अदाणी फाउंडेशन के सुपोषण अभियान के तहत किया गया लोगों को जागरूक बनाने का प्रयास, संगिनीं दीदियों ने दिया सहयोग

सरगुजा: इन दिनों सारा देश कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस महामारी से बचाव का एकमात्र तरीका, इसके प्रति जागरूकता ही है। इसकी गंभीरता को समझते हुए अदाणी फाउंडेशन, लोगों को जागरूक बनाने का हर मुमकिन प्रयास कर रहा है। अपने सुपोषण अभियान के तहत अदाणी फाउंडेशन ने खासकर महिला एवं बच्चों समेत सम्पूर्ण मानव स्वास्थ्य को विशेष महत्व दिया है।
अदाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित परियोजना ‘सुपोषण’ के अंतर्गत बच्चों के पोषण और माताओं के परामर्शकर्ता के रूप में काम करने वाले समुदाय की संगिनीं दीदियों द्वारा वर्तमान स्तिथि में कोरोनो के प्रति सावधानी बरतने तथा सुरक्षा उपायों के बारे में समुदायों को शिक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा COVID19 से लड़ने के लिए विभिन्न जागरूकता संदेशों को तैयार जा रहा है तथा इसके लिए वीडियो और अभिनव तरीकों (चित्रात्मक दीवार लेखन) के माध्यम से समुदायों तक जागरूकता का प्रसार किया जा रहा है।
खास बात यह है कि इस सुपोषण अभियान के तहत जुड़ी संगिनी दीदियां दूरसंचार के माध्यम से लगातार बच्चों की माता और गर्भवती बहनों से जुड़ी रहती हैं, जिससे उस परिवार को इस कठिन परिस्तिथि में भी अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति एक सुरक्षा महसूस होती हो सके और सहयोग मिलता रहे। इस तरह अदाणी फाउंडेशन, विशेषकर ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए, इस कठिन समय में एक महत्वपूर्ण संसाधन बनकर कार्य करने का प्रयास सराहनीय है।
सुपोषण अभियान अदाणी फाउंडेशन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जो भारत वर्ष के बच्चों, किशोरियों और महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया के स्तर को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह परियोजना वर्त्तमान में 12 राज्यों से आने वाले 19 जिलों के 1400 गावों और शहरी बस्तियों में संचालित है। यह परियोजना लगभग 16 लाख लोगों से जुड़ी है जिसमें 1 लाख से ज्यादा 0 से 5 वर्ष के बच्चे, 28 हजार किशोरियां और 70 हजार महिलाएं सीधे प्रभावित हो रही हैं।
सुपोषण संगिनी, सुपोषण परियोजना की धुरी के रूप में गावों में कार्यरत है। सुपोषण संगिनी गांव में एक मित्र पोषण सलाहकार और मार्गदर्शक के रूप में जानी जाती हैं। यह परियोजना क्षेत्र के गावों की महिलाएं होती हैं, जो अपने गांव को कुपोषण मुक्त बनाना चाहती हैं। उनका सपना है कि गांव का कोई भी बच्चा कुपोषित ना हो और इसके लिए वह हर बच्चे के परिवार से सीधा संपर्क में रहती हैं तथा बच्चों की परवरिश और खान पान के बारे में परिवार वालों को शिक्षित करती हैं। सुपोषण परियोजना के तहत आज लगभग 620 सुपोषण संगीनियां कार्य कर रही हैं।
