इस परियोजना हेतु रिसर्च फेलो के पद के आनलाइन साक्षात्कार के दौरान बायोटेक्नोलाजी विभाग के विभागाध्यक्ष, डाॅ. एस.बी. वेरूलकर, पौध रोग विभाग के विभागाध्यक्ष, डाॅ. अनिल कोटस्थाने, सस्य विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डाॅ. विवेक त्रिपाठी, डाॅ. श्रीकांत चितले एवं डाॅ. के.के. साहू, उपस्थित थे।
(संजय नैयर)
सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी
