रायगढ़ में सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए अदाणी फाउंडेशन कर रही ग्रामीणों को जागरूक

रायगढ़: सरकार ने वैश्विक महामारी कोविड 19 से बचाव हेतु सोशल डिस्टेंसिंग को एक महत्वपूर्ण उपाए बताया है। इसे ध्यान में रखते हुए अदाणी फाउंडेशन की सुपोषण संगीनियों ने लोगों को निश्चित दूरी की महत्ता समझाने का जिम्मा उठाया है। जिसके तहत तमनार क्षेत्र के 30 गावों में विभिन्न गतिविधियां चलाई गई। सुपोषण संगीनियों द्वारा राशन वितरण के दौरान लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने से लेकर सभी राशन दुकानों के सामने एक मीटर की निश्चित दूरी पर चूने के उपयोग से गोला बनाने तथा राशन वितरण के दौरान स्वयं उपस्थित रहकर लोगों को मास्क लगाने व सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित करना जैसे अन्य जागरूकता अभियान चलाए गए।
सुपोषण संगीनियों ने ग्रामीण महिलाओं के छोटे-छोटे समूहों को साबुन से बार-बार हाथ धोने के महत्व को समझाया और साबुन से कैसे व कितनी देर तक हाथ धोना है, उसे प्रदर्शन के माध्यम से समझाने की कोशिश की। इस दौरान अदाणी फाउंडेशन द्वारा गांवों में मास्क और साबुन का वितरण किया गया, साथ ही जरूरतमंदों के बीच राशन का वितरण भी किया गया। उल्लेखनीय है कि कोविड काल में अदाणी फाउंडेशन ने ग्रामीणों को तत्परता के साथ मदद पहुंचाने का कार्य किया है। संस्था मार्च महीने से ही कोविड-19 के प्रति जागरूकता मुहीम चला रही है। इसके तहत अदाणी फाउंडेशन देश और राज्य स्तर पर कई कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
इस दौरान राहत व सहायता प्रभावित गांवों और समुदाय के सदस्यों को अदाणी फाउंडेशन द्वारा चिन्हित किया गया तथा जरूरतमंदों के बीच मास्क और साबुन वितरण, जागरूकता कार्यक्रम, राशन किट वितरण, खाद्य पैकेट वितरण, पीने का पानी एवं चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। जागरूकता अभियान के तहत पिछले दिनों सुपोषण संगीनियों ने सभी 32 गावों में एक हैंडवाशिंग प्रोग्राम का आयोजन किया था, जहां ग्रामीणों को हैंडवाशिंग के उचित तरीके के बारे में बताया गया। कोविड काल के दौरान फाउंडेशन ने राहगीरों खासकर हाईवे पर चलने वाले ट्रक ड्राइवर्स व अन्य के लिए खाद्य पैकेट व पीने के पानी की व्यवस्था भी की।
‘सुपोषण’ अदाणी फाउंडेशन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो भारत वर्ष के बच्चों, किशोरियों और महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया के स्तर को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह परियोजना वर्तमान में 12 राज्यों के 22 साइट,19 जिलों के 1400 गावों और शहरी बस्तियों में संचालित है। यह परियोजना लगभग 16 लाख लोगों से जुड़ी है, जिसमें 1 लाख से ज्यादा 0 से 5 वर्ष के बच्चे, 28 हजार किशोरियां और 70 हजार महिलाएं सीधे प्रभावित हो रही हैं।
इसके तहत कार्यरत सुपोषण संगीनियाँ सुपोषण परियोजना की सबसे मजबूत कड़ी के रूप में गाँव में कार्यरत हैं। ये परियोजना क्षेत्र के गावों की ही महिलाएं होती हैं, जो अपने गावों को कुपोषण मुक्त करने की मनसा रखती हैं। सुपोषण संगीनियाँ गावों में एक मित्र, पोषण सलाहकार तथा मार्गदर्शक के रूप में जानी जाती हैं। वर्तमान समय में 600 से अधिक सुपोषण संगीनियाँ अपने अपने क्षेत्र में कार्यरत हैं। ख़ास बात यह है कि इन महिलाओं ने अपने आत्मविश्वास के बल पर ने केवल पोषण-कुपोषण सम्बन्धी विषयों के बारे में सीखा बल्कि परियोजना से जुड़े आकड़ों को एकत्र कर टैब में दर्ज करने व एक-एक बच्चे की प्रगति को समझने के बारे में भी जाना।

