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विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 31 मई पर विशेष सफलता की कहानी शोभाराम पटेल.

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छात्रा की बात बहुत बुरी लगी तोछोड़ागुटखा खाना
छात्राने दी मुझे नई ज़िंदगी
रायपुर 30 मई 2020 । स्वास्थ्य विभाग में नियमित ड्राइवर के रूप में कार्य कर रहे 52 वर्षीय शोभाराम पटेल कोस्कूल में पढ़ते समयसे गुटखा खाने की आदत पड़ गई थी । पहले तो एक-दो पाउच गुटखा खाकर ही संतोष हो जाता था लेकिन धीरे-धीरे आदत ऐसी पड़ी कि कम से कम 200-250 रुपये के पाउच तक का सेवन करने लगे ।आमदनी कम थी और उस पर यह आदत जिसके कारण घर की आर्थिक स्थिति भी खराब होने लगी थी।
नौकरी के शुरुआती दिनों में सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ रहे और उसके बाद सिविल सर्जन कार्यालय में ।वर्तमान में नर्सिंग कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रहे हैं ।
शोभाराम पटेल बताते हैं उनकी इस आदत के कारण नर्सिंग कॉलेज में नर्स की ट्रेनिंग ले रही छात्राओं को काफी परेशानी होती थी । एक दिन एक छात्रा ने मुझसे कहा कि मैं आपकी गाड़ी में नहीं बैठूंगी क्योंकि आप गुटखा और तंबाकू का सेवन करते हैं और इसकी बदबू से मुझे एलर्जी होने लगती है । मुझे उल्टी आती हैं । मेरी तबीयत भी खराब हो जाती है,’’ शोभाराम के कहा । उस छात्रा ने शोभाराम को सलाह दी कि वह सरकार द्वारा चलाए चलाए जा रहे तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम में तंबाकू और गुटखे की आदत को छुड़ाने के लिए पूरी टीम परामर्श करती है और नियमित रूप से चेकअप भी करती है। छात्रा ने शोभाराम को समझाया टीम तो परामर्श करेगी लेकिन अंदर बुरी आदत से छुटकारा पाने की इच्छा पैदा करनी तभी वह इस बुरी आदत से बाहर निकल सकेगा। उस समय मुझे उस छात्रा की बात बहुत बुरी भी लगी । मैंने 2 दिन की छुट्टी ले ली । लेकिन फिर मैंने भी सोचा यह वाकई मेरे लिए बहुत खराब चीज है। मेरा जीवन इसके खाने से खराब हो रहा है ।क्यों न मैं वहॉ जाकर इस आदत को छोड़ने की जानकारी लूं । जब मैं वहां गया सोशल वर्कर ने मुझे नियमित रूप से आने और नशा मुक्ति केंद्र पर नियमित रूप से योग कराए गए दवाइयां दी गई जो सब निशुल्क था । 8 माह पूर्व टीम के अथक प्रयास से मुझे तंबाकू और तंबाकू से बने उत्पाद के सेवन मुक्ति मिल गई।
शोभाराम बताते हैं तंबाकू सेवन को छोड़ना आसान काम नहीं करता था तंबाकू छोड़ना दृढ़ इच्छा शक्ति पर ही निर्भर होता है । शुरुआत में 15 दिन काफी कष्टप्रद थे । तंबाकू सेवन की इच्छा को रोकना और तंबाकू नहीं खाने के कारण शरीर में बेचैनी, चिड़चिड़ापन, रात में नींद न आना और अन्य तरह के लक्षणों से जूझना पड़ा । परामर्शदाताओं ने सलाह दी रात में मेथीदाना भिगोकर सुबह उसका पानी पीना चाहिए ।दालचीनी का सेवन, काजू और बादाम के साथ और योग करने की सलाह भी दी। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी । काम में मन लगने लगा मन से तंबाकू सेवन की इच्छा भी जाती रही और निकोटिन गम को भी अलविदा कह दिया ।
धीरे धीरे यह आदत खत्म हो गई और अब मैं पूर्ण रुप से गुटका और तंबाकू के सेवन अलविदा कह चुका हूं । जब से गुटका छोड़ा है मेरे दोनों बेटे,बहू, दमाद और बेटी मेरी पत्नी सब बहुत खुश हैं ।‘’
शोभाराम के बड़े बेटे देशमन पटेल कहते हैं पिताजी ने उनकी समझाइश कभी नहीं मानी । मैं उस छात्रा का आभारी हूं जिनके कहने पर उन्होंने अपनी इच्छा शक्ति और आत्मबल से नशे पर विजय प्राप्त की ।‘’ शोभाराम की पत्नी भूलेश्वरी पटेल बताती है जबसे गुटखे और तंबाकू सेवन की आदत को छोड़ा है तब से उसके बनाए हुए हर खाने की बहुत तारीफ करते हैं । पहले हमेशा मिर्ची होने की शिकायत करते थे। मैं बहुत आभारी हूं नशा मुक्ति केंद्र की पूरी टीम का जिन्होंने मेरे पति की इस बुरी आदत से मुक्ति दिलाई ।अब मेरे परिवार में दोबारा से खुशियां लौट आई है ।‘’

शोभाराम कहते हैं जबसे गुटखा तंबाकू छोड़ा है तब से उसके पैसे भी बचे हैं और उसकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी हुई।भविष्य के लिए एक छोटे से घर का सपना भी लगता है कि अब साकार हो जाएगा ।

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