Sunday, October 18, 2026
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विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 31 मई पर विशेष सफलता की कहानीकुलेश्वर वर्मा

दृढ़ इच्छाशक्तिसे त्यागी तंबाकू सेवन की आदत
रायपुर 30 मई 2020 । कुलेश्वर वर्मा (36)पिछले 20वर्षों से तंबाकू और तंबाकू से बने उत्पाद का सेवन कर रहे थे । तंबाकू ही उनका सब कुछ था । तंबाकू के बिना उनको लगता था एक पल भी जी नहीं पाऐंगे । लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर परामर्श ने कुलेश्वर वर्मा को 10 माह पूर्व तंबाकू और तंबाकू से बने उत्पाद के सेवन से मुक्ति दिलाई।
कुलेश्वर वर्मा वाहन प्रबंधक के रूप में एक निजी संस्था में कार्य करते हैं । जब वह आठवीं क्लास में थेतब से उनको तम्बाकू की आदत लग गई थी । शुरुआत के दिनों में मां बाप से छुपकर स्कूल में दोस्तों के साथ तंबाकू या गुटखे का सेवन करते थे लेकिन धीरे धीरे यह आदत ऐसी पड़ गई कि इससे पार पाना एक समुद्र पार करने के बराबर हो गया ।
घर की आर्थिक स्थिति भी इतनी सुद्रण नहीं थी।शुरुआती दिनों में पिताजी के जेब से एक दो रूपये चुराकर अपनी लत को पूरा किया औरकभी-कभी दोस्तों ने भी सहयोग किया । मुझे लगा भी में जो सेवन कर रहा हूं यह एक बहुत बड़ा काम है ।‘’ लेकिन धीरे-धीरे इसने शरीर को अंदर ही अंदर खोखला करना शुरू कर दिया। कुलेश्वर बताते हैं आदत इतनी खराब हो गई थी एक दिन में वहकम से कम 50से 100 रुपए तक के तंबाकू और गुटखे का सेवन करने लगे थे। जब नौकरी शुरू की तो यह आदत और बढगई। जो भी साथी मिलता वह भी गुटखे का शौकीन होता । एकवर्ष पहले कुलेश्वर ने अखबार में नशा मुक्ति को लेकर एक खबर पढ़ीजिसमें बताया गया था रायपुर में नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की गई है जो पंडरी के जिला अस्पताल में स्पर्श क्लीनिक में है ।मुझमें यह खबर पढ़ कर तम्बाकू खाने की आदत छोड़ने की इच्छा जागृत हुई। मैंने वहां जाकर जब संपर्क किया तो सोशल वर्कर अजय बैस और नेहा सोनी ने मेरा परामर्श किया। डॉ सृष्टि यदु द्वारा मुझे निकोटीन चिंगम चबाने को दी गई। नियमित रूप से मेरी काउंसलिंग और व्यायाम कराने का कार्य किया गया।‘’
तम्बाकू से मेरा मुंह भी नहीं खुलता था।लगातार फिज़ीयोथैरिपी सलाह का पालन करने से अब कुछ आराम मिला हैं । खाना खाने में स्वाद आने लगा हैऔर मेरा पैसा बचने लगा है । घर में और समाज में मुझे एक विजेता के रूप में देखा जाने लगा है,’’ कुलेश्वार बताते हैं ।
कुलेश्वर कहते है तम्बाकू से मुक्ति पाना आसान नही था । शुरुआत में अजीब सी बेचैनी, घबराहट, और चिड़चिड़ापन होता था।रात में नींद नहीं आती थी और छोटी छोटी बातो परगुस्सा आता था। काम करने से पहले तम्बाकू खानेकी इच्छा होतीथी और नही मिलने पर काममें मन नही लगता था| भूख कम हो गई और कभी कभी लगा की मस्तिष्क संतुलन बिगड़ने लगा है ।
केंद्र के परामर्शदाताओं ने तम्बाकू को छोड़ने के लिए निकोटिन गम 2 mg, 4 mg दिया था । साथ ही मल्टीविटामिन का टेबलेट भी को दिया ।इसके साथ कुछ घरेलू उपचार के माध्यम से भी तम्बाकू को छुड़ाने के लियें प्रयास करवाये जैसे सुबह योग के दौरान दालचीनी और 2 काजू, बादाम को खाने के साथ अधिक पानी पीने की सलाह दी गई । परामर्श में तम्बाकू को नकारना भी सिखाया, और मन को नियंत्रण में करने पर बल दिया गया। शुरुआत में बहुत परेशानी हुई लेकिन फिर तम्बाकू सेवन से मुक्ति पा गया ।
कुलेश्वर को जानने वाले कहते हैं जब यह ऑफिस में आते थे तो दिनभर इनके मुंह में तंबाकू भरा रहता था इनसे बात करने की इच्छा नहीं होती थी । जब यह बात करते थे तो बदबू आती थी।
“लेकिन जब से इन्होंने यह आदत छोड़ी है मैंने एक हज़ार रूपये इनको ईनाम दिया और इनकी पांच सौ रूपये महावार की वृद्धि की है । मुझे बहुत खुशी होती है कि मेरे यहां भी तंबाकू पर विजय पाने वाला एक योद्धा मौजूद है । मैंकुलेश्वर उदाहरण देता हूं कि जब यह छोड़ सकते हैं तो क्यों ना हम सब मिलकर इस तंबाकू और तंबाकू से बने उत्पाद के सेवन से मुक्ति पाएं कुलेश्वर की तरह बेहतर जिंदगी चुने,,”आशीष सर्राफ कुलेश्वर के नियोक्ता”।

कुलेश्वर वर्मा की पत्नी नीलम वर्मा बताती है सुसराल में उनकी पहचान गुटखे वाले भैया की पत्नी के रूप में होती थी लेकिन जब से इन्होंने तम्बाकू छोड़ा है लोगों को बहुत ताज्जुब होता है । इतना गुटखा खाने वाला व्यक्ति कैसे गुटखा छोड़ सकता है । कई लोगों ने इनको जबरदस्तीगुटखा खिलाने की भी कोशिश करें लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया मैंने जिंदगी चुनी है तंबाकू नहीं ।‘’

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